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तीव्र पुरुषार्थ - Fast Efforts - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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तीव्र पुरुषार्थ - Fast Efforts
तीव्र पुरुषार्थ - Fast Efforts
67 unique murli dates in this topic
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65 murlis in हिंदी
17/05/1969
“जादू मंत्र का दर्पण”
16/06/1969
“बड़े-से-बड़ा त्याग - अवगुणों का त्याग”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
23/03/1970
“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”
05/04/1970
“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”
14/05/1970
“समर्पण का गुह्य अर्थ”
22/06/1971
“तीव्र पुरुषार्थी की निशानियाँ”
06/08/1972
“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”
23/01/1977
“महीनता ही महानता है”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
01/01/1979
“नए वर्ष के लिए बाप द्वारा कराया गया दृढ़ संकल्प”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
10/01/1979
“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”
21/01/1980
“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
09/02/1980
“मधुबन निवासियों की विशेषता”
18/01/1981
“‘स्मृति-स्वरूप' का आधार याद और सेवा”
29/03/1981
“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”
15/04/1981
“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”
29/10/1981
“बाप और बच्चों का रुहानी मिलन”
22/03/1982
“राज्य-सत्ता और धर्म-सत्ता के अधिकारी बच्चों से बापदादा की मुलाकात”
01/03/1983
“विश्व के हर स्थान पर आध्यात्मिक लाइट और ज्ञान जल पहुँचाओ”
07/03/1984
“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”
21/03/1985
“स्वदर्शन चक्र से विजय चक्र की प्राप्ति”
10/01/1988
“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”
07/11/1989
“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
25/11/1993
“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
31/12/1993
“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”
18/01/1997
“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
30/03/1999
“तीव्र पुरुषार्थ की लगन को ज्वाला रूप बनाकर बेहद के वैराग्य की लहर फैलाओ”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
15/02/2000
“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”
25/11/2001
“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''
18/01/2002
“स्नेह की शक्ति द्वारा समर्थ बनो, सर्व आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली दो''
24/02/2002
“बाप को प्रत्यक्ष करने के लिए अपनी वा दूसरों की वृत्ति को पॉजिटिव बनाओ''
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
31/12/2004
“इस वर्ष के आरम्भ से बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है''
15/12/2005
“नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो”
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
15/12/2006
“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''
03/03/2007
“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”
17/03/2007
“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”
31/03/2007
“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”
30/11/2007
“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”
15/12/2007
“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”
18/03/2008
“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”
02/04/2008
”इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
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