2 मार्च 2026 को ब्रह्माकुमारीज़ के मुख्यालय स्थित मनमोहिनी वन कॉम्प्लेक्स में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एनसीसी रिट्रीट का भव्य एवं अत्यंत आध्यात्मिक समापन हुआ। लगभग 110 देशों से ब्रह्माकुमारीज़ के पदाधिकारी, कोऑर्डिनेटर, शिक्षक एवं सदस्य इस दिव्य संगम में सहभागी बने। अरावली पर्वतमालाओं की शांत, पवित्र और योगमय वातावरण में विदेशी प्रतिनिधियों की तपस्या और साधना ने मनमोहिनी वन को शांति, शक्ति और दिव्यता का सजीव केंद्र बना दिया।



यह रिट्रीट केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि एक गहन आंतरिक आध्यात्मिक यात्रा थी। प्रकृति की गोद में राजयोग के अभ्यास, आत्मचिंतन और मंथन के माध्यम से सभी ने अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव किया। प्रतिनिधियों ने विश्वभर में ईश्वरीय सेवाओं को और अधिक प्रभावशाली बनाने हेतु विभिन्न अभियान, प्रोजेक्ट एवं कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की।


रिट्रीट की मुख्य थीम रही – “बिकमिंग लाइक बाबा” अर्थात “बाबा समान बनना”। इस थीम को “श्रेष्ठ दाता स्वरूप” के आध्यात्मिक भाव से और स्पष्ट किया गया। इसका अर्थ यह रहा कि हमें केवल दान देने वाला नहीं, बल्कि स्वयं को ऐसा श्रेष्ठ दाता बनाना है जो निरंतर शांति, प्रेम, शक्ति और ज्ञान की आध्यात्मिक संपदा विश्व को बाँटता रहे। सच्चा दाता वही है जिसका मन स्वच्छ, हृदय विशाल और भावना निस्वार्थ हो।


इस रिट्रीट में संस्था प्रमुख राजयोगिनी बी.के. मोहिनी दीदी जी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई तथा सभी को परमात्म प्रेम का गहन अनुभव कराया। ओम् शांति। विश्व के विभिन्न स्थानों से आई हुई सभी निमित्त आत्माओं एवं इंस्ट्रूमेंट्स का यहाँ सुंदर संगठन हुआ और संगठन की शक्ति तथा पवित्र वातावरण के आधार पर सभी ने यह अनुभव किया कि उनकी बुद्धि का योग अत्यंत स्पष्ट रूप से सीधे बाबा के साथ जुड़ गया।
इस अवसर पर उन समर्पित आत्माओं को विशेष सम्मान प्रदान किया गया जिन्होंने 50 वर्षों से परमपिता परमात्मा का दिव्य संदेश जन-जन तक पहुँचाया है। साथ ही “रिमेंबरिंग ब्रह्मा बाबा” पुस्तक, जिसे बी के अरुणा लाडवा द्वारा लिखित किया गया है, का वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा विधिवत विमोचन किया गया।


विदेशी प्रतिभागियों के लिए विशेष स्वास्थ्यवर्धक भोजन की व्यवस्था की गई, जिसमें ग्लूटेन-फ्री एवं वीगन ब्रेड, पारंपरिक रशियन व्यंजन, बोरश सूप तथा मंगोलियन टी शामिल थे। यह केवल भोजन नहीं था, बल्कि सेवा, प्रेम और कृतज्ञता का प्रतीक था। प्रत्येक व्यंजन में आध्यात्मिक भावना और मेहमान-नवाज़ी का सुंदर समन्वय दिखाई दिया।


समापन अवसर पर राजयोगिनी बी के मोहिनी दीदी, बी के जयंती दीदी, बी के मुन्नी दीदी, बी के सुदेश दीदी एवं बी के शशि दीदी, साथ ही वरिष्ठ भाइयों में बी के मृत्युंजय भाई एवं बी के डॉक्टर प्रताप मिड्ढा भाई की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने एक स्वर में अनुभव किया कि इस रिट्रीट ने उन्हें सहजता, लचीलापन और एकता की शक्ति का गहरा अनुभव कराया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं विशेष सजावट द्वारा मनमोहिनी वन को दिव्य रूप में सुसज्जित किया गया था, जिसमें संस्था के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा, मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती जी तथा आदि रत्न दादियों की पावन स्मृतियों को साकार रूप दिया गया। इस समूचे आयोजन ने वैश्विक ब्राह्मण परिवार की संगठन शक्ति, आध्यात्मिक गहराई और भारत की आध्यात्मिक महिमा को उजागर किया।


विदेशी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस रिट्रीट ने उन्हें सहजता (Easiness), लचीलापन (Flexibility) और एकता (Unity) का गहन अनुभव कराया। अनेक प्रतिभागियों ने इसे अपने आध्यात्मिक जीवन का अमूल्य संगम बताते हुए परमात्मा और ब्रह्मा बाबा के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की।
यह अंतरराष्ट्रीय एनसीसी रिट्रीट वास्तव में एक विश्व स्तरीय आध्यात्मिक संगम सिद्ध हुआ, जिसने सभी प्रतिभागियों को “बाबा समान” बनकर श्रेष्ठ दाता स्वरूप को जीवन में उतारने और विश्व कल्याण के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यह आयोजन मन, बुद्धि और आत्मा को शांति, शक्ति और दिव्यता से भर देने वाला अविस्मरणीय अनुभव रहा।

























