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एकाग्र और सकारात्मक विचारों का अनुभव बनाए रखना (भाग 3)

एकाग्र और सकारात्मक विचारों का अनुभव बनाए रखना (भाग 3)
Journey

कल के संदेश में हमने बाहरी प्रभावों पर चर्चा की थी। आइए, आज कुछ आंतरिक प्रभावों के बारे में जानते हैं जो हमारे विचारों को प्रभावित करते हैं:

  • प्रशंसा, प्रसिद्धि, बदला, लालच, किसी स्थिति या व्यक्ति पर नियंत्रण बनाए रखने या हावी होने का स्वार्थ या अपवित्र इच्छाएँ
  • अहंकार
  • अतीत का बोझ, वर्तमान या भविष्य की चिंताएँ
  • लोगों, परिस्थितियों, भौतिक वस्तुओं आदि के प्रति लगाव
  • किसी विशेष व्यक्ति के प्रति ईर्ष्या या घृणा, पक्षपात या आलोचनात्मक दृष्टिकोण
  • अन्य अस्थायी नकारात्मक संस्कार या व्यक्तित्व लक्षण

हम इन सभी बाहरी और आंतरिक प्रभावों से हमेशा घिरे रहते हैं। यदि हम मजबूत नहीं हैं, तो हमारा मन इन प्रभावों के तहत कमजोर हो जाता है, जिससे यह परेशान, अस्पष्ट और अस्थिर हो जाता है। इस सबके कारण, एक ओर, हमें अच्छी निर्णय शक्ति की आवश्यकता होती है ताकि हम आवश्यक, महत्वपूर्ण और सत्यता से जुड़े रह सकें, वहीं दूसरी ओर हमें अपने विचारों को मजबूत करना होता है, अर्थात कम और धीरे सोचना; ज्यादा एकाग्र, स्पष्ट और उद्देश्यपूर्ण सकारात्मकता के साथ सोचना। यह विचार एक तीर की तरह होता है; इसमें सकारात्मक शक्ति और स्पष्टता होती है और यह हमेशा शक्तिशाली फल देता है। इस प्रकार के विचार को एकाग्र विचार कहा जाता है। दिन भर के दौरान नियमित अंतराल पर कुछ मिनट के लिए अंतर्मुखता या योग का अभ्यास हमें इन सभी प्रभावों से ऊपर उठने में मदद करता है और यह हमारे मन को मौन की शक्ति से निरंतर पोषित करता है, जिससे हमें एकाग्र विचार के अनुभव में बने रहने में मदद मिलती है ।

आज का अभ्यास

आज मैं हर विचार को जांचूँ कि वह चिंता से जन्मा है या शक्ति से। मैं कम, शांत और स्पष्ट सोचकर मन को एकाग्र सकारात्मक दिशा दूँ।

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