परमात्मा से मार्गदर्शन लेना
हमारे रोज़मर्रा के जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं, जब हमें समझ नहीं आता कि अब आगे क्या करना सही रहेगा। आमतौर पर आत्मा की बुद्धि ही हमारे लिए निर्णय लेती है। लेकिन कई बार हमारी या दूसरों की मान्यताएँ, संस्कार, विचार, धारणाएँ, अनुभव और भावनाएँ हमारी बुद्धि को प्रभावित कर देती हैं। ऐसे समय में हमें किसी ऐसे व्यक्ति के मार्गदर्शन की जरूरत होती है जो—
- पूरी परिस्थिति से अलग रहकर उसे एक साक्षी की तरह देख सके।
- तीनों कालों—भूत, वर्तमान और भविष्य—को जानता हो।
- परिस्थिति को हर पहलू और हर दृष्टिकोण से देख सके।
- सभी प्रभावों से परे और निष्पक्ष हो।
- पूरी तरह पवित्र और स्पष्ट हो।
- हमें हमसे भी बेहतर जानता हो।
- हमारे लाभ और हानि को हमसे भी बेहतर समझता हो।
- निस्वार्थ हो और सच्चे दिल से हमारा कल्याण चाहता हो।
कोई भी मनुष्य इन सभी गुणों को पूरी तरह पूरा नहीं कर सकता। इसलिए ऐसी परिस्थिति में उस शक्ति से मार्गदर्शन लेना अच्छा है, जो इन सभी गुणों से संपन्न है। वह हैं
परमात्मा—सुप्रीम सोल, जिनकी बुद्धि सबसे शुद्ध, शक्तिशाली और विवेकपूर्ण है।
कई बार हमारा मन और बुद्धि बिल्कुल स्पष्ट होते हैं और हमें अपने निर्णय पर पूरा विश्वास भी होता है। फिर भी ऐसे समय में भी अपने निर्णय को परमात्मा से एक बार चेक कर लेना अच्छा है। इसके लिए कुछ मिनट मेडिटेशन द्वारा परमात्मा से जुड़ें। परमात्मा सत्य और असीम ज्ञान से भरपूर आध्यात्मिक शक्ति हैं। उस समय खुद से यह सवाल न करें कि मैं क्या चाहता हूँ या दूसरे क्या चाहते हैं, बल्कि यह सोचें— “परमात्मा क्या चाहते हैं? इस परिस्थिति के बारे में उनकी क्या राय है? उनकी इच्छा क्या है?” मेडिटेशन में परमात्मा से हमारा संबंध जितना गहरा होगा, उत्तर उतना ही स्पष्ट महसूस होगा। जब यह अभ्यास नियमित हो जाता है, तो परमात्मा से मार्गदर्शन लेना उतना ही सहज हो जाता है, जैसे हम अपने माता-पिता, जीवनसाथी या किसी करीबी मित्र से सलाह लेते हैं। कई बार ऐसा भी हो सकता है कि मेडिटेशन के समय हमें तुरंत उत्तर न मिले। लेकिन परमात्मा से अपनी बुद्धि को जोड़ने से हमारी बुद्धि साफ और स्पष्ट होने लगती है, जिससे सही निर्णय लेने में मदद मिलती है। कुछ परिस्थितियों में परमात्मा तुरंत उत्तर नहीं देते, बल्कि कुछ समय बाद किसी व्यक्ति, परिस्थिति या किसी अन्य माध्यम से हमें संकेत और मार्गदर्शन मिल सकता है। कभी-कभी एक-दो दिन बाद भी उत्तर स्पष्ट होता है। या फिर परमात्मा रोज़ मिलने वाले ज्ञान के माध्यम से हमें उस परिस्थिति का सही समाधान समझा देते हैं। इसलिए जब भी किसी निर्णय को लेकर मन में उलझन हो, कुछ समय रुकें, शांत मन से परमात्मा से जुड़ें। इससे सही दिशा को पहचानना और सही निर्णय लेना सहज होता जाएगा।
आज का अभ्यास
आज किसी निर्णय में उलझन हो तो कुछ समय रुककर शांत मन से परमात्मा से जुड़ें। अपनी इच्छा के बजाय उनकी इच्छा समझने का अभ्यास करें और बुद्धि में स्पष्टता अनुभव करें।
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