आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच सकारात्मक सोच, मानसिक संतुलन और एकाग्रता बनाए रखने के उद्देश्य से ब्रह्माकुमारीज़ के विश्व शांति सरोवर रिट्रीट सेंटर, नागपुर द्वारा ‘Coping with the Changes in Today’s AI World’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें आईटी प्रोफेशनल्स, नेटवर्क विशेषज्ञों और तकनीकी उद्यमियों ने भाग लिया।
नागपुर सबज़ोन की निदेशिका बीके रजनी दीदी एवं सह-निदेशिका बीके मनीषा दीदी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में वीएनआईटी नागपुर के निदेशक प्रेमलाल भाई, एसटीपीआई नागपुर के ऑफिसर-इन-चार्ज संजय दर तथा एसटीपीआई के सिक्योरिटी ऑडिटर प्रवीण बनाई विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस अवसर पर माउंट आबू से आए मुख्य वक्ता बीके सौरभ, जो सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं और पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कर रहे हैं, ने मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली तथा डिजिटल युग में मेडिटेशन के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
बीके सौरभ ने बताया कि
हमारा मस्तिष्क हमारी आदतों, विचारों और अभ्यास के अनुसार स्वयं को ढालता है। उन्होंने न्यूरोप्लास्टिसिटी का उल्लेख करते हुए समझाया कि नियमित अभ्यास से मस्तिष्क की कार्यक्षमता और एकाग्रता को बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने मेडिटेशन की तुलना शारीरिक व्यायाम से करते हुए कहा कि जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम आवश्यक है, उसी प्रकार मन और बुद्धि को शांत, शक्तिशाली एवं एकाग्र बनाने के लिए मेडिटेशन आवश्यक है। नियमित राजयोग अभ्यास से व्यक्ति डिजिटल दुनिया के प्रभावों को समझते हुए तकनीक का अधिक सजगता और संतुलन के साथ उपयोग कर सकता है।
कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच मानवीय रचनात्मकता, सोचने-समझने की क्षमता और भावनात्मक संतुलन को बनाए रखना आवश्यक है। नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ अपनी आंतरिक शक्तियों और मानवीय गुणों को विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
सत्र के दौरान प्रतिभागियों को दैनिक जीवन में मेडिटेशन को अपनाने, सकारात्मक सोच विकसित करने और बदलती तकनीकी परिस्थितियों के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, लेकिन जीवन में सही निर्णय लेने, एकाग्रता बढ़ाने और आंतरिक शांति बनाए रखने के लिए स्वस्थ एवं संतुलित मन आवश्यक है।

























