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Old Sanskars/Nature-पुराने संस्कार/स्वभाव - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Old Sanskars/Nature-पुराने संस्कार/स्वभाव
Old Sanskars/Nature-पुराने संस्कार/स्वभाव
57 unique murli dates in this topic
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57 murlis in हिंदी
18/06/1969
“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”
03/10/1969
“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”
17/11/1969
“फर्श से अर्श पर जाने की युक्तियाँ”
05/04/1970
“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”
30/07/1970
“महारथी अर्थात् महानता”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
29/10/1970
“दीपमाला का सच्चा रहस्य”
30/11/1970
“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
12/03/1972
“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”
02/04/1972
“महिमा योग्य कैसे बनें?”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
24/05/1972
“परिवर्तन का आधार - दृढ़ संकल्प”
15/07/1973
“लगाव और स्वभाव के बदलने से विश्व-परिवर्तन”
02/08/1973
“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”
21/10/1975
“बेहद की वैराग्य वृत्ति ही विश्व परिवर्तन का आधार”
01/02/1976
“रूहानी शमा और तीन प्रकार के रूहानी परवाने”
12/01/1977
“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”
02/02/1977
“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”
06/02/1977
“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”
23/04/1977
“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
24/05/1977
“बाप के डायरेक्ट बच्चे ही डबल पूजा के अधिकारी बनते हैं”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
16/01/1979
“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”
07/01/1980
“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”
16/01/1980
“ऑलमाइटी अथॉरिटी राजयोगी सभा व लोक पसन्द सभा”
03/11/1981
“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
20/01/1986
“पुरुषार्थ और परिवर्तन के गोल्डन चांस का वर्ष”
18/02/1986
“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”
27/03/1986
“सदा के स्नेही बनो”
21/10/1987
“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”
25/10/1987
“चार बातों से न्यारे बनो”
22/11/1987
“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
05/12/1994
“वर्तमान समय की आवश्यकता - बेहद के वैराग्य वृत्ति का वायुमण्डल बनाना”
09/01/1996
“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”
03/04/1996
“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”
03/04/1997
“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”
13/11/1997
“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
16/12/2000
“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
05/03/2004
“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
03/02/2006
“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''
15/12/2006
“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''
03/03/2007
“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”
31/10/2007
“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”
30/11/2007
“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”