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बोल / वचन - Words Promise - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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बोल / वचन - Words Promise
बोल / वचन - Words Promise
347 unique murli dates in this topic
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తెలుగు
200 murlis in हिंदी
25/01/1969
“समर्पण की ऊंची स्टेज - श्वांसों-श्वांस स्मृति”
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
26/05/1969
“सम्पूर्ण स्नेही की परख”
06/07/1969
“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”
16/07/1969
“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
20/10/1969
“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
21/05/1970
“भिन्नता को मिटाने की युक्ति”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
11/07/1970
“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”
27/07/1970
“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
29/10/1970
“दीपमाला का सच्चा रहस्य”
01/11/1970
“बाप समान बनने की युक्तियां”
05/03/1971
“भट्ठी की अलौकिक छाप”
09/04/1971
“अव्यक्त स्थिति में सर्व गुणों का अनुभव”
15/04/1971
“त्रिमूर्ति बाप के बच्चों का त्रिमूर्ति कर्तव्य”
11/07/1971
“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”
19/07/1971
“सिम्पल बनो, सैम्पल बनो”
20/08/1971
“सबसे श्रेष्ठ तख्त और ताज”
27/09/1971
“स्नेह की शक्ति द्वारा सत्यता की प्रत्यक्षता”
09/10/1971
“पॉवरफुल वृत्ति से सर्विस में वृद्धि”
01/12/1971
“सर्व-शक्तियों के सम्पत्तिवान बनो”
02/02/1972
“प्रीत बुद्धि की निशानियाँ”
15/03/1972
“त्याग और भाग्य”
10/05/1972
“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
27/05/1972
“रावण से विमुख और बाप के सम्मुख रहो”
19/07/1972
“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”
22/07/1972
“नष्टोमोहा बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ”
28/07/1972
“अपवित्रता और वियोग को संघार करने वाली शक्तियाँ ही असुर संघारनी हैं”
02/08/1972
“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”
04/08/1972
“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”
06/08/1972
“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”
19/09/1972
“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”
20/11/1972
“स्थिति का आइना - सर्विस”
22/11/1972
“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”
09/04/1973
“उन्नति के पथ पर अग्रसर होने की युक्तियां”
13/06/1973
“रूहानी योद्धा”
23/06/1973
“अलौकिक खजाने के मालिक”
02/08/1973
“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”
23/09/1973
“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”
27/05/1974
“विश्व-कल्याण के निमित्त बनी आत्माओं के वचन भी सदा कल्याणकारी”
18/06/1974
“लाइट हाउस और माइट हाउस बन, नई दुनिया के मेकर बनो”
11/07/1974
“मुरली में दी गई डायरेक्शन से ही सर्व कमियों से छुटकारा”
14/07/1974
“बाप समान सफलता-मूर्त बनने का साधन - सर्व के प्रति शुभ भावना”
15/09/1974
“पुरुषार्थ का अन्तिम लक्ष्य है अव्यक्त फरिश्ता-पन”
09/01/1975
“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”
01/02/1975
“ईश्वर के साथ का और लगन की अग्नि का अनुभव”
05/02/1975
“पवित्रता - प्रत्यक्षता की पूर्वगामिनी है और पर्सनैलिटी की जननी”
29/08/1975
“अब विधि की स्टेज पार कर सिद्धि-स्वरूप बनना है (जन्माष्टमी पर)”
18/09/1975
“माया के चक्करों से परे, स्वदर्शन चक्रधारी ही भविष्य में छत्रधारी”
30/09/1975
“सारे कल्प में विशेष पार्ट बजाने वाली श्रेष्ठ आत्माओं की विशेषतायें”
01/10/1975
“एकान्त, एकाग्रता और दृढ़-संकल्प से सिद्धि की प्राप्ति”
04/10/1975
“अब दृढ़ संकल्प की तीली से कमज़ोरियों के रावण को जलाओ”
12/10/1975
“कम्पलेन्ट समाप्त कर कम्पलीट बनने की प्रेरणा”
16/10/1975
“संकल्प शक्ति को कन्ट्रोल कर सिद्धि-स्वरूप बनने की युक्तियाँ”
20/10/1975
“परहेज द्वारा संगमयुग के सर्व सुखों की अनुभूति”
24/10/1975
“हरेक ब्रह्मा-मुखवंशी ब्राह्मण चेतन शालिग्राम का मन्दिर है”
26/10/1975
“विकारी देह रूपी साँप से सारी कमाई खत्म”
27/10/1975
“क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन से पुरुषार्थ में ढीलापन”
08/12/1975
“बच्चे की विभिन्न स्टेजेस”
09/12/1975
“महावीर अर्थात् विशेष आत्माओं की विशेषताएं”
01/02/1976
“रूहानी शमा और तीन प्रकार के रूहानी परवाने”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
29/05/1977
“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
16/02/1978
“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”
01/04/1978
“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”
27/11/1978
“अल्पकाल के नाम और मान से न्यारे ही सर्व के प्यारे बन सकते हैं”
12/12/1978
“परोपकारी कैसे बनें?”
