ब्रह्माकुमारीज़ के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय, शांतिवन में आयोजित राष्ट्रीय मीडिया कॉन्फ्रेंस के प्रथम प्लेनरी सेशन में ‘जनसंचार में पारदर्शिता और विश्वास’ विषय पर चिंतन और विचार-विमर्श हुआ। इस सत्र में देशभर से आये वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया शिक्षकों और संपादकों ने अपनी महत्वपूर्ण बातों को साझा किया तथा मीडिया जगत की घटती विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।
सत्र के मुख्य वक्ता मीडिया विंग के राष्ट्रीय संयोजक बीके सुशांत ने कहा कि आत्मविवेक और लोकहित को आधार बनाकर किया गया कार्य सदैव सकारात्मक परिणाम देता है। पारदर्शिता और सत्य के साथ रहकर ही मीडिया अपनी विश्वसनीयता बनाए रख सकता है।
भुवनेश्वर से आये संग्राम केशरी सारंगी ने कहा कि यदि समाज शांति और सकारात्मकता की ओर अग्रसर होगा तो मीडिया की दिशा भी स्वयमेव बदल जाएगी। भोपाल के प्रो. डॉ. संजीव गुप्ता ने कहा कि विश्वास और पारदर्शिता जीवन में उतारना कठिन नहीं, बस शुद्ध मन की आवश्यकता है।
इंदौर से नवभारत के ग्रुप एडिटर क्रांति चतुर्वेदी ने भारतीय परंपरागत शिक्षा और ग्रंथों में निहित मूल्यों का उल्लेख करते हुए मीडिया को मूल्य-आधारित कार्यशैली अपनाने का आग्रह किया। जयपुर स्थित मणिपाल विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर वैशाली चतुर्वेदी ने कहा कि मीडिया को वही विश्वास कायम करना चाहिए जो एक पिता पर बच्चे को होता है। उन्होंने सोशल मीडिया डिटॉक्स और सकारात्मक ऊर्जा के महत्व पर बल दिया।
आगरा की आरजे राखी त्यागी ने नारद जी और संजय के उदाहरण देते हुए कहा कि पारदर्शिता ही विश्वास की नींव है। नोएडा के कुमार नरेंद्र सिंह ने कहा कि विश्वास और पारदर्शिता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और इन्हें जीवित रखने के लिए गंभीर प्रयास आवश्यक हैं।
डॉ. संदीप शर्मा (आगरा) ने कहा कि समाज और मीडिया दोनों की जवाबदेही है, सुधार की शुरुआत स्वयं से करनी होगी। अहमदाबाद के प्रो. डॉ. विनोद कुमार पांडे ने सोशल मीडिया में फेक्ट-चेकिंग और आत्मसंयम की आवश्यकता पर जोर दिया।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि विश्वास और पारदर्शिता की शुरुआत घर से करनी होगी। आपसी विश्वास के बिना कोई भी रिश्ता या व्यवस्था लंबे समय तक नहीं टिक सकती।
सत्र के दौरान मीडिया विंग की जोनल कोऑर्डिनेटर बीके पूनम दीदी ने राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करवाया। बीके डॉ. नंदिनी दीदी ने सत्र का संचालन किया।
मुख्य निष्कर्ष:
साध्य और साधनों में शुचिता आवश्यक है।
सच्ची और सार्थक खबरें जनता तक पहुँचाना मीडिया की जिम्मेदारी है।
पारदर्शिता ही विश्वास की आधारशिला है और यही मीडिया की आत्मा है।
पत्रकारों को फेक्ट-चेक करने की आदत डालनी होगी।
जहां विश्वास और पारदर्शिता है, वहीं संवाद सार्थक होता है।
समाज और मीडिया, दोनों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।






























