सहज योग - Easy yoga

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06/09/1975“तीन कम्बाइन्ड स्वरूप”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”22/06/1977“सितारों की दुनिया का रहस्य”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”14/12/1978“विघ्नों से मुक्त होने की सहज युक्ति”14/01/1979“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”01/02/1979“मनन-शक्ति ही माया जीत बनने का साधन”12/12/1979“रूहानी अलंकार और उनसे सजी हुई मूर्तियाँ”18/01/1981“‘स्मृति-स्वरूप' का आधार याद और सेवा”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”18/03/1981“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”23/03/1981“फर्स्ट या एयरकण्डीशन में जाने का सहज साधन”02/10/1981“सदा मिलन के झूले में झूलने का आधार”09/10/1981“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”24/10/1981“सच्चे आशिक की निशानी”11/11/1981“बिन्दु का महत्व”03/04/1982“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”25/12/1982“विधि, विधान और वरदान”06/01/1983“निरन्तर सहज योगी बनने की सहज युक्ति”09/01/1983“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”11/01/1983“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”15/01/1983“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”07/04/1983“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”10/11/1983“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”29/12/1983“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”31/12/1983“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”10/04/1984“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”16/01/1985“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”23/01/1985“दिव्य जन्म की गिफ्ट - दिव्य नेत्र”01/01/1986“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”19/03/1986“अमृतवेला - श्रेष्ठ प्राप्तियों की वेला”18/03/1987“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”09/10/1987“अलौकिक राज्य दरबार का समाचार”25/10/1987“चार बातों से न्यारे बनो”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”06/01/1988“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”14/01/1988“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”30/01/1988“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”03/02/1988“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”04/12/1991“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”09/03/1994“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”

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