16 Nov 2025, जगदम्बा भवन, पुणे
समाज में श्रेष्ठ परिवर्तन का आधार — अध्यात्म शीर्षक से जगदम्बा भवन, पुणे में विशेष संध्या सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ब्रह्मा कुमारीज़ के समाज सेवा प्रभाग, स्थानीय एवं राष्ट्रीय सामाजिक संस्थाओं तथा विभिन्न सेवा संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था—स्थूल समाज सेवा के साथ आध्यात्मिक सशक्तिकरण को जोड़ते हुए स्थायी एवं श्रेष्ठ परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाना, अर्थात् “स्व-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन” का संदेश व्यापक रूप से प्रसारित करना।
संस्था की संयुक्त प्रशासिका एवं समाज सेवा प्रभाग की अध्यक्षा, आदरणीय राजयोगिनी संतोष दीदी के दिव्य सानिध्य में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में संतोष दीदी ने निम्न प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला—
1) आध्यात्मिक सशक्तिकरण की अनिवार्यता: केवल भौतिक सहयोग से अस्थायी लाभ मिलता है; स्थायी समाज सुधार के लिए मन एवं संकल्पों का शुद्ध परिवर्तन आवश्यक है।
2) स्व-परिवर्तन से समाज परिवर्तन: प्रत्येक व्यक्ति के अंतर्मन के परिवर्तन से ही समाज के विस्तृत परिवर्तन की शुरुआत संभव है।
3) देने की भावना का विकास: सच्ची समाज सेवा निस्वार्थ होती है—अपेक्षा छोड़कर दाता भाव अपनाने से ही समाज में समृद्धि आती है।
4) राजयोग की शक्ति: राजयोग मन को शांत, जीवन को सकारात्मक एवं समाज को सुखमय बनाने वाला श्रेष्ठ साधन है।
कार्यक्रम में लायंस क्लब इंटरनेशनल के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर श्री राजेश अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दो महत्वपूर्ण सामाजिक अभियानों—धर्मपुत्र अभियान (अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों हेतु भावनात्मक सहयोग) तथा नया सवेरा–अंधत्व निर्मूलन अभियान—के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग और संगठित प्रयासों से ये दोनों पहल जन-आंदोलन का रूप ले सकती हैं।
जगदम्बा भवन की संचालिका राजयोगिनी सुनंदा दीदी ने सभी उपस्थितों को राजयोग ध्यान की दिव्य अनुभूति कराई, जिससे वातावरण शांति, सकारात्मकता और पवित्रता से भर गया।
विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से आए लगभग 140 प्रतिभागियों ने कार्यक्रम का लाभ लेते हुए अपने अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने आध्यात्मिक वातावरण, मन की शांति और राजयोग की अनुभूति को विशेष रूप से सराहा।
कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी सुलभा बहन द्वारा सहज एवं प्रभावी रूप से किया गया।
पूरे सम्मेलन का सार यह रहा कि — आध्यात्मिकता एवं समाज सेवा के संयुक्त प्रयासों से ही श्रेष्ठ, शांतिमय और स्वर्णिम समाज की स्थापना संभव है।































