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परमात्मा प्यार की पालना - Sustenance of God's Love - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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परमात्मा प्यार की पालना - Sustenance of God's Love
परमात्मा प्यार की पालना - Sustenance of God's Love
233 unique murli dates in this topic
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తెలుగు
200 murlis in हिंदी
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
26/05/1969
“सम्पूर्ण स्नेही की परख”
26/06/1969
“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”
06/07/1969
“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”
27/08/1969
“मदद लेने का साधन है - हिम्मत”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
17/11/1969
“फर्श से अर्श पर जाने की युक्तियाँ”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
05/01/1977
“त्यागी और तपस्वी बच्चे सदा पास हैं”
02/02/1977
“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
02/01/1978
“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”
27/11/1978
“अल्पकाल के नाम और मान से न्यारे ही सर्व के प्यारे बन सकते हैं”
01/02/1979
“मनन-शक्ति ही माया जीत बनने का साधन”
17/12/1979
“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”
20/01/1981
“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”
07/03/1981
“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”
11/03/1981
“सफलता के दो मुख्य आधार”
15/03/1981
“स्वदर्शन चक्रधारी तथा चक्रवर्ती ही विश्व-कल्याणकारी”
17/03/1981
“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”
18/03/1981
“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”
19/03/1981
“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”
27/03/1981
“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”
07/04/1981
“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”
06/10/1981
“ज्ञान सूर्य बाप की मास्टर ज्ञान सूर्य बच्चों को सेवा की बधाई”
08/10/1981
“ब्रह्मा बाप की एक शुभ आशा”
29/12/1981
“दूरदेशी बच्चों से दूर देशी बापदादा का मिलन”
14/01/1982
“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”
20/01/1982
“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”
06/01/1983
“निरन्तर सहज योगी बनने की सहज युक्ति”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
11/01/1983
“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”
15/02/1983
“विश्व शान्ति का आधार - रियलाइजेशन”
21/02/1983
“शान्ति की शक्ति”
24/02/1983
“दिलाराम बाप का दिलरूबा बच्चों से मिलन”
27/02/1983
“संगमयुग पर श्रृंगारा हुआ मधुर अलौकिक मेला”
21/03/1983
“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”
30/03/1983
“सहजयोगी बनने का साधन - अनुभवों की अथॉरिटी का आसन”
07/04/1983
“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”
11/04/1983
“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
19/04/1983
“संगमयुग का प्रभु फल खाने से सर्व प्राप्तियाँ”
24/04/1983
“रूहानी पर्सनैलिटी”
02/05/1983
“माया को दोषी बनाने के बजाए मास्टर रचता, शक्तिशाली बनो”
09/05/1983
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”
17/05/1983
“संगम युग - मौजों के नज़ारों का युग”
19/05/1983
“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”
23/05/1983
“छोड़ो तो छूटो!”
