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महान आत्मा - Great soul - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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महान आत्मा - Great soul
महान आत्मा - Great soul
59 unique murli dates in this topic
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59 murlis in हिंदी
13/11/1969
“बापदादा की उम्मीदें - क्वान्टिटी के बजाए क्वालिटी वाले बनो और बनाओ”
18/04/1971
“मन के भावों को जानने की विधि तथा फायदे”
10/05/1972
“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”
11/07/1972
“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”
04/12/1972
“महावीर आत्माओं की रूहानी ड्रिल”
24/12/1972
“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”
21/04/1973
“जैसा नाम वैसा काम”
01/06/1973
“सर्व शक्तियों का स्टॉक”
27/05/1974
“विश्व-कल्याण के निमित्त बनी आत्माओं के वचन भी सदा कल्याणकारी”
31/01/1977
“भक्तों को सर्व प्राप्ति कराने का आधार है - इच्छा मात्रम् अविद्या की स्थिति”
24/05/1977
“बाप के डायरेक्ट बच्चे ही डबल पूजा के अधिकारी बनते हैं”
01/04/1978
“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”
05/12/1978
“मरजीवा जन्म का निजी संस्कार - पहली स्मृति और पहला बोल”
19/12/1978
“रीयल्टी ही सबसे बड़ी रॉयल्टी है”
12/01/1979
“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”
16/01/1979
“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”
18/01/1979
“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”
19/11/1979
“बेहद के वानप्रस्थी अर्थात् निरन्तर एकान्त में सदा स्मृति स्वरूप”
03/12/1979
“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”
21/03/1981
“सच्ची होली कैसे मनायें?”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
07/04/1981
“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”
08/11/1981
“अन्तर सम्पन्न करने का साधन ‘तुरन्त दान महापुण्य’”
28/11/1981
“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”
12/01/1982
“विश्व का उद्धार - आधारमूर्त आत्माओं पर निर्भर”
17/03/1982
“संगमयुग का विशेष वरदान - ‘अमर भव’”
29/03/1982
“सच्चे वैष्णव अर्थात् सदा गुण ग्राहक”
06/04/1982
“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
21/03/1983
“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”
14/04/1983
“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”
03/12/1983
“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”
05/12/1983
“संगमयुग - बाप बच्चों के मिलन का युग”
27/12/1983
“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”
24/04/1984
“वर्तमान ब्राह्मण जन्म - हीरे तुल्य”
09/05/1984
“सदा एकरस उड़ने और उड़ाने के गीत गाओ”
11/05/1984
“ब्राह्मणों के हर कदम, संकल्प, कर्म से विधान का निर्माण”
17/12/1984
“व्यर्थ को समाप्त करने का साधन - समर्थ संकल्पों का खजाना ज्ञान मुरली”
01/01/1986
“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”
18/02/1986
“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”
04/03/1986
“सर्व श्रेष्ठ नई रचना का फाउण्डेशन - निस्वार्थ स्नेह”
07/03/1986
“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”
13/03/1986
“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”
22/03/1986
“सुख, शान्ति और खुशी का आधार - पवित्रता”
09/04/1986
“सच्चे सेवाधारी की निशानी”
21/01/1987
“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
17/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
23/12/1987
“मनन शक्ति और मगन स्थिति”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
20/02/1988
“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”
28/02/1988
“डबल विदेशी ब्राह्मण बच्चों की विशेषतायें”
03/03/1988
“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”
19/03/1988
“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”
27/03/1988
“सर्वश्रेष्ठ सितारा - ‘सफलता का सितारा’”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
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