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हमारे विचार हमारा भाग्य बनाते हैं? (भाग 1)

हमारे विचार हमारा भाग्य बनाते हैं? (भाग 1)
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आध्यात्मिक विवेक हमें सिखाता है कि हमारी खुशी हमारे कार्यों, संपत्ति या संबंधों पर निर्भर नहीं है। फिर भी, कुछ दिन हम खुश रहते हैं, जबकि कुछ दिन चिंतित। कभी-कभी हम उत्साही होते हैं, कभी-कभी सुस्त। इसका मतलब है कि हमारी भावनाएं हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं।

सच यह है कि हममें से प्रत्येक व्यक्ति अपनी विचार शक्ति का उपयोग कर अपनी मनपसंद भावनाएं और भाग्य बना सकते हैं।

अब प्रश्न ये उठता है कि किस प्रकार हमारे विचार हमारे भाग्य का निर्माण करते हैं। इस प्रश्न का उत्तर हमें एक सरल श्रृंखला के रूप में आगे बढ़ते हुए; जिसमें हमारे विचारों से लेकर भावनाओं, दृष्टिकोण, कार्यों, आदतों, व्यक्तित्व और भाग्य के क्रम में प्राप्त होता है। आइए ये समझने का प्रयास करते हैं कि ये किस प्रकार कार्य करते हैं;

1. मेरा हर विचार मेरी भावना को उत्पन्न करता है।

विचार मेरी रचना है। हर विचार एक भावना उत्पन्न करता है, इसलिए मैं कैसा महसूस करता हूँ, यह मेरे विचार की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। यदि मैं एक शुद्ध और सकारात्मक विचार बनाता हूँ, तो मैं खुश महसूस करता हूँ। खुशी एक भावना है, एक अनुभव जिसे हम महसूस करते हैं। इसी प्रकार, हम शांति, प्रेम, दुख और क्रोध जैसी भावनाओं का भी अनुभव करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि मैं सोचता हूँ - मुझे इस ऑफिस में काम करना पसंद है, यह एक सकारात्मक भावना उत्पन्न करता है और मैं खुश महसूस करता हूँ। इसके विपरीत, यदि मैं सोचता हूँ - मुझे यहाँ काम करना पसंद नहीं है, यह नकारात्मक भावना उत्पन्न करता है और मैं उदास महसूस करता हूँ। मेरी आंतरिक शक्ति घट जाती है, जिससे मेरा काम और कठिन लगता है। इसके बजाय, यदि मैं सोचूं - ऑफिस में चुनौतियाँ हैं, लेकिन मैं उनका सामना करूंगा, मेरी सकारात्मकता मुझे उन्हें पार करने में मदद करती है।

2. मेरी भावनाएं मेरा दृष्टिकोण बनाती हैं।

मेरे विचार, हर पल भावनाएं उत्पन्न करते हैं, चाहे वह मेरे संबंधों में हो, कार्यस्थल पर या कहीं और। सभी लोग जैसे हैं, वैसे ही हैं, हर वस्तु जैसी है, वैसी ही है। लेकिन लोगों और परिस्थितियों के प्रति मेरी भावना धीरे-धीरे मेरे दृष्टिकोण का निर्माण करती है, जो यह निर्धारित करता है कि मैं उन्हें स्वीकार करता हूँ, सम्मान देता हूँ या अस्वीकार करता हूँ। उदाहरण के लिए, अगर मैं सोचता हूँ - मुझे इस ऑफिस में काम करना अच्छा लगता है, तो समय के साथ इसके परिणाम में मिलने वाली खुशी मेरे कार्यालय के बारे में मेरे दृष्टिकोण को परिभाषित करती है - एक अपनेपन की भावना।

कल हम इस श्रृंखला के बाकी हिस्सों को समझेंगे जो हमें हमारे भाग्य के निर्माण की ओर ले जाते हैं।

आज का अभ्यास

आज पूरे दिन अपने विचारों का निरीक्षण करें। हर सकारात्मक विचार कौन-सी भावना उत्पन्न करता है, इसे पहचानें और अनुभव करें कि मन की स्थिति कैसे बदलती है।

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