रूहानी ड्रिल - Spiritual drill

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15/09/1969“याद के आधार पर यादगार”03/10/1969“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”16/10/1969“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”20/10/1969“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”11/06/1970“विश्वपति बनने की सामग्री”25/06/1970“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”22/10/1970“फुल की निशानी - फ्लोलेस”23/10/1970“महारथी बनने का पुरुषार्थ”18/06/1971“बुद्धि की अलौकिक ड्रिल”27/05/1972“रावण से विमुख और बाप के सम्मुख रहो”04/12/1972“महावीर आत्माओं की रूहानी ड्रिल”15/09/1974“पुरुषार्थ का अन्तिम लक्ष्य है अव्यक्त फरिश्ता-पन”16/10/1975“संकल्प शक्ति को कन्ट्रोल कर सिद्धि-स्वरूप बनने की युक्तियाँ”23/01/1976“संकल्प, वाणी और स्वरूप के हाईएस्ट और होलीएस्ट होने से बाप की प्रत्यक्षता”23/01/1977“महीनता ही महानता है”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”10/01/1979“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”21/11/1979“विश्व परिवर्तन के लिए सर्व की एक ही वृत्ति का होना आवश्यक”26/11/1979“प्रीत की रीति”24/12/1979“जहान को रोशन करने वालों की महफिल”20/01/1981“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”25/03/1981“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”24/10/1981“सच्चे आशिक की निशानी”16/03/1986“रुहानी ड्रिल”02/11/1987“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”18/11/1987“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”20/02/1988“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”12/03/1988“तीन प्रकार का स्नेह तथा दिल के स्नेही बच्चों की विशेषतायें”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”27/02/1996“सत्यता का फाउण्डेशन है पवित्रता और निशानी है - चलन वा चेहरे में दिव्यता”10/03/1996“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”22/03/1996“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्‍नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”18/01/1997“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”06/03/1997“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”13/11/1997“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”28/11/1997“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”24/02/1998“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”13/03/1998“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”12/12/1998“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”31/12/1998“इस नये वर्ष में हिम्मत के आधार पर स्वयं को मेहनत मुक्त सदा विजयी अनुभव करो”18/01/1999“वर्तमान समय के प्रमाण वैराग्य वृत्ति को इमर्ज कर साधना का वायुमण्डल बनाओ”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”30/03/1999“तीव्र पुरुषार्थ की लगन को ज्वाला रूप बनाकर बेहद के वैराग्य की लहर फैलाओ”23/10/1999“समय की पुकार - दाता बनो”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”30/11/1999“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”15/12/1999“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”19/03/2000“निर्माण और निर्मान के बैलेन्स से दुआओं का खाता जमा करो”30/03/2000“मन को दुरुस्त रखने के लिए बीच-बीच में 5 सेकेण्ड भी निकाल कर मन की एक्सरसाइज करो”11/11/2000“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”04/02/2001“समय प्रमाण स्वराज्य अधिकारी बन सर्व रूहानी साधन तीव्रगति से कार्य में लगाओ”20/02/2001“शिव जयन्ती, व्रत लेने और सर्व समर्पण होने का यादगार है''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”18/01/2002“स्नेह की शक्ति द्वारा समर्थ बनो, सर्व आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली दो''03/02/2002“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''24/02/2002“बाप को प्रत्यक्ष करने के लिए अपनी वा दूसरों की वृत्ति को पॉजिटिव बनाओ''14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”31/12/2002“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''15/11/2003“मन को एकाग्र कर, एकाग्रता की शक्ति द्वारा फरिश्ता स्थिति का अनुभव करो''30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''31/12/2003“इस वर्ष निमित्त और निर्माण बन जमा के खाते को बढ़ाओ और अखण्ड महादानी बनो''18/01/2004“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''02/02/2004“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''17/02/2004“शिवरात्रि जन्म उत्सव का विशेष स्लोगन - सर्व को सहयोग दो और सहयोगी बनाओ, सदा अखण्ड भण्डारा चलता रहे''20/03/2004“इस वर्ष को विशेष जीवनमुक्त वर्ष के रूप में मनाओ, एकता और एकाग्रता से बाप की प्रत्यक्षता करो''02/11/2004“स्व-उपकारी बन अपकारी पर भी उपकार करो, सर्व शक्ति, सर्व गुण सम्पन्न सम्मान दाता बनो”31/12/2004“इस वर्ष के आरम्भ से बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है''

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