11 नवम्बर 2025 को कोलकाता के भव्य साइंस सिटी ऑडिटोरियम में ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी.के. जयंती दीदी जी के स्वागत हेतु हजारों बी.के. सदस्यों का समागम हुआ। पूरा ऑडिटोरियम सफेद समंदर में तब्दील हो गया जब आत्मिक प्रेम और उत्साह से ओतप्रोत भाई-बहन दीदी जी के दर्शन व उद्बोधन के लिए एकत्र हुए।
ब्रह्माकुमारीज़ के बांगुर सबजोन द्वारा आयोजित चार दिवसीय इस कार्यक्रम में राजयोगिनी बी.के. जयंती दीदी जी, वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बी.के. हंसा और बी.के. देवी के आगमन से संपूर्ण ईश्वरीय परिवार आनंद, प्रेम और पवित्रता की अनुभूति से भर उठा। इन दिनों को प्रेम, पवित्रता और आत्मिक उन्नति के स्वर्णिम क्षणों के रूप में स्मरण किया गया।
कार्यक्रम में लगभग ढाई हजार भाई-बहनों ने भाग लिया। शुभारंभ पुणे से पधारे बी.के. मुकुल जी के प्रेरक सत्र हमसफर एक्सप्रेस से हुआ, जिसमें उन्होंने देवताओं के प्रतीकों और उनके आध्यात्मिक अर्थों को सुंदर रूप से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोकप्रियता का मूल यह नहीं कि लोग हमें जानते हैं, बल्कि यह है कि क्या हम दूसरों को सुख, शक्ति, प्रोत्साहन और समाधान दे रहे हैं।
इसके पश्चात पारंपरिक शंखनाद और बंगाल की सांस्कृतिक छटा के साथ बी.के. जयंती दीदी जी और अन्य अतिथियों का भव्य स्वागत हुआ। रंगारंग सांस्कृतिक नृत्यों ने वातावरण को आध्यात्मिकता और सौंदर्य से भर दिया।
अपने उद्बोधन में बी.के. जयंती दीदी जी ने कहा कि पवित्रता ब्रह्माकुमारी परिवार की आत्मा है। यह केवल शरीर की नहीं बल्कि विचारों, दृष्टि और संबंधों की शुद्धता है। जब विचार निर्मल होते हैं, तभी जीवन में सच्चा सुख और शांति का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि सतयुग की स्थापना का आधार योगबल और पवित्रता की शक्ति है। बाबा ने हमें सुख और आनंद का अनुभव कराया है, और यह अनुभूति सदा हमारे साथ रहेगी।
दीदी जी ने दादियों के तप, त्याग और संस्था की स्थापना की प्रेरक झलकियाँ साझा कीं। उन्होंने कहा कि दादियों के दिल में बाबा का प्यार और नैनों में शिव बाबा की याद थी, उसी योगबल और पवित्रता की शक्ति से यज्ञ की सेवा और ईश्वरीय कार्य की शुरुआत हुई।
कार्यक्रम की मेजबानी बांगुर सबजोन प्रभारी बी.के. मधु जी ने की। समापन परमात्म स्मृति और शुभ संकल्पों के साथ हुआ। दीदी जी को बाल्यकाल से देखने और उनसे प्रेरणा प्राप्त करने की भावनाएँ कई सदस्यों ने साझा कीं, जिसमें कहा गया कि “दीदी की मधुर वाणी, सरलता और सौम्यता हमारे जीवन की प्रेरणा हैं।”
यह कार्यक्रम समस्त उपस्थितों के लिए आत्मिक उन्नति, प्रेम और पवित्रता का अनुपम अनुभव बन गया।






























