रूहानी पढ़ाई - Spiritual study / Marks

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88 murlis in हिंदी

02/02/1969“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”06/02/1969“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”26/06/1969“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”06/07/1969“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”16/07/1969“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”25/10/1969“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”02/04/1970“सम्पूर्ण स्टेज की निशानियां”18/06/1970“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”19/06/1970“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”11/07/1970“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”31/12/1970“अमृतवेले से परिवर्तन शक्ति का प्रयोग”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”11/03/1971“परिस्थितियों को पार करने का साधन - ‘स्वस्थिति'”06/05/1971“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”08/06/1971“जीवन के लिए तीन चीजों की आवश्यकता - खुराक, खुशी और खज़ाना”18/06/1971“बुद्धि की अलौकिक ड्रिल”25/08/1971“मुख्य 7 कमजोरियां और उसको मिटाने के लिए 7 दिन का कोर्स”21/01/1972“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”02/02/1972“प्रीत बुद्धि की निशानियाँ”22/07/1972“नष्टोमोहा बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ”16/05/1973“अन्तिम पुरुषार्थ”21/07/1973“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”02/08/1973“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”23/09/1973“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”07/02/1975“सन्तुष्टता ही सम्पूर्णता की निशानी है”01/09/1975“समीप और समान, महीन और महान”10/09/1975“नॉलेजफुल और पावरफुल आत्मा ही सक्सेसफुल”22/09/1975“स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है”24/05/1977“बाप के डायरेक्ट बच्चे ही डबल पूजा के अधिकारी बनते हैं”27/05/1977“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”10/06/1977“मन्‍त्र और यन्‍त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”18/06/1977“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”26/11/1979“प्रीत की रीति”26/12/1979“राजयोगी अर्थात् त्रि-स्मृति स्वरूप”09/03/1981“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”16/11/1981“विजयमाला में नम्बर का आधार”21/11/1981“छोड़ो तो छूटो”12/03/1982“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”02/05/1982“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”13/06/1982“एक का मन्‍त्र याद रहे तो सबमें एक दिखाई देगा (टीचर्स के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात)”24/02/1983“दिलाराम बाप का दिलरूबा बच्चों से मिलन”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”17/05/1983“संगम युग - मौजों के नज़ारों का युग”07/12/1983“श्रेष्ठ पद की प्राप्ति का आधार - ‘मुरली’”22/04/1984“विचित्र बाप द्वारा विचित्र पढ़ाई तथा विचित्र प्राप्ति”03/12/1984“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”21/03/1985“स्वदर्शन चक्र से विजय चक्र की प्राप्ति”22/01/1986“बापदादा की आशा - सम्पूर्ण और सम्पन्न बनो”25/02/1986“सफलता का आधार - दृढ़ता”07/03/1986“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”16/03/1986“रुहानी ड्रिल”27/03/1986“सदा के स्नेही बनो”31/12/1987“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”03/02/1988“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”12/03/1988“तीन प्रकार का स्नेह तथा दिल के स्नेही बच्चों की विशेषतायें”23/03/1988“दिलाराम बाप के दिलतख्त-जीत दिलरूबा बच्चों की निशानियाँ”19/11/1989“तन, मन, धन और जन का भाग्य”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”13/12/1989“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”29/12/1989“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”06/01/1990“होलीहँस की परिभाषा”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”31/03/1990“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”04/12/1995“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”12/12/1998“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”19/03/2000“निर्माण और निर्मान के बैलेन्स से दुआओं का खाता जमा करो”30/11/2004“अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”15/02/2007“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”17/03/2007“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”31/03/2007“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”

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