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साथी - Companion - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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साथी - Companion
71 unique murli dates in this topic
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70 murlis in हिंदी
23/01/1969
“अस्थियां हैं स्थिति की स्मृति दिलाने वाली”
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
01/11/1970
“बाप समान बनने की युक्तियां”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
01/03/1971
“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”
29/04/1971
“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”
03/06/1971
“निरन्तर योगयुक्त बनने के लिए कमल पुष्प का आसन”
08/06/1971
“जीवन के लिए तीन चीजों की आवश्यकता - खुराक, खुशी और खज़ाना”
11/06/1971
“तीनों लोकों में बापदादा के पास रहने वाले रत्नों की निशानियाँ”
04/07/1971
“याद की सहज विधि”
24/10/1971
“नज़र से निहाल करने की विधि”
24/05/1972
“परिवर्तन का आधार - दृढ़ संकल्प”
27/05/1972
“रावण से विमुख और बाप के सम्मुख रहो”
31/05/1972
“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”
14/06/1972
“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”
22/07/1972
“नष्टोमोहा बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ”
06/08/1972
“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”
20/05/1974
“बापदादा के दिल रूपी तख्त पर विराजमान बच्चे ही खुशनसीब हैं”
01/02/1975
“ईश्वर के साथ का और लगन की अग्नि का अनुभव”
01/10/1975
“एकान्त, एकाग्रता और दृढ़-संकल्प से सिद्धि की प्राप्ति”
12/10/1975
“कम्पलेन्ट समाप्त कर कम्पलीट बनने की प्रेरणा”
20/10/1975
“परहेज द्वारा संगमयुग के सर्व सुखों की अनुभूति”
24/10/1975
“हरेक ब्रह्मा-मुखवंशी ब्राह्मण चेतन शालिग्राम का मन्दिर है”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
14/04/1977
“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
30/04/1977
“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
16/05/1977
“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
21/05/1977
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
18/01/1978
“बापदादा की सेवा का रिटर्न”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
01/04/1978
“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”
07/12/1978
“बाप समान सम्पूर्ण बनने के चिन्ह”
15/12/1979
“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”
19/03/1982
“कर्म - आत्मा का दर्शन कराने का दर्पण”
02/05/1982
“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”
18/02/1983
“सदा उमंग-उत्साह में रहने की युक्तियाँ”
09/05/1983
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”
21/12/1983
“तुरत दान महापुण्य का रहस्य”
31/12/1983
“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”
20/02/1984
“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”
19/12/1984
“सर्वश्रेष्ठ, सहज तथा स्पष्ट मार्ग”
16/02/1985
“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
03/02/1988
“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”
18/11/1993
“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”
04/12/1995
“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”
31/12/1995
“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”
10/03/1996
“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
23/10/1999
“समय की पुकार - दाता बनो”
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
03/03/2007
“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”
17/03/2007
“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”
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