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सेवा /सर्विस (Service) - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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सेवा /सर्विस (Service)
सेवा /सर्विस (Service)
298 unique murli dates in this topic
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తెలుగు
200 murlis in हिंदी
02/02/1969
“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
18/05/1969
“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”
16/06/1969
“बड़े-से-बड़ा त्याग - अवगुणों का त्याग”
18/06/1969
“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”
26/06/1969
“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”
06/07/1969
“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”
16/07/1969
“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”
19/07/1969
“ज़ीरो और हीरो बनो”
15/09/1969
“याद के आधार पर यादगार”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
25/06/1970
“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”
29/06/1970
“समर्पण का विशाल रूप”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
31/12/1970
“अमृतवेले से परिवर्तन शक्ति का प्रयोग”
18/01/1971
“अव्यक्त स्थिति द्वारा सेवा”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
10/06/1971
“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”
09/10/1971
“पॉवरफुल वृत्ति से सर्विस में वृद्धि”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
05/02/1972
“नशा और निशाना”
12/03/1972
“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”
02/04/1972
“महिमा योग्य कैसे बनें?”
10/05/1972
“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”
24/05/1972
“परिवर्तन का आधार - दृढ़ संकल्प”
27/05/1972
“रावण से विमुख और बाप के सम्मुख रहो”
09/11/1972
“ज्ञान सितारों का सम्बन्ध ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ”
08/05/1973
“सर्वोच्च स्वमान”
17/05/1973
“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”
25/05/1973
“भविष्य प्लान”
30/05/1973
“संगमयुग - पुरुषोत्तम युग”
06/06/1973
“समानता और समीपता”
18/06/1973
“विशेष आत्माओं की विशेषता”
15/07/1973
“लगाव और स्वभाव के बदलने से विश्व-परिवर्तन”
02/08/1973
“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”
23/09/1973
“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”
28/04/1974
“स्थूल के साथ-साथ सूक्ष्म साधनों से ईश्वरीय सेवा में सफलता”
15/09/1974
“पुरुषार्थ का अन्तिम लक्ष्य है अव्यक्त फरिश्ता-पन”
02/02/1975
“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”
10/02/1975
“सर्व शक्तियों सहित सेवा में समर्पण”
02/08/1975
“विदेशों में ईश्वरीय सेवा का महत्व”
03/08/1975
“शिव शक्ति व पाण्डव सेना को तैयार होने के लिए सावधानी”
23/10/1975
“इन्तज़ार को छोड़कर इन्तज़ाम करो!”
24/10/1975
“हरेक ब्रह्मा-मुखवंशी ब्राह्मण चेतन शालिग्राम का मन्दिर है”
31/10/1975
“महारथी बच्चों की मुख्य विशेषतायें”
08/12/1975
“बच्चे की विभिन्न स्टेजेस”
07/02/1976
“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”
07/01/1977
“विश्व-कल्याणकारी कैसे बनें?”
16/01/1977
“सन्तुष्ट आत्मा ही अनेक आत्माओं का इष्ट बन सकती है”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
16/05/1977
“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”
28/05/1977
“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
20/06/1977
“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
18/01/1978
“बापदादा की सेवा का रिटर्न”
01/01/1979
“नए वर्ष के लिए बाप द्वारा कराया गया दृढ़ संकल्प”
06/01/1979
“सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी आत्माओं के प्रैक्टिकल जीवन की धारणाओं के चिन्ह”
14/01/1979
“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”
03/02/1979
“सर्व पर रहम करो, ‘वहम' और ‘अहम' भाव को मिटाओ”
23/11/1979
“नम्रता रूपी कवच द्वारा स्नेह और सहयोग की प्राप्ति”
03/12/1979
“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”
15/12/1979
“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”
19/12/1979
“सहज याद का साधन - स्वयं को खुदाई खिदमतगार समझो”
28/12/1979
“सिद्धि स्वरूप होने की विधि - एकाग्रता”
07/01/1980
“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”
09/01/1980
“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”
14/01/1980
“रूहानी सेनानियों से रूहानी कमाण्डर की मुलाकात”
18/01/1980
“स्मृति दिवस पर बापदादा की बच्चों प्रति शिक्षायें”
25/01/1980
“बिन्दु रूप परमात्मा का बिन्दु रूप आत्मा से मिलन”
04/02/1980
“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”
20/01/1981
“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”
09/03/1981
“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”
13/03/1981
“डबल रूप से सेवा द्वारा ही आध्यात्मिक जागृति”
17/03/1981
“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”
19/03/1981
“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”
21/03/1981
“सच्ची होली कैसे मनायें?”
