ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मुख्यालय आबू रोड स्थित शांतिवन से लगभग 12 कि.मी. की दूरी पर, संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका एवं पिता श्री ब्रह्मा बाबा का साकार रथ रही आदरणीय दादी गुलजार जी की पावन स्मृति में “गुलजार उपवन” का निर्माण किया गया है। लगभग ढाई वर्षों में विकसित इस उपवन में करीब 100 एकड़ भूमि पर फल, फूल, सब्जियां तथा औषधीय पौधों की समृद्ध एवं सुव्यवस्थित जैविक खेती की जा रही है।

इस उपवन की विशेषता यह है कि यहां उगाई गई संपूर्ण उपज पूर्णतः ऑर्गेनिक एवं योगयुक्त है। अब तक लगभग 1200 टन सब्जियां एवं फल शांतिवन तथा संस्थान के अन्य परिसरों में भेजे जा चुके हैं, जिनमें मुख्य रूप से आलू, केला, टमाटर, गन्ना, ब्रोकली, गाजर, मेथी, पपीता, लौकी, पत्ता गोभी, बैंगन, अदरक, शिमला मिर्च, पालक और चुकंदर शामिल हैं। साथ ही गुलाब और गेंदा जैसे पुष्प भी यहां से प्रेषित किए गए हैं।
इस उपवन की उत्कृष्ट पैदावार का मुख्य कारण यहां का मीठा जल, नियमित मेडिटेशन तथा शुद्ध ऑर्गेनिक खेती पद्धति है। उपवन के समीप नदी का किनारा, तीन कुएं और छह बोरवेल होने से सभी फसलों को पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण जल उपलब्ध होता है।

यदि उपवन में लगाए गए पौधों की बात करें, तो यहां लगभग 14,000 पपीता, 1500 आम, 2000 केला, 500 नारियल, 500 मौसंबी, 500 संतरा, 450 अमरूद, 150 एवोकाडो, 110 खजूर, 100 जामुन, 150 शहतूत, 100 अंजीर, 150 चीकू और 100 आंवला के वृक्ष लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त 300 बेलपत्र, 300 कटहल, 3000 नींबू, 100 करी पत्ता, 150 बड़, 50 पीपल, 50 नीम तथा अन्य कई स्थानों पर लाल मिर्च, भिंडी, टिंडा, परवल और टमाटर जैसी सब्जियां भी उगाई जा रही हैं।

इस दिव्य उपवन को साकार रूप देने में संस्थान प्रमुख राजयोगिनी मोहिनी दीदी, संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी सुदेश दीदी, महासचिव बीके करुणा भाई जी एवं अतिरिक्त महासचिव बीके मृत्युंजय भाई जी का विशेष योगदान रहा है। यह उपवन परमात्मा के प्रेरणा एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में बीके हरीश भाई और बीके छत्रपाल भाई की देखरेख में सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

निस्संदेह, “गुलजार उपवन” केवल एक कृषि परियोजना नहीं, बल्कि जैविक खेती, राजयोग मेडिटेशन और प्रकृति के सुंदर संगम का एक जीवंत और प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।
























