समर्पित पांडव - surrendered pandavas
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03/10/1969“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”16/10/1969“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”05/03/1970“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”10/06/1971“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”19/09/1975“शक्तियों एवं पाण्डवों की विशेषतायें”15/10/1975“आत्मघाती महापापी न बनकर डबल अहिंसक बनने की युक्तियाँ”21/05/1977“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”29/05/1977“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”05/06/1977“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”28/06/1977“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”29/03/1981“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”08/10/1981“ब्रह्मा बाप की एक शुभ आशा”21/03/1983“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”17/04/1983“कर्मातीत स्थिति के लिए समेटने और समाने की शक्तियों की आवश्यकता”02/05/1983“माया को दोषी बनाने के बजाए मास्टर रचता, शक्तिशाली बनो”30/07/1983“जहाँ सच्चा स्नेह है वहाँ दु:ख की लहर नहीं”27/02/1985“शिव शक्ति पाण्डव सेना की विशेषतायें”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”23/01/1987“सफलता के सितारे की विशेषतायें”01/10/1987“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”21/10/1987“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”06/01/1988“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”03/02/1988“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”24/02/1988“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”23/11/1989“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”05/12/1989“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”07/03/1990“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”18/11/1993“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”31/12/1993“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”14/12/1997“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”04/11/2001“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”31/12/2001“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''18/01/2008“सच्चे स्नेही बन, सब बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो”18/03/2008“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”02/04/2008”इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
