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Iness-मैं पन - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Iness-मैं पन
Iness-मैं पन
95 unique murli dates in this topic
English
हिंदी
ગુજરાતી
తెలుగు
93 murlis in हिंदी
02/02/1969
“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”
18/09/1969
“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
25/12/1969
“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
02/04/1970
“सम्पूर्ण स्टेज की निशानियां”
21/05/1970
“भिन्नता को मिटाने की युक्ति”
11/06/1970
“विश्वपति बनने की सामग्री”
15/09/1971
“मास्टर ज्ञान सूर्य आत्माओं का कर्तव्य”
22/07/1972
“नष्टोमोहा बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ”
09/04/1973
“उन्नति के पथ पर अग्रसर होने की युक्तियां”
23/09/1973
“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”
18/06/1974
“लाइट हाउस और माइट हाउस बन, नई दुनिया के मेकर बनो”
27/12/1974
“योगी भव और पवित्र भव द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
24/10/1975
“हरेक ब्रह्मा-मुखवंशी ब्राह्मण चेतन शालिग्राम का मन्दिर है”
28/01/1977
“ब्राह्मणों का धर्म और कर्म”
30/04/1977
“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
29/05/1977
“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”
05/06/1977
“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”
22/06/1977
“सितारों की दुनिया का रहस्य”
01/04/1978
“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”
05/12/1978
“मरजीवा जन्म का निजी संस्कार - पहली स्मृति और पहला बोल”
03/02/1979
“सर्व पर रहम करो, ‘वहम' और ‘अहम' भाव को मिटाओ”
26/11/1979
“प्रीत की रीति”
02/01/1980
“आने वाली दुनिया कैसी होगी?”
03/04/1981
“ज्ञान मार्ग की यादगार भक्ति मार्ग”
09/10/1981
“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”
01/11/1981
“सेवा के सफलता की कुन्जी”
17/03/1982
“संगमयुग का विशेष वरदान - ‘अमर भव’”
03/04/1982
“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”
30/04/1982
“विस्तार को बिन्दी में समाओ”
26/01/1983
“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”
07/04/1983
“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”
11/04/1983
“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”
19/05/1983
“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”
23/05/1983
“छोड़ो तो छूटो!”
27/12/1983
“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”
24/02/1984
“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”
02/04/1984
“बिन्दु का महत्व”
08/04/1984
“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”
07/01/1985
“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”
18/02/1985
“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
07/03/1986
“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
10/11/1987
“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”
03/02/1988
“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
19/03/1990
“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
04/12/1991
“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
18/01/1992
“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
18/02/1994
“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”
23/12/1994
“अपने तीन स्वरूप सदा स्मृति में रहें - 1- संगमयुगी ब्राह्मण, 2- ब्राह्मण सो फ़रिश्ता और 3- फ़रिश्ता सो देवता”
09/01/1996
“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”
18/01/1996
“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”
16/02/1996
“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”
03/04/1996
“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”
31/12/1997
“इस नये वर्ष को मुक्ति वर्ष मनाओ, सफल करो सफलता लो”
13/03/1998
“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”
12/12/1998
“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
11/11/2000
“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”
31/12/2000
“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”
20/02/2001
“शिव जयन्ती, व्रत लेने और सर्व समर्पण होने का यादगार है''
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
15/12/2003
“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''
31/12/2003
“इस वर्ष निमित्त और निर्माण बन जमा के खाते को बढ़ाओ और अखण्ड महादानी बनो''
17/02/2004
“शिवरात्रि जन्म उत्सव का विशेष स्लोगन - सर्व को सहयोग दो और सहयोगी बनाओ, सदा अखण्ड भण्डारा चलता रहे''
20/03/2004
“इस वर्ष को विशेष जीवनमुक्त वर्ष के रूप में मनाओ, एकता और एकाग्रता से बाप की प्रत्यक्षता करो''
31/12/2004
“इस वर्ष के आरम्भ से बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है''
18/01/2005
“सेकेण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो”
07/03/2005
“सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत रखना और मैं पन को समर्पित करना ही शिवजयन्ती मनाना है''
21/10/2005
“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”
30/11/2005
“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”
03/02/2006
“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''
14/03/2006
“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''
30/11/2006
“ज्वालामुखी तपस्या द्वारा मैं-पन की पूंछ को जलाकर बापदादा समान बनो तब समाप्ति समीप आयेगी''
31/03/2007
“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”
02/02/2008
“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”
05/03/2008
“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”
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