12 जुलाई 2026। ब्रह्माकुमारीज़ के धार्मिक प्रभाग की पूर्व अध्यक्षा एवं राजयोगिनी पूज्य प्रेमलता बहन जी के 9वें पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर हरिद्वार में भव्य दिव्य संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय था—“वर्तमान समय की चुनौतियों का आध्यात्मिक समाधान”। देशभर से पधारे संत-महात्माओं, आध्यात्मिक विभूतियों एवं ब्रह्माकुमारीज़ परिवार के भाई-बहनों ने एक मंच पर एकत्र होकर आध्यात्मिक जागृति, नैतिक मूल्यों तथा विश्व-कल्याण का प्रेरणादायी संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी जागृत चेतना गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानन्द जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी प्रणव चैतन्य जी महाराज, 1008 महन्त कृष्णागिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी अखलानंद अक्रिय जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी राममुनी जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी स्वतंत्रता नन्द सरस्वती जी महाराज, स्वामी योगराज आशुतोष जी महाराज, स्वामी रवि प्रपन्नाचार्य शास्त्री जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी रामायणी जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी आनन्दचेतन सरस्वती जी महाराज, स्वामी दिनेश फलाहारी बाबा जी, आचार्य संत रविदेव शास्त्री जी महाराज, बीके शारदा दीदी, बीके मंजू बहन तथा बीके सुशील भाई सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
सम्मेलन में उपस्थित संत-महात्माओं ने प्रेम बहन जी के समर्पित एवं सेवामय जीवन को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके द्वारा संत समाज और आध्यात्मिक एकता के लिए किए गए कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की। अनेक संत उनकी स्मृतियों को साझा करते हुए भावुक हो उठे।
श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर साध्वी मैत्रेयी जी महाराज ने कहा,
“हम बदलेंगे, जग बदलेगा; हम सुधरेंगे, जग सुधरेगा”—यही आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने मोबाइल के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा संत समाज को एक मंच पर लाकर आध्यात्मिक संवाद का वातावरण तैयार करना अत्यंत सराहनीय पहल है।
स्वामी अकमानन्द महाराज ने प्रेम बहन जी की
स्मृति में राम-नाम संकीर्तन कराया तथा ब्रह्माकुमारीज़ को विश्व-कल्याण के लिए समर्पित आध्यात्मिक संस्था बताया।
महामंडलेश्वर योगी कर्णपाल गिरी महाराज ने कहा कि
प्रत्येक अभिभावक को अपने बच्चों को ब्रह्माकुमारीज़ की राजयोग शिक्षा से जोड़ना चाहिए, जिससे वे आध्यात्मिकता के साथ श्रेष्ठ जीवन जीने की कला सीख सकें।
शंकर मठ आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी दिनेशानंद भारती जी ने कहा कि
संत समाज को सत्य की दिशा देने वाले पथप्रदर्शक हैं। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ को “चरित्र निर्माण की फैक्ट्री” बताते हुए कहा कि यह संस्था भगवान शिव के नारी सम्मान के दिव्य संदेश को साकार कर रही है।
स्वामी हरिहरानंद जी महाराज ने संतों की उपस्थिति में आयोजित इस
आध्यात्मिक संगोष्ठी की सराहना करते हुए स्वामी श्यामसुंदर दास जी द्वारा संत समाज को ब्रह्माकुमारीज़ से जोड़ने के प्रयासों का स्मरण किया तथा प्रेम बहन जी की संत-सेवा को अनुकरणीय बताया।
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कमल किशोर जी महाराज ने कहा कि
आध्यात्म का वास्तविक अर्थ प्रेम है और ब्रह्माकुमारीज़ ने सदैव प्रेम, शांति और आत्म-परिवर्तन का संदेश दिया है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राजयोग के अभ्यास से उन्होंने क्रोध जैसी कमजोरी पर विजय प्राप्त की।
शिव योगी तरुण तपस्वी श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी यमुना पुरी जी महाराज ने प्रेम बहन जी के संत समाज के प्रति विशेष स्नेह का स्मरण करते हुए कहा कि
ब्रह्माकुमारीज़ आध्यात्मिक मूल्यों और नारी सम्मान को सशक्त बनाने का अनुकरणीय कार्य कर रही है।
सम्मेलन में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज की
सामाजिक, पारिवारिक और मानसिक चुनौतियों का स्थायी समाधान आध्यात्मिक जागृति, राजयोग ध्यान, आत्म-परिवर्तन और नैतिक मूल्यों के जीवन में समावेश से ही संभव है। ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा विश्वभर में निःस्वार्थ भाव से संचालित राजयोग मेडिटेशन, मूल्य शिक्षा, नशामुक्ति, तनावमुक्त जीवन, महिला सशक्तिकरण, युवा जागरण और विश्व-शांति सेवाओं की सभी संतों ने सराहना करते हुए इसे वर्तमान समय की महत्त्वपूर्ण जनसेवा बताया।
यह दिव्य संत सम्मेलन समाज में आध्यात्मिक समरसता, सकारात्मक सोच, संस्कार निर्माण और विश्व-कल्याण की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ।





























