विश्वकर्मा की तरह करें अपने श्रेष्ठ जीवन निर्माण

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शिव आमंत्रण, आबू रोड, 17 सितम्बर, निसं। विश्वकर्मा दिवस पर ब्रह्माकुमारीज संस्थान के शांतिवन में विश्चकर्मा क्षेत्र से जुड़े कारीगरों के लिए मनमोहिनीवन के ग्लोबल आडिटोरियम में कार्यशलाा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में तहसीलदार रामस्वरूप जौहर ने कहा कि हम अपने जीवन के खुद ही विश्वकर्मा है। इसलिए हमें अपने जीवन में श्रेष्ठ कर्मों का निर्माण करना चाहिए। जिससे हमारा जीवन तो श्रेष्ठ बनें ही साथ ही दूसरों का भी जीवन महान बन जाये। वे कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि हम अपने श्रेष्ठ कर्मो से ही अपनी पहचान बना सकते हैं। परमात्मा ने हमारे हाथ में कला दी है। परन्तु उसमें भाव और भावना का विकास हो तो उससे होने वाला निर्माण अच्छा होगा। इसलिए घर, परिवार और समाज का निर्माण ही हमारा उद्देश्य होना चाहिए।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज शांतिवन के प्रबन्धक बीके भूपाल ने कहा कि जैसे विश्व कर्मा ने एक नया संसार बनाया  ऐसे ही हमे भी नया समाज बनाना है। एक ऐसी दुनिया का निर्माण हो जहॉं किसी भी प्रकार की कुरीति और कुसंस्कार ना रहे। इसके लिए परमात्मा जो राजयोग ध्यान सीखा रहे है अपने जीवन में अपनाना है। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी की व्यक्तिगत सचिव रही बीके हंसा ने कहा कि दादी जानकी का जीवन एक विश्वकर्मा की तरह था। वे जिधर जाती उन्हें देखकर लोगों में श्रेष्ठ कलाओं का विकास हो जाता था। उन्होंने पूरी दुनिया में ईश्वरीय संदेश फैलाया।
कार्यशाला में ब्रह्माकुमारीज संस्थान के पीआरओ बीके कोमल ने श्रेष्ठ जीवन का निर्माण पहले खुद से ही शुरू करने की पहल की। इसके लिए अपने घर से ही पहल करने की जरूरत है। कार्यक्रम में विश्वकर्मा ग्रुप के बीके कीर्ति भाई ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हम श्रेष्ठ सृजन करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। कार्यक्रम में शांतिवन की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके कविता तथा बीके भानू ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर कुछ विशिष्ट कारीगरों का सम्मानित भी किया गया।

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