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कहावते - sayings - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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कहावते - sayings
कहावते - sayings
69 unique murli dates in this topic
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69 murlis in हिंदी
06/07/1969
“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
11/07/1971
“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”
27/09/1971
“स्नेह की शक्ति द्वारा सत्यता की प्रत्यक्षता”
05/10/1971
“सम्पूर्णता की निशानी 16 कलायें”
27/04/1972
“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”
06/08/1972
“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”
20/11/1972
“स्थिति का आइना - सर्विस”
26/06/1974
“सर्व सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो”
04/07/1974
“स्व-स्थिति की श्रेष्ठता से व्यर्थ संकल्पों की हलचल समाप्त”
02/02/1976
“भक्तों और पाण्डवों का पोतामेल”
03/02/1976
“धर्म और कर्म का कम्बाइन्ड रूप”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
24/12/1979
“जहान को रोशन करने वालों की महफिल”
18/03/1981
“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”
27/03/1981
“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
11/04/1981
“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”
18/11/1981
“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”
24/03/1982
“ब्राह्मण जीवन की विशेषता है - पवित्रता”
16/04/1982
“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”
25/12/1982
“विधि, विधान और वरदान”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
24/02/1983
“दिलाराम बाप का दिलरूबा बच्चों से मिलन”
21/03/1983
“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”
14/01/1984
“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”
20/02/1984
“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”
01/03/1984
“एक का हिसाब”
12/04/1984
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन - पवित्रता”
26/11/1984
“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
07/04/1986
“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
09/10/1987
“अलौकिक राज्य दरबार का समाचार”
17/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”
30/01/1988
“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”
12/03/1988
“तीन प्रकार का स्नेह तथा दिल के स्नेही बच्चों की विशेषतायें”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
06/01/1990
“होलीहँस की परिभाषा”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
13/03/1990
“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
11/12/1991
“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
18/11/1993
“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”
13/12/1995
“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”
22/12/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”
14/12/1997
“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”
16/12/2000
“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”
03/02/2002
“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
20/03/2004
“इस वर्ष को विशेष जीवनमुक्त वर्ष के रूप में मनाओ, एकता और एकाग्रता से बाप की प्रत्यक्षता करो''
15/12/2004
“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''
18/01/2005
“सेकेण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो”
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
31/12/2006
“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“
02/02/2007
“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”
20/10/2008
“सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो”