ब्रह्माकुमारीज़ के मानसरोवर परिसर में मेडिकल विंग एवं ग्लोबल हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में "Unleash Hidden Healing Potential" विषय पर तीन दिवसीय 11वें राष्ट्रीय नर्सिंग प्रोफेशनल सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में देशभर से नर्सिंग विशेषज्ञ, शिक्षाविद, अस्पताल प्रशासक, अस्पताल प्रबंधक तथा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर समग्र स्वास्थ्य सेवा और आध्यात्मिक सशक्तिकरण पर अपने विचार साझा किए।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि भारतीय नर्सिंग परिषद, नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. टी. दिलीप कुमार ने कहा कि
आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी दक्षता के साथ मानसिक एवं आध्यात्मिक संतुलन भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नर्सिंग शिक्षा में मानसिक स्वास्थ्य, आत्मबल तथा बर्नआउट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए आध्यात्मिक मूल्यों को महत्वपूर्ण बताया।
ब्रह्माकुमारीज़ की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके जयंती दीदी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि
नर्सिंग केवल एक पेशा नहीं, बल्कि ईश्वर की श्रेष्ठ सेवाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि प्रेम, करुणा, मुस्कान और मन की शांति से की गई सेवा रोगियों के उपचार को और अधिक प्रभावी बनाती है।
संस्था के महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई, अतिरिक्त महासचिव राजयोगी बीके डॉ. मृत्युंजय भाई तथा मेडिकल विंग के अध्यक्ष डॉ. अशोक मेहता ने भी नर्सिंग सेवा में आध्यात्मिकता, मानवीय संवेदनाओं और राजयोग मेडिटेशन की भूमिका पर प्रकाश डाला।
सम्मेलन में मारवाड़ी विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलपति डॉ. महेंद्र असरी, भारतीय नर्सिंग परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. जोगिंद शर्मा तथा भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त महानिदेशिका डॉ. अचला ने भी अपने विचार व्यक्त किए और नर्सिंग सेवा को राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति बताया।
वरिष्ठ आयोजक शिक्षिका बीके डॉ. सविता दीदी ने उपस्थित प्रतिनिधियों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया। वहीं संस्था के अतिरिक्त महासचिव एवं ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक बीके डॉ. प्रताप मिधा भाई ने मेडिकल विंग की विभिन्न सेवा गतिविधियों की जानकारी दी तथा मेडिकल विंग के सचिव बीके डॉ. बनारसी लाल शाह ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। ग्लोबल हॉस्पिटल की चीफ ऑफ नर्सिंग सर्विसेज बीके रूपा दीदी ने सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में आध्यात्मिकता और चिकित्सा के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उपचार केवल दवाइयों और आधुनिक तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि रोगी के मन, भावनाओं और आत्मबल को सशक्त बनाना भी समग्र स्वास्थ्य का आधार है। राजयोग मेडिटेशन को तनाव प्रबंधन, आत्मबल, धैर्य, सकारात्मक ऊर्जा तथा करुणामय सेवा का प्रभावी माध्यम बताते हुए नर्सिंग पेशे को दुआओं और मानव सेवा का सर्वोच्च माध्यम बताया गया।






