14/12/1978
“विघ्नों से मुक्त होने की सहज युक्ति”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
06/01/1979
“सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी आत्माओं के प्रैक्टिकल जीवन की धारणाओं के चिन्ह”
14/01/1979
“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”
03/02/1979
“सर्व पर रहम करो, ‘वहम' और ‘अहम' भाव को मिटाओ”
30/11/1979
“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”
03/12/1979
“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”
10/12/1979
“पुण्य आत्माओं के लक्षण”
12/12/1979
“रूहानी अलंकार और उनसे सजी हुई मूर्तियाँ”
17/12/1979
“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”
28/12/1979
“सिद्धि स्वरूप होने की विधि - एकाग्रता”
09/01/1980
“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”
28/01/1980
“सम्पूर्ण ब्रह्मा और ब्राह्मणों के सम्पूर्ण स्वरूप के अन्तर का कारण और निवारण”
04/02/1980
“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”
07/02/1980
“विचित्र राज्य दरबार”
20/01/1981
“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”
07/03/1981
“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”
09/03/1981
“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”
11/03/1981
“सफलता के दो मुख्य आधार”
13/03/1981
“डबल रूप से सेवा द्वारा ही आध्यात्मिक जागृति”
25/03/1981
“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”
03/04/1981
“ज्ञान मार्ग की यादगार भक्ति मार्ग”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
11/04/1981
“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”
13/04/1981
“रूहे-गुलाब की विशेषता”
08/10/1981
“ब्रह्मा बाप की एक शुभ आशा”
24/10/1981
“सच्चे आशिक की निशानी”
27/10/1981
“दीपावली के शुभ अवसर पर अव्यक्त बापदादा के उच्चारे हुए महावाक्य”
01/11/1981
“सेवा के सफलता की कुन्जी”
03/11/1981
“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”
21/11/1981
“छोड़ो तो छूटो”
20/01/1982
“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”
22/01/1982
“बधाई और विदाई दो”
07/03/1982
“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”
12/03/1982
“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”
14/03/1982
“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”
19/03/1982
“कर्म - आत्मा का दर्शन कराने का दर्पण”
27/03/1982
“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”
01/04/1982
“भाग्य का आधार त्याग”
08/04/1982
“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”
11/04/1982
“व्यर्थ का त्याग कर समर्थ बनो”
16/04/1982
“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”
18/04/1982
“ऊंचे से ऊंचे ब्राह्मण कुल की लाज रखो”
26/04/1982
“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”
28/04/1982
“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”
31/12/1982
“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”
11/01/1983
“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”
15/01/1983
“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”
18/02/1983
“सदा उमंग-उत्साह में रहने की युक्तियाँ”
24/02/1983
“दिलाराम बाप का दिलरूबा बच्चों से मिलन”
27/03/1983
“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
17/04/1983
“कर्मातीत स्थिति के लिए समेटने और समाने की शक्तियों की आवश्यकता”
27/04/1983
“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”
04/05/1983
“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”
23/05/1983
“छोड़ो तो छूटो!”
01/06/1983
“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
23/12/1983
“डबल लाइट की स्थिति से मेहनत समाप्त”
27/12/1983
“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”
29/12/1983
“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”
12/01/1984
“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”
22/02/1984
“संगम पर चार कम्बाइन्ड रूपों का अनुभव”
24/02/1984
“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”
12/04/1984
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन - पवित्रता”
19/04/1984
“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”
09/05/1984
“सदा एकरस उड़ने और उड़ाने के गीत गाओ”
21/11/1984
“स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त”
03/12/1984
“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”
10/12/1984
“पुराने खाते की समाप्ति की निशानी”
09/01/1985
“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”
14/01/1985
“शुभ चिन्तक बनने का आधार स्वचिन्तन और शुभ चिन्तन”
16/01/1985
“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”
28/01/1985
“विश्व सेवा का सहज साधन मन्सा सेवा”
16/02/1985
“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”
27/02/1985
“शिव शक्ति पाण्डव सेना की विशेषतायें”
02/03/1985
“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”
18/03/1985
“सन्तुष्टता”
21/03/1985
“स्वदर्शन चक्र से विजय चक्र की प्राप्ति”
27/03/1985
“कर्मातीत अवस्था”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
01/01/1986
“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”
06/01/1986
“संगमयुग - जमा करने का युग”
08/01/1986
“धरती के ‘होली’ सितारे”
13/01/1986
“ब्राह्मण जीवन - सदा बेहद की खुशियों का जीवन”
20/01/1986
“पुरुषार्थ और परिवर्तन के गोल्डन चांस का वर्ष”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
07/03/1986
“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”
27/03/1986
“सदा के स्नेही बनो”
31/03/1986
“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
21/01/1987
“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
20/03/1987
“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”
14/10/1987
“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”
17/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”
21/10/1987
“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
14/11/1987
“पूज्य देव आत्मा बनने का साधन - पवित्रता की शक्ति”
18/11/1987
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
22/11/1987
“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
06/12/1987
“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
23/12/1987
“मनन शक्ति और मगन स्थिति”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
06/01/1988
“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”
10/01/1988
“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
22/01/1988
“हिम्मत का पहला कदम - समर्पणता”
03/02/1988
“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
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