जो शाश्वत और स्थायी है, उसी पर ध्यान दें

हम सभी आज ऐसा जीवन जी रहे हैं, जिसमें हमारी पहचान कई अस्थायी चीज़ों से जुड़ी हुई है। ये सभी पहचानें केवल इस एक जन्म तक ही सीमित हैं। हमारी व्यस्त जीवनशैली में, जो अधिकतर हमारी शारीरिक पहचान पर आधारित है, यह भूलना बहुत आसान है कि आध्यात्मिक रूप से हम कौन हैं। ऐसा केवल इसलिए नहीं होता कि हमें अपनी स्थायी पहचान का सही ज्ञान नहीं है, बल्कि इसलिए भी होता है क्योंकि हमारी भौतिक पहचानें—जैसे नाम, उम्र, लिंग, रूप, व्यक्तित्व, शिक्षा, पद, पेशा, रिश्ते, राष्ट्रीयता, भाषा और धर्म—दिनभर हमारा ध्यान अपनी ओर खींचती रहती हैं। परमात्मा हमें यह आध्यात्मिक सत्य समझाते हैं कि ये सभी पहचानें हर जन्म के साथ बदलती रहती हैं। हर जन्म में नई पहचान बनाना और फिर उसे छोड़ देना आत्मा को धीरे-धीरे थका देता है। इससे आत्मा की खुशी, हल्कापन और शक्तियाँ कम होने लगती हैं। आज संसार की लगभग हर आत्मा इसी थकान का अनुभव कर रही है और जन्म-जन्मांतर की इस यात्रा में धीरे-धीरे अपनी शक्तियाँ खोती जा रही है।

वर्तमान समय में परमात्मा हमें आत्म-अभिमानी बनने की याद दिला रहे हैं। अगर हम इतने जन्मों की यात्रा के बाद फिर से अपनी आत्मा को शक्तिशाली बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले हमें अपने वास्तविक आध्यात्मिक स्वरूप को पहचानना होगा। दिनभर कोई भी कार्य शुरू करने से पहले कुछ क्षण परमात्मा की याद में रहें और अपने आप को आत्मा समझकर कार्य करें। इससे हमारी आध्यात्मिक शक्ति सुरक्षित रहेगी। साथ ही, मेडिटेशन के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर हम अपनी खोई हुई शक्तियों को फिर से बढ़ा सकते हैं। इसके साथ-साथ, हमें अपनी आत्मा को परमात्मा के सुंदर गुणों, स्वयं और दूसरों के लिए लाभकारी गुणों, आध्यात्मिक ज्ञान पर आधारित संस्कारों और विश्वासों से भरना है। आत्म-सम्मान रखना है और दूसरों को भी सम्मान देना है। दृढ़ संकल्प और इच्छा शक्ति को मजबूत करना है। अपने अंदर परिवर्तन लाने, परमात्मा से आध्यात्मिक प्राप्तियाँ करने और एक नई सुंदर दुनिया बनाने के लिए अपने संकल्प और समय का योगदान देना है। इससे हमारे अंदर विश्व-सेवा की भावना विकसित होगी। ये दिव्य गुण और शक्तियाँ ही हमारी सच्ची कमाई हैं। इन्हें हम आने वाले जन्मों में भी अपने साथ लेकर जाएँगे। ये हमारी आत्मा को हर जन्म में शक्ति, खुशी और सुंदरता से भरपूर बनाएंगे। हमारी हर जन्म की भौतिक जिंदगी भी इन आध्यात्मिक शक्तियों से लाभान्वित होगी और हमारा जीवन अंदर से सदा सुंदर और सुखद बना रहेगा।

आज का अभ्यास

आज कोई भी कार्य शुरू करने से पहले कुछ क्षण स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा की याद में रहें। बदलती पहचानों से परे अपने स्थायी आध्यात्मिक स्वरूप को अनुभव करें।

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