1 नवंबर 2025, रायपुर (छत्तीसगढ़) - आज का दिन ब्रह्माकुमारीज़ संस्था और भारत के आध्यात्मिक इतिहास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा जब देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने नवा रायपुर में स्थित नवनिर्मित शांति शिखर एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड का समाज के नाम समर्पण किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने मेडिटेशन रूम में कुछ समय राजयोग ध्यान किया और उपस्थित सभा को संबोधित किया।
अपने प्रेरक संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा कि
“ब्रह्माकुमारीज़ संस्था से मेरा आत्मीय संबंध है। यहां शब्द कम और सेवा अधिक होती है। आपका पहला शब्द ‘ओम शांति’ ही विश्व और ब्रह्मांड में शांति का संदेश देता है।” उन्होंने कहा कि अध्यात्म केवल शांति का पाठ नहीं सिखाता, बल्कि शांति की राह भी दिखाता है। भारत की विश्व शांति की अवधारणा उसकी मूल आत्मा में निहित है और ब्रह्माकुमारीज़ जैसी संस्थाएं इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
प्रधानमंत्री जी ने आगे कहा कि
“आचरण ही सबसे बड़ा धर्म, तप और ज्ञान है। ब्रह्माकुमारी बहनें पहले स्वयं को तप में ढालकर समाज को सशक्त बनाती हैं। मैं इस संस्था की सेवा भावना का साक्षी रहा हूं। दादी जानकी, दादी हृदयमोहिनी और जयंती दीदी जैसे वरिष्ठ मार्गदर्शकों का स्नेह मेरे जीवन की विशेष स्मृतियों में है।”
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद जब-जब वे विदेश यात्राओं पर गए, उन्हें हर देश में ब्रह्माकुमारीज़ परिवार के सदस्य मिले जिन्होंने उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि “यह अपनेपन का एहसास और आपकी शक्ति का प्रमाण है। आपके संकल्प, सपने नहीं बल्कि वास्तविक परिवर्तन के माध्यम हैं।”
पर्यावरण संरक्षण के विषय पर प्रधानमंत्री ने कहा कि “प्रकृति ने जो हमें दिया है, उसका संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है। हमें प्रकृति के साथ मिलकर जीना सीखना होगा। यही भावना भारत के ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ के विजन की आधारशिला है।”
इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, ब्रह्माकुमारीज़ की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी जयंती दीदी, और अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. मृत्युंजय भाई सहित अनेक वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।
राजयोगिनी जयंती दीदी ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए कहा-
“ब्रह्माकुमारीज़ परिवार प्रधानमंत्री जी का हृदय से अभिनंदन करता है। परमात्मा उन्हें उत्तम स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करें ताकि उनके ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में निरंतर सफलता मिले।”
कार्यक्रम के दौरान डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने छत्तीसगढ़ी टोपी और माला पहनाकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया तथा जयंती दीदी ने शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। परिसर में पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी जानकी और प्रधानमंत्री मोदी की आकर्षक रंगोली सजाई गई थी। पूरे परिसर को भव्य लाइटिंग से सुसज्जित किया गया जिससे वातावरण में एक अद्भुत शांति और सौंदर्य का अनुभव हुआ।
प्रधानमंत्री के इस प्रेरणादायी संदेश ने शांति शिखर एकेडमी को विश्व शांति के अभियान का सशक्त केंद्र बनाने की दिशा में नई ऊर्जा और उमंग प्रदान की।
































