दिलतख्तनशीन - Intoxlcant of Gods heart throne

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13/11/1969“बापदादा की उम्मीदें - क्वान्टिटी के बजाए क्वालिटी वाले बनो और बनाओ”22/01/1971“दिलतख्त नशीन आत्मा की निशानी”20/08/1971“सबसे श्रेष्ठ तख्त और ताज”06/06/1973“समानता और समीपता”11/07/1974“मुरली में दी गई डायरेक्शन से ही सर्व कमियों से छुटकारा”02/09/1975“दिल रूपी तख्त-नशीन ही सतयुगी विश्व के राज्य का अधिकारी”28/05/1977“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”10/01/1979“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”19/12/1979“सहज याद का साधन - स्वयं को खुदाई खिदमतगार समझो”09/01/1980“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”09/03/1981“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”15/03/1981“स्वदर्शन चक्रधारी तथा चक्रवर्ती ही विश्व-कल्याणकारी”26/04/1982“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”25/05/1983“ब्रह्मा बाप की बच्चों से एक आशा”15/03/1985“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”18/03/1985“सन्तुष्टता”11/04/1986“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति”18/01/1988“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”23/03/1988“दिलाराम बाप के दिलतख्त-जीत दिलरूबा बच्चों की निशानियाँ”31/12/1989“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”10/04/1991“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”31/12/1993“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”18/02/1994“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''05/03/2004“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”

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