अलौकिक वृक्ष - spiritual tree
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05/04/1970“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”21/05/1970“भिन्नता को मिटाने की युक्ति”28/05/1970“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”20/05/1971“विधाता, वरदाता-पन की स्टेज़”25/06/1971“सेवा और तपस्या की समानता”11/07/1971“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”17/05/1972“संगठन रूपी किले को मजबूत बनाने का साधन”19/07/1972“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”01/10/1975“एकान्त, एकाग्रता और दृढ़-संकल्प से सिद्धि की प्राप्ति”31/10/1975“महारथी बच्चों की मुख्य विशेषतायें”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”08/01/1979“संगमयुग पर समानता में समीप और भविष्य के सम्बन्ध में समीप”14/01/1979“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”19/12/1979“सहज याद का साधन - स्वयं को खुदाई खिदमतगार समझो”26/12/1979“राजयोगी अर्थात् त्रि-स्मृति स्वरूप”07/01/1980“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”21/01/1980“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”23/01/1980“पवित्रता का महत्व”06/11/1981“विशेष युग का विशेष फल”21/11/1981“छोड़ो तो छूटो”28/11/1981“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”08/01/1982“लण्डन ग्रुप के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”18/01/1982“18 जनवरी जिम्मेवारी के ताजपोशी का दिवस”14/03/1982“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”19/03/1982“कर्म - आत्मा का दर्शन कराने का दर्पण”24/03/1982“ब्राह्मण जीवन की विशेषता है - पवित्रता”27/03/1982“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”06/04/1982“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”30/04/1982“विस्तार को बिन्दी में समाओ”03/04/1983“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”21/12/1983“तुरत दान महापुण्य का रहस्य”25/12/1983“संगमयुग के दिन बड़े ते बड़े मौज मनाने के दिन”27/12/1983“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”16/01/1984“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”26/02/1984“बापदादा की अद्भुत चित्रशाला”09/03/1984“परिवर्तन को अविनाशी बनाओ”01/05/1984“विस्तार में सार की सुन्दरता”28/11/1984“संकल्प को सफल बनाने का सहज साधन”12/12/1984“विशेष आत्माओं का फर्ज”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”01/10/1987“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”31/12/1987“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”24/02/1988“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”05/12/1989“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”25/12/1989“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”18/01/1992“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”02/03/1992“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”08/04/1992“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”25/11/1993“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”01/02/1994“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”28/11/1997“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”31/12/1997“इस नये वर्ष को मुक्ति वर्ष मनाओ, सफल करो सफलता लो”31/12/1998“इस नये वर्ष में हिम्मत के आधार पर स्वयं को मेहनत मुक्त सदा विजयी अनुभव करो”18/01/1999“वर्तमान समय के प्रमाण वैराग्य वृत्ति को इमर्ज कर साधना का वायुमण्डल बनाओ”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''14/03/2006“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''
