
“जब सही कर्म करने की शक्ति और ज्ञान स्वरूप बनने का अनुभव करना चाहें, तब यह ध्यान करें।”
इस ध्यान के अनुभव से स्वयं को अति सूक्ष्म ज्योति-बिंदु स्वरूप आत्मा के रूप में देखने और परमपिता परमात्मा को अपने समक्ष अनुभव करने का अवसर मिलता है। दिव्य ज्ञान की शक्ति के अनुभव से आत्मा ज्ञान स्वरूप बनती जाती है।
परमात्मा का दिव्य ज्ञान आत्मा को सही कर्म करने की शक्ति देता है और तीनों कालों को ध्यान में रखते हुए सही कर्म करने वाली ज्ञान स्वरूप आत्मा बनने का अनुभव कराता है।
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ओम शांति। अपना सारा ध्यान भ्रुकुटी के बीच, मस्तक के मध्य में केंद्रित करते हैं। स्वयं को देखें—मैं एक अति सूक्ष्म ज्योति-बिंदु स्वरूप आत्मा हूँ। अनुभव कीजिए, निराकार परमपिता परमात्मा, जो ज्ञान के सागर हैं, वो बिल्कुल मे...
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