नकारात्मक परिस्थितियों को आध्यात्मिक शक्ति से पार करना – भाग 2

जीवन में आने वाली अलग-अलग कठिन परिस्थितियाँ हमारा उत्साह कम कर सकती हैं और हमें अंदर से कमजोर भी कर सकती हैं। ऐसे समय जीवन की यात्रा कठिन और चुनौतीपूर्ण लगने लगती है। तब आध्यात्मिकता अपने अनेक लाभों के साथ हमारी बहुत मदद कर सकती है।
आध्यात्मिकता हमें केवल अपने शब्दों और कर्मों पर ही नहीं, बल्कि उससे भी सूक्ष्म स्तर पर अपने विचारों, भावनाओं और मनोभावों पर राज करना सिखाती है।
यह हमें ऐसी शक्ति देती है कि कठिन परिस्थिति सामने आने पर हम अपने नकारात्मक और अनावश्यक विचारों पर ब्रेक लगा सकें। इसका अर्थ मन को दबाना नहीं है कि आज से मैं गुस्सा नहीं करूँगा या सभी के साथ प्रेम और नम्रता से ही व्यवहार करूँगा और कुछ समय बाद फिर अपने पुराने नकारात्मक स्वभाव में लौट जाएँ। यह स्वाभाविक तरीका नहीं है। बल्कि आध्यात्मिक शक्ति के द्वारा अपनी नकारात्मक भावनाओं को धीरे-धीरे सकारात्मक भावनाओं में बदलना है। यह शक्ति हमें दुनिया के सर्वोच्च आध्यात्मिक शक्ति-स्रोत परमात्मा से जुड़ने से मिलती है। आध्यात्मिकता में इस संबंध को मेडिटेशन अर्थात् ध्यान कहा जाता है।
साथ ही, इसका अर्थ केवल विचारों की संख्या कम करके मन को शांत करना नहीं है। इसका अर्थ है कि जब हम किसी कठिन परिस्थिति के बीच हों, तब मन में चल रहे नकारात्मक विचारों की जगह सही और सकारात्मक विचारों को उत्पन्न करना। इसलिए केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति हमें अपनी सोच और व्यवहार को बदलने की क्षमता देती है। हमें याद रखना है कि वास्तव में हमारी पर्सनैलिटी अर्थात् व्यक्तित्व को बदलने की आवश्यकता है। जब व्यक्तित्व बदलता है, तो उससे प्रभावित होने वाले हमारे विचार और भावनाएँ भी अपने आप बदलने लगते हैं।
(कल ज़ारी रहेगा ...)
आज का अभ्यास
आज कठिन परिस्थिति में उठने वाले नकारात्मक विचारों को दबाने के बजाय, उन्हें पहचानकर सकारात्मक और सही विचारों में बदलने का अभ्यास करें।
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