ब्रह्माकुमारीज़ के मुख्यालय स्थित मानसरोवर में देशभर से आए सैकड़ों मीडियाकर्मियों की मौजूदगी में चार दिवसीय मीडिया महासम्मेलन का शुभारंभ हुआ। भागदौड़ भरी जिंदगी और सूचनाओं के संसार में समाज के प्रहरी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मीडिया कर्मियों के इस सम्मेलन का उद्देश्य मीडिया की शक्ति को सकारात्मक दिशा देते हुए समाज में नैतिक मूल्यों, शांति और श्रेष्ठ संस्कारों को बढ़ावा देना रहा।
सम्मेलन का उद्घाटन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, दिल्ली के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, ब्रह्माकुमारीज़ के महासचिव एवं मीडिया प्रभाग के अध्यक्ष बी.के. करुणा भाई, न्यूज़ इंडिया के पूर्व सीईओ एवं वरिष्ठ पत्रकार सरफराज सैफी, इंडिया न्यूज़ के पूर्व मैनेजिंग एडिटर एवं वरिष्ठ पत्रकार यशवंत राणा, देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. मानसिंह परमार, ब्रह्माकुमारीज़ मैनेजमेंट कमेटी की वरिष्ठ सदस्य बी.के. सुषमा दीदी, प्रभाग की उपाध्यक्षा बी.के. सरला दीदी, नेशनल कोऑर्डिनेटर बी.के. निकुंज भाई, बी.के. चंद्रकला दीदी तथा राष्ट्रीय संयोजक बी.के. शांतनु भाई ने दीप प्रज्वलित कर किया।
अपने संबोधन में अतिथियों ने कहा कि
समाज में गिरते नैतिक मूल्यों की रोकथाम और श्रेष्ठ समाज की स्थापना में मीडिया को अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। मीडिया समाज का आईना है और उसके माध्यम से शांति, स्थिरता तथा सकारात्मक परिवर्तन का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
वक्ताओं ने कहा कि
आज मीडिया के सामने चुनौतियां अनेक हैं, लेकिन यदि पत्रकार अपने भीतर झांककर आत्मचिंतन करें और आध्यात्मिक शक्ति को जीवन में अपनाएं, तो वे अधिक प्रभावी और सकारात्मक संवाद स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने मीडिया से श्रीकृष्ण की शांति-दूत वाली भूमिका अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मीडिया को समाज में शांति और सद्भाव स्थापित करने में सेतु की भूमिका निभानी चाहिए।
सम्मेलन में राजयोग ध्यान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि आत्मस्वरूप को जागृत करने की शक्ति और कला का आधार राजयोग है। साथ ही उपस्थित मीडियाकर्मियों को नशा मुक्ति का संकल्प भी कराया गया। सम्मेलन में अतिथियों का मोमेंटो भेंट कर सम्मान किया गया, जबकि बाल कलाकारों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का स्वागत किया।
सूचनाओं के साथ संस्कार और सकारात्मकता का संदेश देने वाले इस मीडिया महासम्मेलन ने पत्रकारिता को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ते हुए श्रेष्ठ भारत और श्रेष्ठ विश्व के निर्माण का संकल्प दिया।





























