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115 unique murli dates in this topic

115 murlis in हिंदी

06/02/1969“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”13/03/1969“प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”06/07/1969“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”02/02/1970“आत्मिक पावर की परख”02/07/1970“साइलेन्स बल का प्रयोग”31/12/1970“अमृतवेले से परिवर्तन शक्ति का प्रयोग”22/01/1971“दिलतख्त नशीन आत्मा की निशानी”09/10/1971“पॉवरफुल वृत्ति से सर्विस में वृद्धि”21/01/1972“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”10/06/1972“सूक्ष्म अभिमान और अनजानपन”22/11/1972“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”19/09/1975“शक्तियों एवं पाण्डवों की विशेषतायें”15/10/1975“आत्मघाती महापापी न बनकर डबल अहिंसक बनने की युक्तियाँ”06/02/1977“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”21/05/1977“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”27/05/1977“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”29/05/1977“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”14/06/1977“देश और विदेश का सैर-समाचार”25/06/1977“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”02/01/1980“आने वाली दुनिया कैसी होगी?”18/01/1980“स्मृति दिवस पर बापदादा की बच्चों प्रति शिक्षायें”13/03/1981“डबल रूप से सेवा द्वारा ही आध्यात्मिक जागृति”15/03/1981“स्वदर्शन चक्रधारी तथा चक्रवर्ती ही विश्व-कल्याणकारी”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”03/04/1981“ज्ञान मार्ग की यादगार भक्ति मार्ग”13/04/1981“रूहे-गुलाब की विशेषता”04/10/1981“संकल्प शक्ति का महत्व”09/10/1981“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”24/10/1981“सच्चे आशिक की निशानी”29/10/1981“बाप और बच्चों का रुहानी मिलन”08/11/1981“अन्तर सम्पन्न करने का साधन ‘तुरन्त दान महापुण्य’”18/11/1981“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”23/11/1981“त्याग का भी त्याग”14/01/1982“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”20/01/1982“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”12/03/1982“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”06/04/1982“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”08/04/1982“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”16/04/1982“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”26/04/1982“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”13/06/1982“एक का मन्‍त्र याद रहे तो सबमें एक दिखाई देगा (टीचर्स के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात)”31/12/1982“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”11/01/1983“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”15/01/1983“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”11/04/1983“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”13/04/1983“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”17/04/1983“कर्मातीत स्थिति के लिए समेटने और समाने की शक्तियों की आवश्यकता”11/05/1983“हे युवकों विश्व परिवर्तन के कार्य में निमित्त बनो”17/05/1983“संगम युग - मौजों के नज़ारों का युग”22/01/1984“नामीग्रामी सेवाधारी बनने की विधि”24/02/1984“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”26/02/1984“बापदादा की अद्भुत चित्रशाला”02/04/1984“बिन्दु का महत्व”10/04/1984“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”26/04/1984“रुहानी विचित्र मेले में सर्व खज़ानों की प्राप्ति”21/11/1984“स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त”10/12/1984“पुराने खाते की समाप्ति की निशानी”19/12/1984“सर्वश्रेष्ठ, सहज तथा स्पष्ट मार्ग”07/01/1985“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”21/02/1985“शीतलता की शक्ति”06/03/1985“होली का रूहानी रहस्य”01/01/1986“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”08/01/1986“धरती के ‘होली’ सितारे”15/01/1986“सस्ता सौदा और बचत का बजट”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”18/01/1990“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”20/01/1990“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”03/04/1991“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”04/12/1991“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”18/11/1993“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”07/11/1995“बापदादा की विशेष पसन्दगी और ज्ञान का फाउण्डेशन - पवित्रता”16/11/1995“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”04/12/1995“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”13/12/1995“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”14/12/1997“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”18/01/1998“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”25/11/2000“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”31/12/2000“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”18/01/2001“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”20/02/2001“शिव जयन्ती, व्रत लेने और सर्व समर्पण होने का यादगार है''25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”31/12/2001“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''11/03/2002“विशेषतायें परमात्म देन हैं - इन्हें विश्व सेवा में अर्पण करो''25/10/2002“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”31/12/2002“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”18/01/2003“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''31/12/2003“इस वर्ष निमित्त और निर्माण बन जमा के खाते को बढ़ाओ और अखण्ड महादानी बनो''15/10/2004“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''30/11/2004“अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो''17/03/2007“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”31/03/2007“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”30/11/2007“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”15/12/2007“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”18/01/2008“सच्चे स्नेही बन, सब बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो”18/02/2008“विश्व परिवर्तन के लिए शान्ति की शक्ति का प्रयोग करो”05/03/2008“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”18/03/2008“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”02/04/2008”इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”

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