परमात्मा प्यार की पालना - Sustenance of God's Love
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06/02/1969“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”17/04/1969“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”26/05/1969“सम्पूर्ण स्नेही की परख”26/06/1969“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”06/07/1969“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”27/08/1969“मदद लेने का साधन है - हिम्मत”28/09/1969“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”17/11/1969“फर्श से अर्श पर जाने की युक्तियाँ”23/01/1970“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”05/01/1977“त्यागी और तपस्वी बच्चे सदा पास हैं”02/02/1977“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”27/11/1978“अल्पकाल के नाम और मान से न्यारे ही सर्व के प्यारे बन सकते हैं”01/02/1979“मनन-शक्ति ही माया जीत बनने का साधन”17/12/1979“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”20/01/1981“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”11/03/1981“सफलता के दो मुख्य आधार”15/03/1981“स्वदर्शन चक्रधारी तथा चक्रवर्ती ही विश्व-कल्याणकारी”17/03/1981“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”18/03/1981“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”19/03/1981“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”07/04/1981“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”06/10/1981“ज्ञान सूर्य बाप की मास्टर ज्ञान सूर्य बच्चों को सेवा की बधाई”08/10/1981“ब्रह्मा बाप की एक शुभ आशा”29/12/1981“दूरदेशी बच्चों से दूर देशी बापदादा का मिलन”14/01/1982“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”20/01/1982“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”06/01/1983“निरन्तर सहज योगी बनने की सहज युक्ति”09/01/1983“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”11/01/1983“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”15/02/1983“विश्व शान्ति का आधार - रियलाइजेशन”21/02/1983“शान्ति की शक्ति”24/02/1983“दिलाराम बाप का दिलरूबा बच्चों से मिलन”27/02/1983“संगमयुग पर श्रृंगारा हुआ मधुर अलौकिक मेला”21/03/1983“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”30/03/1983“सहजयोगी बनने का साधन - अनुभवों की अथॉरिटी का आसन”07/04/1983“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”11/04/1983“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”13/04/1983“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”19/04/1983“संगमयुग का प्रभु फल खाने से सर्व प्राप्तियाँ”24/04/1983“रूहानी पर्सनैलिटी”02/05/1983“माया को दोषी बनाने के बजाए मास्टर रचता, शक्तिशाली बनो”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”17/05/1983“संगम युग - मौजों के नज़ारों का युग”19/05/1983“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”23/05/1983“छोड़ो तो छूटो!”01/06/1983“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”01/12/1983“सुख, शान्ति और पवित्रता के तीन अधिकार”03/12/1983“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”14/12/1983“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”19/12/1983“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”23/12/1983“डबल लाइट की स्थिति से मेहनत समाप्त”31/12/1983“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”16/01/1984“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”18/01/1984“18 जनवरी - स्मृति दिवस का महत्व”22/01/1984“नामीग्रामी सेवाधारी बनने की विधि”20/02/1984“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”22/02/1984“संगम पर चार कम्बाइन्ड रूपों का अनुभव”28/02/1984“बिन्दु और बूंद का रहस्य”01/03/1984“एक का हिसाब”05/03/1984“शान्ति की शक्ति का महत्व”12/03/1984“सन्तुष्टता”10/04/1984“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”22/04/1984“विचित्र बाप द्वारा विचित्र पढ़ाई तथा विचित्र प्राप्ति”09/05/1984“सदा एकरस उड़ने और उड़ाने के गीत गाओ”21/11/1984“स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त”24/12/1984“ईश्वरीय स्नेह का महत्व”09/01/1985“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”16/01/1985“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”21/01/1985“ईश्वरीय जन्म दिन की गोल्डन गिफ्ट - ‘दिव्य बुद्धि’”30/01/1985“मायाजीत और प्रकृतिजीत ही स्वराज्य-अधिकारी”16/02/1985“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”18/02/1985“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”21/02/1985“शीतलता की शक्ति”24/02/1985“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”27/02/1985“शिव शक्ति पाण्डव सेना की विशेषतायें”02/03/1985“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”06/03/1985“होली का रूहानी रहस्य”30/03/1985“तीन-तीन बातों का पाठ”16/02/1986“गोल्डन जुबली वर्ष में गोल्डन दुनिया और गोल्डन लाइट के स्वीट होम का अनुभव कराना”25/02/1986“सफलता का आधार - दृढ़ता”07/03/1986“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”10/03/1986“बेफिकर बादशाह बनने की युक्ति”13/03/1986“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”16/03/1986“रुहानी ड्रिल”19/03/1986“अमृतवेला - श्रेष्ठ प्राप्तियों की वेला”25/03/1986“होली का रहस्य”27/03/1986“सदा के स्नेही बनो”29/03/1986“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”11/04/1986“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति”31/12/1986“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”21/01/1987“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”18/03/1987“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”20/03/1987“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”01/10/1987“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”05/10/1987“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”14/10/1987“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”02/11/1987“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”18/11/1987“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”23/12/1987“मनन शक्ति और मगन स्थिति”27/12/1987“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”03/02/1988“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”20/02/1988“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”24/02/1988“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”11/08/1988“सफलता का चुम्बक - ‘मिलना और मोल्ड होना’”07/11/1989“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”23/11/1989“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”13/12/1989“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”25/12/1989“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”31/12/1989“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”18/01/1990“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”07/03/1990“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”13/03/1990“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”19/03/1990“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”31/03/1990“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”13/12/1990“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”13/02/1991“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”25/02/1991“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”18/01/1992“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”13/02/1992“अनेक जन्म का प्यार सम्पन्न जीवन बनाने का आधार - इस जन्म का परमात्म-प्यार”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”01/04/1992“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”31/12/1993“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”18/02/1994“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”09/03/1994“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”14/04/1994“स्नेह का रिटर्न है - स्वयं को टर्न (परिवर्तन) करना”17/11/1994“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”07/11/1995“बापदादा की विशेष पसन्दगी और ज्ञान का फाउण्डेशन - पवित्रता”16/11/1995“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”25/11/1995“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”04/12/1995“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”22/12/1995“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”31/12/1995“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”10/03/1996“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”22/03/1996“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”03/04/1996“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”31/12/1996“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”06/03/1997“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”13/11/1997“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”28/11/1997“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”14/12/1997“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”18/01/1998“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”24/02/1998“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”21/11/1998“सेवा के साथ देह में रहते विदेही अवस्था का अनुभव बढ़ाओ”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”15/03/1999“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”30/03/1999“तीव्र पुरुषार्थ की लगन को ज्वाला रूप बनाकर बेहद के वैराग्य की लहर फैलाओ”23/10/1999“समय की पुकार - दाता बनो”30/11/1999“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”18/01/2000“ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा का वायब्रेशन विश्व में फैलाओ”15/02/2000“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”11/11/2000“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”25/11/2000“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”31/12/2000“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”18/01/2001“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”04/11/2001“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''18/01/2002“स्नेह की शक्ति द्वारा समर्थ बनो, सर्व आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली दो''03/02/2002“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''28/03/2002“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”31/12/2002“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
