प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, हरिद्वार सेवा केंद्र पर रक्षाबंधन के पावन उपलक्ष्य में संत गोष्ठी का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज देहरादून सब-जोन इंचार्ज राजयोगिनी मंजू दीदी की अध्यक्षता रही।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परमहंस आचार्य ब्रह्मनिष्ट महामंडलेश्वर देवानंद सरस्वती महाराज ने अपनी उपस्थिति में इस आयोजन को गौरवान्वित किया। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्था द्वारा हर वर्ष रक्षाबंधन का आयोजन किया जाता है, जिसमें सम्मिलित होकर वे आत्मीयता और ईश्वरीय प्रेम का अनुभव करते हैं। उन्होंने संस्था की एकता, प्रेम और सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ आकर उन्हें अपनेपन और आत्मिक सुख की अनुभूति होती है।
आचार्य स्वामी हरिहरानंद महाराज ने कहा कि पंचपुरी हरिद्वार में सामूहिक रूप से रक्षाबंधन मनाने की परंपरा ब्रह्माकुमारीज ने स्थापित की है, जहाँ बड़ी संख्या में संत सम्मिलित होते हैं। महंत गोविंददास महाराज ने भागवत पुराण के आधार पर रक्षाबंधन की वैदिक परंपरा का महत्व बताया। महंत गंगादास महाराज ने कहा कि यद्यपि रक्षाबंधन ‘बंधन’ शब्द से जुड़ा है, किंतु यहाँ विमुक्ति और विकारों से छुटकारे की चर्चा होती है।
शंकर मठ आश्रम, रुड़की के पीठाधीश्वर दिनेशानंद भारती महाराज ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज चरित्र निर्माण की विश्वव्यापी संस्था है, जो आमजन को धर्म और परंपरा के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा देती है। साध्वी महामंडलेश्वर चेतना गिरी महाराज ने ब्रह्माकुमारीज की नारी शक्ति नेतृत्व व्यवस्था और शांति की क्रांति को विशेष बताया।
महंत सूरजदास महाराज ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज ने सन्यासियों को भी भाई के रूप में स्वीकार किया है, जो इन बहनों के स्नेह का परिणाम है। महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद जी महाराज ने संस्था में दिव्यता, एकता और ईश्वरीय प्रेम का अद्भुत संगम देखने की बात कही।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी बीके मीना दीदी ने सभी संतों का गरिमामयी स्वागत किया। वहीं ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने माउंट आबू से प्राप्त ईश्वरीय संदेश पढ़कर सुनाया और सभी संत-महात्माओं को राखी बांधी तथा मिठाई खिलाकर उन्हें शुभकामनाएं दीं।
इस कार्यक्रम में लगभग 40 महामंडलेश्वर, संत और महंत उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में ब्रह्माकुमार सुशील भाई, रुड़की केंद्र प्रभारी बीके गीता दीदी, तथा वरिष्ठ साहित्यकार श्रीगोपाल नारसन की उपस्थिति विशेष रही।
यह आयोजन संस्था के ईश्वरीय संदेश – एकता, प्रेम, और आत्मिक शक्ति – को और सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।































