कर्मातीत - Karmatit Stage
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28/09/1969“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”09/11/1969“भविष्य को जानने की युक्तियां”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”20/05/1971“विधाता, वरदाता-पन की स्टेज़”01/08/1971“स्वयं की स्टेज़ को सेट करने की विधि”20/08/1971“सबसे श्रेष्ठ तख्त और ताज”21/01/1972“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”04/12/1972“महावीर आत्माओं की रूहानी ड्रिल”28/06/1973“योगयुक्त होने से स्वत: युक्तियुक्त संकल्प, बोल और कर्म होंगे”21/07/1973“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”28/01/1974“महिमा को स्वीकार करने से रूहानी ताकत में कमी”29/01/1975“परखने की शक्ति के प्रयोग से सफलता”01/09/1975“समीप और समान, महीन और महान”07/10/1975“सर्व अधिकार और बेहद के वैराग्य वाला ही राजऋषि”07/01/1977“विश्व-कल्याणकारी कैसे बनें?”07/12/1978“बाप समान सम्पूर्ण बनने के चिन्ह”12/01/1979“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”18/01/1979“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”10/12/1979“पुण्य आत्माओं के लक्षण”02/01/1980“आने वाली दुनिया कैसी होगी?”19/03/1981“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”15/04/1981“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”10/01/1982“स्वराज्य अधिकारी आत्माओं का आसन - कर्मातीत स्टेज”08/04/1982“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”30/04/1982“विस्तार को बिन्दी में समाओ”03/04/1983“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”14/04/1983“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”17/04/1983“कर्मातीत स्थिति के लिए समेटने और समाने की शक्तियों की आवश्यकता”23/12/1983“डबल लाइट की स्थिति से मेहनत समाप्त”24/02/1984“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”07/03/1984“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”02/04/1984“बिन्दु का महत्व”27/03/1985“कर्मातीत अवस्था”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”23/01/1987“सफलता के सितारे की विशेषतायें”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”18/12/1987“कर्मातीत स्थिति की गुह्य परिभाषा”24/02/1988“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”28/02/1988“डबल विदेशी ब्राह्मण बच्चों की विशेषतायें”29/12/1989“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”10/04/1991“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”10/03/1996“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”18/01/1997“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”06/03/1997“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”15/03/1999“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
