17 जून 2026 को ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान तपोवन में आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय कोटा के विशेषज्ञों ने योगिक खेती एवं मल्टी लेयर फार्मिंग की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। देश को विषमुक्त भोजन उपलब्ध कराने तथा किसानों को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में खेती के नवीन एवं प्रभावी मॉडलों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग की अध्यक्षा बीके सरला दीदी, उपाध्यक्ष बीके राजू भाई, प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र सिंह तथा अनुसंधान निदेशक डॉ. एम.सी. जैन की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। अपने उद्बोधनों में वक्ताओं ने कृषि क्षेत्र में आध्यात्मिकता एवं आधुनिक तकनीकों के समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने मल्टी लेयर फार्मिंग की उस उन्नत तकनीक को समझा, जिसमें एक ही खेत में विभिन्न स्तरों पर अनेक प्रकार की फसलें उगाकर भूमि, पानी एवं पोषक तत्वों का अधिकतम उपयोग किया जाता है। इस पद्धति से कम संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त करने तथा किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
साथ ही योगिक खेती के सिद्धांतों एवं उसके सकारात्मक परिणामों की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि सकारात्मक संकल्पों एवं राजयोग के अभ्यास के माध्यम से कृषि उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायता मिल सकती है।
प्रशिक्षण के उपरांत कृषि विश्वविद्यालय कोटा ने यह निर्णय लिया कि गोद लिए गए गांवों में जैविक एवं प्राकृतिक खेती के साथ योगिक खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रगतिशील किसानों का चयन कर उन्हें ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, ताकि वे इन तकनीकों को अपनाकर कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि विशेषज्ञों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ तथा किसानों के लिए समृद्ध, आत्मनिर्भर एवं विषमुक्त कृषि व्यवस्था के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।































