27 मार्च 2026 को शांतिवन में पूरे विश्व में शांति और शक्ति का संदेश फैलाने वाली, 46,000 से अधिक ब्रह्माकुमारी बहनों की अलौकिक मातेश्वरी स्वरूप, राजयोग की जीती-जागती मिसाल एवं ब्रह्माकुमारी संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका, राजयोगिनी दादी जानकी जी का 6वां स्मृति दिवस “वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस” के रूप में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया।
दादी जानकी जी ने अपने 104 वर्ष के दिव्य जीवन में सम्पूर्ण विश्व को मातृत्व, निस्वार्थ प्रेम और ईश्वरीय स्नेह की अनुभूति कराई। उनके संपर्क में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति, चाहे किसी भी धर्म, वर्ग या देश का हो, स्वयं को उनके स्नेह और अपनत्व से भरपूर अनुभव करता था।
सत्यता, स्वच्छता, सरलता और धैर्यता जैसे दिव्य गुणों की प्रतिमूर्ति दादी जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन विश्व कल्याण और आत्माओं की सेवा में समर्पित किया। छोटी आयु से ही उनका झुकाव आध्यात्म की ओर रहा और प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के संपर्क में आकर उन्होंने अपने जीवन को ईश्वरीय सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
दादी जी ने कठिन तपस्या, योग साधना और मुरली के प्रति गहरे प्रेम द्वारा अपने मन और बुद्धि को इतना शक्तिशाली बनाया कि 1978 में उन्हें “विश्व की सबसे स्थिर मन वाली महिला” के रूप में सम्मानित किया गया।
1974 में दादी जी विदेश सेवा के निमित्त लंदन गईं, जहाँ भाषा और संस्कृति की भिन्नता के बावजूद अपने रूहानी प्यार और योगबल से उन्होंने हजारों लोगों के जीवन में परिवर्तन लाया। उनके अथक प्रयासों से आज ब्रह्माकुमारीज़ संस्था 110 से अधिक देशों में अपनी सेवाएँ दे रही है।
दादी जी ने न केवल आध्यात्मिक क्षेत्र में बल्कि सामाजिक और वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में तथा “ग्लोबल कोऑपरेशन फॉर अ बेटर वर्ल्ड” जैसे प्रोजेक्ट्स के माध्यम से उन्होंने विश्व शांति और मानव एकता का संदेश दिया।
27 मार्च 2020 को दादी जी ने अपनी कर्मातीत अवस्था को प्राप्त कर साकार देह का त्याग किया, लेकिन उनके द्वारा दी गई शिक्षाएं, प्रेरणाएं और रूहानी पालना आज भी लाखों दिलों में जीवित हैं।
इस पावन अवसर पर शांतिवन में उपस्थित सभी ब्रह्मा वत्सों ने राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से परमात्मा शिव से योग जोड़कर दादी जी के गुणों को अपने जीवन में धारण करने का संकल्प लिया तथा विश्व कल्याण की भावना को और सशक्त किया।
कार्यक्रम ने सभी के अंदर आत्मिक जागृति, शांति और सेवा भावना को जागृत करते हुए एक नई प्रेरणा प्रदान की।































