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अलौकिक वृक्ष - spiritual tree - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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अलौकिक वृक्ष - spiritual tree
अलौकिक वृक्ष - spiritual tree
64 unique murli dates in this topic
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63 murlis in हिंदी
05/04/1970
“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”
21/05/1970
“भिन्नता को मिटाने की युक्ति”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
20/05/1971
“विधाता, वरदाता-पन की स्टेज़”
25/06/1971
“सेवा और तपस्या की समानता”
11/07/1971
“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”
17/05/1972
“संगठन रूपी किले को मजबूत बनाने का साधन”
19/07/1972
“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”
01/10/1975
“एकान्त, एकाग्रता और दृढ़-संकल्प से सिद्धि की प्राप्ति”
31/10/1975
“महारथी बच्चों की मुख्य विशेषतायें”
02/06/1977
“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
08/01/1979
“संगमयुग पर समानता में समीप और भविष्य के सम्बन्ध में समीप”
14/01/1979
“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”
19/12/1979
“सहज याद का साधन - स्वयं को खुदाई खिदमतगार समझो”
26/12/1979
“राजयोगी अर्थात् त्रि-स्मृति स्वरूप”
07/01/1980
“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”
21/01/1980
“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
06/11/1981
“विशेष युग का विशेष फल”
21/11/1981
“छोड़ो तो छूटो”
28/11/1981
“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”
08/01/1982
“लण्डन ग्रुप के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”
18/01/1982
“18 जनवरी जिम्मेवारी के ताजपोशी का दिवस”
14/03/1982
“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”
19/03/1982
“कर्म - आत्मा का दर्शन कराने का दर्पण”
24/03/1982
“ब्राह्मण जीवन की विशेषता है - पवित्रता”
27/03/1982
“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”
06/04/1982
“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”
30/04/1982
“विस्तार को बिन्दी में समाओ”
03/04/1983
“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”
21/12/1983
“तुरत दान महापुण्य का रहस्य”
25/12/1983
“संगमयुग के दिन बड़े ते बड़े मौज मनाने के दिन”
27/12/1983
“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”
16/01/1984
“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”
26/02/1984
“बापदादा की अद्भुत चित्रशाला”
09/03/1984
“परिवर्तन को अविनाशी बनाओ”
01/05/1984
“विस्तार में सार की सुन्दरता”
28/11/1984
“संकल्प को सफल बनाने का सहज साधन”
12/12/1984
“विशेष आत्माओं का फर्ज”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
01/10/1987
“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
18/01/1992
“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”
02/03/1992
“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
25/11/1993
“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”
01/02/1994
“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”
28/11/1997
“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”
31/12/1997
“इस नये वर्ष को मुक्ति वर्ष मनाओ, सफल करो सफलता लो”
31/12/1998
“इस नये वर्ष में हिम्मत के आधार पर स्वयं को मेहनत मुक्त सदा विजयी अनुभव करो”
18/01/1999
“वर्तमान समय के प्रमाण वैराग्य वृत्ति को इमर्ज कर साधना का वायुमण्डल बनाओ”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
14/03/2006
“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''