ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय शांतिवन से लगभग 15 किलोमीटर दूर भीमाना के पास स्थित दादी गुलजार उपवन की धरती आज जैविक खेती के माध्यम से आत्मनिर्भरता और प्रकृति संरक्षण का सुंदर संदेश दे रही है। करीब 100 बीघा से अधिक विस्तृत इस कृषि भूमि में वैज्ञानिक एवं ऑर्गेनिक विधियों से हजारों क्विंटल सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है।


दादी गुलजार उपवन में इन दिनों 75,000 गोभी के पौधे लगाए गए हैं, जिनमें लगभग 60,000 पत्ता गोभी और 15,000 फूलगोभी के पौधे शामिल हैं। इसके साथ ही करेला, तोरी, पपीता, भिंडी, टमाटर, मिर्च, बैंगन सहित अनेक सब्जियों की खेती भी की जा रही है। प्रतिदिन सैकड़ों कैरेट ताजी जैविक सब्जियां ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय शांतिवन, पांडव भवन और ज्ञान सरोवर भेजी जा रही हैं।


मल्चिंग तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति से तैयार किए गए खेतों में लगाई गई गोभी की फसल लगभग 70 दिनों में तैयार हो जाएगी। यह प्रयास इस उद्देश्य से किया जा रहा है कि मुख्यालय में आने वाले हजारों भाई-बहनों और अतिथियों को शुद्ध एवं जैविक सब्जियां उपलब्ध हो सकें और बाजार से खरीद पर निर्भरता कम हो।


इस विशाल कृषि परिसर में सब्जियों के साथ-साथ हजारों पेड़-पौधे भी लगाए गए हैं। यहां आम, चीकू, बरगद, पीपल, जामुन, नीम, सिंघी, मूंगफली और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों का भी उत्पादन किया जा रहा है। इस वर्ष दादी गुलजार उपवन से लगभग 1 करोड़ रुपये मूल्य की सब्जियों का उत्पादन हुआ है, जिससे संस्था को आर्थिक बचत के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद्य सामग्री प्राप्त हो रही है।

दादी गुलजार उपवन के प्रभारी बी.के. हरीश और बी.के. छत्रपाल भाई ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व यह भूमि ली गई थी। प्रारंभ में यह भूमि इतनी उपजाऊ नहीं थी, लेकिन निरंतर मेहनत, उचित देखभाल और जैविक विधियों द्वारा इसे उपजाऊ बनाया गया। आज यहां हो रही शानदार पैदावार इस प्रयास का परिणाम है।


उन्होंने बताया कि संकल्प है कि दादी गुलजार उपवन में इतनी अधिक पैदावार हो कि ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय में आने वाले सभी लोगों के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑर्गेनिक सब्जियां उपलब्ध हो सकें। मौसम और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फसलों की बुवाई समयानुसार की जा रही है, ताकि संस्था परिवार को सात्विक, शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक भोजन प्राप्त हो सके।


दादी गुलजार उपवन जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता का प्रेरणादायी केंद्र बनकर ब्रह्माकुमारीज़ के प्रकृति प्रेम और सेवा भावना को दर्शा रहा है।




















