Old Sanskars/Nature-पुराने संस्कार/स्वभाव
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18/06/1969“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”03/10/1969“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”17/11/1969“फर्श से अर्श पर जाने की युक्तियाँ”05/04/1970“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”30/07/1970“महारथी अर्थात् महानता”23/10/1970“महारथी बनने का पुरुषार्थ”29/10/1970“दीपमाला का सच्चा रहस्य”30/11/1970“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”04/03/1972“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”12/03/1972“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”02/04/1972“महिमा योग्य कैसे बनें?”15/05/1972“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”24/05/1972“परिवर्तन का आधार - दृढ़ संकल्प”15/07/1973“लगाव और स्वभाव के बदलने से विश्व-परिवर्तन”02/08/1973“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”21/10/1975“बेहद की वैराग्य वृत्ति ही विश्व परिवर्तन का आधार”01/02/1976“रूहानी शमा और तीन प्रकार के रूहानी परवाने”12/01/1977“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”02/02/1977“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”06/02/1977“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”23/04/1977“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”24/05/1977“बाप के डायरेक्ट बच्चे ही डबल पूजा के अधिकारी बनते हैं”07/06/1977“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”16/01/1979“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”07/01/1980“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”16/01/1980“ऑलमाइटी अथॉरिटी राजयोगी सभा व लोक पसन्द सभा”03/11/1981“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”09/01/1983“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”30/03/1985“तीन-तीन बातों का पाठ”20/01/1986“पुरुषार्थ और परिवर्तन के गोल्डन चांस का वर्ष”18/02/1986“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”27/03/1986“सदा के स्नेही बनो”21/10/1987“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”25/10/1987“चार बातों से न्यारे बनो”22/11/1987“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”14/01/1988“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”13/02/1991“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”05/12/1994“वर्तमान समय की आवश्यकता - बेहद के वैराग्य वृत्ति का वायुमण्डल बनाना”09/01/1996“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”03/04/1996“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”13/11/1997“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”15/03/1999“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”16/12/2000“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''05/03/2004“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''15/12/2006“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''03/03/2007“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”31/10/2007“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”30/11/2007“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”
