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सहज योग - Easy yoga - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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सहज योग - Easy yoga
सहज योग - Easy yoga
43 unique murli dates in this topic
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43 murlis in हिंदी
06/09/1975
“तीन कम्बाइन्ड स्वरूप”
20/06/1977
“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”
22/06/1977
“सितारों की दुनिया का रहस्य”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
14/12/1978
“विघ्नों से मुक्त होने की सहज युक्ति”
14/01/1979
“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”
01/02/1979
“मनन-शक्ति ही माया जीत बनने का साधन”
12/12/1979
“रूहानी अलंकार और उनसे सजी हुई मूर्तियाँ”
18/01/1981
“‘स्मृति-स्वरूप' का आधार याद और सेवा”
07/03/1981
“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”
18/03/1981
“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”
23/03/1981
“फर्स्ट या एयरकण्डीशन में जाने का सहज साधन”
02/10/1981
“सदा मिलन के झूले में झूलने का आधार”
09/10/1981
“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”
24/10/1981
“सच्चे आशिक की निशानी”
11/11/1981
“बिन्दु का महत्व”
03/04/1982
“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”
25/12/1982
“विधि, विधान और वरदान”
06/01/1983
“निरन्तर सहज योगी बनने की सहज युक्ति”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
11/01/1983
“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”
15/01/1983
“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”
07/04/1983
“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”
10/11/1983
“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”
29/12/1983
“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”
31/12/1983
“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”
10/04/1984
“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”
16/01/1985
“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”
23/01/1985
“दिव्य जन्म की गिफ्ट - दिव्य नेत्र”
01/01/1986
“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”
19/03/1986
“अमृतवेला - श्रेष्ठ प्राप्तियों की वेला”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
09/10/1987
“अलौकिक राज्य दरबार का समाचार”
25/10/1987
“चार बातों से न्यारे बनो”
06/12/1987
“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”
06/01/1988
“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
30/01/1988
“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”
03/02/1988
“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”
04/12/1991
“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
09/03/1994
“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”