ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान, जो 1936 से निरंतर राजयोग, आध्यात्मिक ज्ञान और श्रेष्ठ मूल्यों के माध्यम से विश्व को आलोकित कर रहा है, अपने 90 गौरवशाली वर्षों की पूर्णता पर एक ऐतिहासिक एवं दिव्य उत्सव “नवदशोत्सव” का शुभारंभ कर रहा है। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्म-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन तक का एक वैश्विक आध्यात्मिक संकल्प है, जो वर्ष 2026 से 2027 तक सम्पूर्ण विश्व में दिव्यता और शांति का संदेश प्रसारित करेगा।

इस दिव्य अभियान का उद्देश्य 130 से अधिक देशों, हजारों सेवा केंद्रों तथा करोड़ों आत्माओं को एक सूत्र में पिरोकर एक शांतिपूर्ण, स्वस्थ और मूल्यनिष्ठ स्वर्णिम विश्व की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ना है। यह अभियान निराकार परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण के संदेश तथा पूज्य ब्रह्मा बाबा के त्याग एवं तपस्या की प्रेरणादायक गाथा को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा।

इस महोत्सव की सबसे प्रमुख एवं अलौकिक पहल “ज्योतिर्लिंगम महारथ यात्रा” है, जिसमें 21 भव्य रथ भगवान शिव के 21 पावन ज्योतिर्लिंगों का संदेश लेकर भारत एवं नेपाल की लगभग 500 किलोमीटर की भूमि पर आध्यात्मिक चेतना का संचार करेंगे। यह यात्रा राजधानी नई दिल्ली से प्रारंभ होकर विभिन्न नगरों और कस्बों से गुजरते हुए जनमानस में दिव्यता की लहर उत्पन्न करेगी। यह रथ केवल साधारण यात्रा वाहन नहीं होंगे, बल्कि LED डिस्प्ले, होलोग्राम एवं लेज़र शो जैसी आधुनिक तकनीकों से युक्त चलते-फिरते आध्यात्मिक डिजिटल केंद्र होंगे, जो परंपरा और नवाचार का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेंगे।

प्रथम चरण में ये सभी रथ अपने-अपने ज्योतिर्लिंग धामों तक पहुँचेंगे, तत्पश्चात द्वितीय चरण में यह 21 रथ अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ ब्रह्माकुमारीज़ अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय आबू रोड, शांतिवन में एकत्रित होंगे, जहाँ एक भव्य समापन समारोह एवं 10 दिवसीय विशाल आध्यात्मिक मेले का आयोजन होगा।

नवदशोत्सव के अंतर्गत विश्व के 90 प्रमुख शहरों में आध्यात्मिक महासभाओं का आयोजन किया जाएगा। साथ ही शांतिवन में ग्लोबल समेट 2026 का दिव्य आयोजन प्रस्तावित है। पूज्य राजयोगिनी दादी हृदय मोहिनी जी की स्मृति में सम्पूर्ण विश्व द्वारा सामूहिक रूप से 9 अरब मिनटों का योगदान कर शांति की शक्ति को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प भी इस अभियान का महत्वपूर्ण अंग होगा।


पर्यावरण संरक्षण हेतु कल्पतरु अभियान के अंतर्गत 90 लाख प्राणवायु प्रदान करने वाले वृक्षों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। मानवता की सेवा हेतु 1 लाख यूनिट रक्तदान का संकल्प भी लिया गया है। इसके अतिरिक्त, यह महोत्सव अनेक सामाजिक एवं आध्यात्मिक पहलों को समाहित करता है, जैसे “स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान”, संत सम्मेलन, बच्चों के लिए सुसंस्कार शिविर, युवाओं के लिए “उठो जगत के वास्ते” अभियान, नशा मुक्त भारत, स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल वेलनेस, बुजुर्गों के सम्मान हेतु संगम प्रोजेक्ट, किसानों के सशक्तिकरण तथा देश की रक्षा शक्तियों के मनोबल को सुदृढ़ करने के प्रयास।

यह सम्पूर्ण नवदशोत्सव मानव जीवन के हर पहलू—शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक—को स्पर्श करते हुए एक नए युग के निर्माण की प्रेरणा देता है।
नवदशोत्सव सभी आत्माओं को इस सामूहिक आध्यात्मिक जागरण का भाग बनने के लिए आमंत्रित करता है, ताकि मिलकर एक श्रेष्ठ, शांतिपूर्ण एवं दिव्य विश्व की स्थापना में अपना योगदान दिया जा सके।






