01/06/1983
“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
01/12/1983
“सुख, शान्ति और पवित्रता के तीन अधिकार”
03/12/1983
“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”
14/12/1983
“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”
19/12/1983
“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”
23/12/1983
“डबल लाइट की स्थिति से मेहनत समाप्त”
31/12/1983
“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”
16/01/1984
“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”
18/01/1984
“18 जनवरी - स्मृति दिवस का महत्व”
22/01/1984
“नामीग्रामी सेवाधारी बनने की विधि”
20/02/1984
“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”
22/02/1984
“संगम पर चार कम्बाइन्ड रूपों का अनुभव”
28/02/1984
“बिन्दु और बूंद का रहस्य”
01/03/1984
“एक का हिसाब”
05/03/1984
“शान्ति की शक्ति का महत्व”
12/03/1984
“सन्तुष्टता”
10/04/1984
“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”
22/04/1984
“विचित्र बाप द्वारा विचित्र पढ़ाई तथा विचित्र प्राप्ति”
09/05/1984
“सदा एकरस उड़ने और उड़ाने के गीत गाओ”
21/11/1984
“स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त”
24/12/1984
“ईश्वरीय स्नेह का महत्व”
09/01/1985
“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”
16/01/1985
“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”
21/01/1985
“ईश्वरीय जन्म दिन की गोल्डन गिफ्ट - ‘दिव्य बुद्धि’”
30/01/1985
“मायाजीत और प्रकृतिजीत ही स्वराज्य-अधिकारी”
16/02/1985
“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”
18/02/1985
“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”
21/02/1985
“शीतलता की शक्ति”
24/02/1985
“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”
27/02/1985
“शिव शक्ति पाण्डव सेना की विशेषतायें”
02/03/1985
“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
16/02/1986
“गोल्डन जुबली वर्ष में गोल्डन दुनिया और गोल्डन लाइट के स्वीट होम का अनुभव कराना”
25/02/1986
“सफलता का आधार - दृढ़ता”
07/03/1986
“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”
10/03/1986
“बेफिकर बादशाह बनने की युक्ति”
13/03/1986
“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”
16/03/1986
“रुहानी ड्रिल”
19/03/1986
“अमृतवेला - श्रेष्ठ प्राप्तियों की वेला”
25/03/1986
“होली का रहस्य”
27/03/1986
“सदा के स्नेही बनो”
29/03/1986
“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”
31/03/1986
“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”
11/04/1986
“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति”
31/12/1986
“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
21/01/1987
“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
20/03/1987
“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”
01/10/1987
“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”
05/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”
14/10/1987
“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
18/11/1987
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
06/12/1987
“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
23/12/1987
“मनन शक्ति और मगन स्थिति”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
03/02/1988
“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”
20/02/1988
“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
11/08/1988
“सफलता का चुम्बक - ‘मिलना और मोल्ड होना’”
07/11/1989
“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”
23/11/1989
“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
31/12/1989
“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
18/01/1990
“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
07/03/1990
“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”
13/03/1990
“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”
19/03/1990
“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
13/12/1990
“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
25/02/1991
“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
18/01/1992
“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”
13/02/1992
“अनेक जन्म का प्यार सम्पन्न जीवन बनाने का आधार - इस जन्म का परमात्म-प्यार”
16/03/1992
“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”
01/04/1992
“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
31/12/1993
“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
18/02/1994
“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”
09/03/1994
“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”
14/04/1994
“स्नेह का रिटर्न है - स्वयं को टर्न (परिवर्तन) करना”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
07/11/1995
“बापदादा की विशेष पसन्दगी और ज्ञान का फाउण्डेशन - पवित्रता”
16/11/1995
“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
04/12/1995
“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”
22/12/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”
31/12/1995
“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”
10/03/1996
“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”
22/03/1996
“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”
03/04/1996
“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”
31/12/1996
“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
06/03/1997
“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”
03/04/1997
“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”
13/11/1997
“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”
28/11/1997
“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”
14/12/1997
“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”
18/01/1998
“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”
31/01/1998
“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”
24/02/1998
“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”
30/03/1998
“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”
21/11/1998
“सेवा के साथ देह में रहते विदेही अवस्था का अनुभव बढ़ाओ”
13/02/1999
“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
30/03/1999
“तीव्र पुरुषार्थ की लगन को ज्वाला रूप बनाकर बेहद के वैराग्य की लहर फैलाओ”
23/10/1999
“समय की पुकार - दाता बनो”
30/11/1999
“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
18/01/2000
“ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा का वायब्रेशन विश्व में फैलाओ”
15/02/2000
“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”
11/11/2000
“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”
25/11/2000
“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”
31/12/2000
“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”
18/01/2001
“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”
04/11/2001
“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''
25/11/2001
“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''
18/01/2002
“स्नेह की शक्ति द्वारा समर्थ बनो, सर्व आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली दो''
03/02/2002
“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''
28/03/2002
“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”