बिलासपुर स्थित ब्रह्माकुमारीज के मुख्य सेवाकेन्द्र, टेलीफोन एक्सचेंज रोड राजयोग भवन में विश्व बंधुत्व दिवस के उपलक्ष्य में तथा ब्रह्माकुमारी संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी की 18वीं पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर विशाल रक्तदान महाअभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का शुभारम्भ केंद्रीय राज्य आवासन एवं शहरी विकास मंत्री माननीय भ्राता तोखन साहू जी ने किया।
माननीय तोखन साहू जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि रक्तदान जीवन का सबसे पवित्र कार्य है, क्योंकि यह केवल मनुष्य से मनुष्य तक ही पहुँच सकता है। कृत्रिम रक्त कभी भी नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि वास्तव में यह अवसर प्रकाश पर्व जैसा है, जब सैकड़ों ब्रह्माकुमार भाई-बहन एक साथ मिलकर महादान कर रहे हैं और दादी प्रकाशमणि जी का प्रकाश समाज में फैला रहे हैं।
सेवाकेन्द्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने अपने संदेश में कहा कि रक्तदान को हम “महादान” कहते हैं, क्योंकि यह किसी अमीर या गरीब को नहीं, बल्कि मानव जीवन को बचाने के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस रक्तदान शिविर का स्लोगन था – “रक्तदान : विश्व बंधुत्व का अभियान”। उन्होंने चार मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डाला –
1. दादी प्रकाशमणि जी के प्रेम, अपनत्व और विश्व सेवा के आदर्श को स्मरण करना।
2. भारत में सुरक्षित रक्त की आवश्यकता की पूर्ति करना।
3. नि:स्वार्थ दान की संस्कृति को बढ़ावा देना, जो मानवता और देशभक्ति का सर्वोच्च स्वरूप है।
4. युवाओं में नियमित रक्तदान की परंपरा विकसित करना।
राजयोग भवन में सुबह 8:30 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक चले इस अभियान में कुल 134 रक्तवीरों ने रक्तदान किया। कई रक्तवीर 90 किलोमीटर दूर से भी आकर इस सेवा कार्य में सम्मिलित हुए। सेवाकेन्द्र की सभी समर्पित बहनों ने भी उमंग-उत्साह से रक्तदान में भाग लिया और गौरव का अनुभव किया।
सभी रक्तवीरों को लायंस क्लब बिलासपुर रॉयल की ओर से हेलमेट तथा प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर लायंस क्लब के केबिनेट सेक्रेटरी डॉ. कमल छाबड़ा का विशेष सहयोग रहा। बिलासपुर के विभिन्न सेवाकेन्द्रों – हेमुनगर, श्री विहार, उसलापुर, सिरगिट्टी एवं रामाग्रीन सिटी – से भी सैकड़ों रक्तवीरों ने आकर इस अभियान में सक्रिय योगदान दिया।
कार्यक्रम का समापन सभी रक्तवीरों और सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए बीके स्वाति दीदी ने किया और कहा कि यह अभियान वास्तव में विश्व बंधुत्व और नि:स्वार्थ सेवा की भावना को और अधिक गहरा करता है।






























