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“जब आप दीपावली पर अपने मन में प्रेम, शांति और सकारात्मकता का प्रकाश जगाकर पुरानी बातों को भूलकर नई सोच के साथ जीवन की शुरुआत करना चाहते हैं।”
इस गाइडेड मेडिटेशन का अनुभव करने से आप अपने मन में प्रेम, शांति, पवित्रता और सकारात्मकता का प्रकाश जगाने का अनुभव कर सकते हैं। यह मेडिटेशन आपको हर आत्मा की अच्छाइयों को देखने, अपने दिल के द्वार खोलने और दूसरों के प्रति मधुरता बाँटने की प्रेरणा देता है। साथ ही, परमात्मा के ज्ञान के माध्यम से अपने आत्मिक प्रकाश स्वरूप का अनुभव करने और स्वयं को आत्मा ज्योति के रूप में महसूस करने का अवसर मिलता है।
इस मेडिटेशन के माध्यम से आप पुरानी बातों और पुराने संस्कारों को विदाई देकर नई सोच और स्व-परिवर्तन का संकल्प ले सकते हैं। अपने अंदर खुशी, उमंग, उत्साह और आत्मविश्वास की नई ऊर्जा का अनुभव करते हुए आप शांति और प्रेम के प्रकाश को अपने आसपास तथा पूरे संसार में फैलाने की सुंदर भावना जागृत कर सकते हैं।
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ओम शांति।
आज रोशनी के इस पर्व पर, जहाँ हर कोई अपने घर के दरवाजे पर, खिड़कियों पर और घर के अंदर दीपक जला रहा है, वहीं मैं अपने मन के अंदर सबके प्रति प्रेम का और सबकी अच्छाइयों को देखने का दीपक जगा रही हूँ। मेरे मन के हर कोने में आज मैं ज्ञान का और सकारात्मकता का प्रकाश फैला रही हूँ।
किसी भी व्यक्ति के लिए, किसी भी कारण से, अगर मैंने अपने दिल की खिड़की या दिल का द्वार बंद कर दिया था, तो आज, जब सब एक-दूसरे से मिलते हैं और खुशियाँ व मिठाइयाँ बाँटते हैं, मैं भी आज उस आत्मा के लिए अपने दिल के द्वार खोल रही हूँ और उसके साथ मधुरता की मिठाई मन से बाँट रही हूँ।
परमात्मा का ज्ञान, जो मुझे मेरे प्रकाश स्वरूप का अनुभव कराता है, वह मेरे जीवन में समा रहा है। इस शरीर के दीपक के अंदर जगमगाती हुई मैं आत्मा ज्योति हूँ। मेरे जागते ही चारों तरफ ज्ञान का, पवित्रता का, स्नेह का और सकारात्मकता का प्रकाश फैल गया है।
जैसे आज हर कोई नए वस्त्र धारण करता है, ऐसे ही आज मैं अपने मन में एक नई सोच धारण कर रही हूँ। स्व-परिवर्तन का संकल्प लेकर पुरानी बातें और पुराने संस्कार, सबको विदाई देकर ज्ञान के एक नए जीवन को धारण कर रही हूँ।
आज के दिन चारों तरफ आतिशबाजियाँ होती हैं, लेकिन मैं अपने अंदर नए उमंग की आतिशबाजी महसूस कर रही हूँ। खुशी, प्रोत्साहन, आत्मविश्वास, उमंग और उत्साह—ये सभी भावनाएँ मेरे अंदर जागृत हो रही हैं। मेरे मन के अंदर खुशी के पटाखे फूट रहे हैं। मेरे चारों तरफ, मेरे वातावरण में मेरी खुशी की तरंगें फैल रही हैं और वातावरण को भी उसी तरह उत्साहित कर रही हैं।
यह नया दिन, जैसे सबके जीवन में नया वर्ष लेकर आता है, ऐसे ही आज यह नई चेतना मेरे जीवन को भी एक नया और सकारात्मक मोड़ दे रही है।
सभी अपने घर में दीये जगा रहे हैं और मैं अपने आप से पूछ रही हूँ कि परमात्मा ने मुझे क्या-क्या दिया है और उसमें से मैंने संसार को क्या दिया है? यह सच्चा दीया मैं अपने मन में जागृत कर रही हूँ।
जब तक मैं आत्मा इस शरीर में विद्यमान हूँ, मैं लौ हूँ। जब तक इस मिट्टी के शरीर में जगमगा रही हूँ, तब तक परमात्मा का दिया हुआ सब कुछ अपने अंदर धारण करते हुए सारे संसार में शांति और प्रेम के दीये जगा रही हूँ।
अपने इस शांति और प्रेम के प्रकाश को, खुशी की फुलझड़ी को और शक्ति के प्रकंपन को स्वयं के अंदर, स्वयं के चारों ओर और पूरे संसार में फैलता हुआ अनुभव करती रहूँ।
ओम शांति।
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