23/03/1981
“फर्स्ट या एयरकण्डीशन में जाने का सहज साधन”
03/04/1981
“ज्ञान मार्ग की यादगार भक्ति मार्ग”
11/04/1981
“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”
15/04/1981
“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”
11/11/1981
“बिन्दु का महत्व”
13/11/1981
“परखने और निर्णय शक्ति का आधार - साइलेन्स की शक्ति”
23/11/1981
“त्याग का भी त्याग”
28/11/1981
“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”
31/12/1981
“निर्बल को बल देने वाले महाबलवान बनो”
04/01/1982
“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”
10/01/1982
“स्वराज्य अधिकारी आत्माओं का आसन - कर्मातीत स्टेज”
18/01/1982
“18 जनवरी जिम्मेवारी के ताजपोशी का दिवस”
20/01/1982
“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”
12/03/1982
“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”
14/03/1982
“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”
27/03/1982
“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”
01/04/1982
“भाग्य का आधार त्याग”
03/04/1982
“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”
16/04/1982
“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”
28/04/1982
“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”
30/04/1982
“विस्तार को बिन्दी में समाओ”
13/06/1982
“एक का मन्त्र याद रहे तो सबमें एक दिखाई देगा (टीचर्स के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात)”
11/01/1983
“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”
21/02/1983
“शान्ति की शक्ति”
01/03/1983
“विश्व के हर स्थान पर आध्यात्मिक लाइट और ज्ञान जल पहुँचाओ”
03/04/1983
“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”
24/04/1983
“रूहानी पर्सनैलिटी”
23/05/1983
“छोड़ो तो छूटो!”
25/05/1983
“ब्रह्मा बाप की बच्चों से एक आशा”
01/06/1983
“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
10/11/1983
“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”
03/12/1983
“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”
12/12/1983
“एकाग्रता से सर्व शक्तियों की प्राप्ति”
19/12/1983
“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”
31/12/1983
“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”
14/01/1984
“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”
20/02/1984
“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”
24/02/1984
“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”
01/03/1984
“एक का हिसाब”
07/03/1984
“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”
08/04/1984
“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”
19/04/1984
“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”
22/04/1984
“विचित्र बाप द्वारा विचित्र पढ़ाई तथा विचित्र प्राप्ति”
09/05/1984
“सदा एकरस उड़ने और उड़ाने के गीत गाओ”
19/11/1984
“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”
21/11/1984
“स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त”
17/12/1984
“व्यर्थ को समाप्त करने का साधन - समर्थ संकल्पों का खजाना ज्ञान मुरली”
31/12/1984
“नये ज्ञान और नई जीवन द्वारा नवीनता की झलक दिखाओ”
07/01/1985
“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”
18/02/1985
“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”
27/02/1985
“शिव शक्ति पाण्डव सेना की विशेषतायें”
12/03/1985
“सत्यता की शक्ति”
15/03/1985
“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”
18/03/1985
“सन्तुष्टता”
24/03/1985
“अब नहीं तो कब नहीं”
27/03/1985
“कर्मातीत अवस्था”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
01/01/1986
“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”
06/01/1986
“संगमयुग - जमा करने का युग”
08/01/1986
“धरती के ‘होली’ सितारे”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
16/02/1986
“गोल्डन जुबली वर्ष में गोल्डन दुनिया और गोल्डन लाइट के स्वीट होम का अनुभव कराना”
18/02/1986
“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
22/02/1986
“रूहानी सेवा - निस्वार्थ सेवा”
27/02/1986
“रूहानी सेना कल्प-कल्प की विजयी”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
04/03/1986
“सर्व श्रेष्ठ नई रचना का फाउण्डेशन - निस्वार्थ स्नेह”
10/03/1986
“बेफिकर बादशाह बनने की युक्ति”
22/03/1986
“सुख, शान्ति और खुशी का आधार - पवित्रता”
29/03/1986
“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”
31/03/1986
“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”
09/04/1986
“सच्चे सेवाधारी की निशानी”
31/12/1986
“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
20/03/1987
“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”
01/10/1987
“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”
14/10/1987
“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”
21/10/1987
“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”
25/10/1987
“चार बातों से न्यारे बनो”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
06/11/1987
“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”
18/11/1987
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
10/12/1987
“तन, मन, धन और सम्बन्ध का श्रेष्ठ सौदा”
06/01/1988
“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”
10/01/1988
“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”
18/01/1988
“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”
03/02/1988
“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”
20/02/1988
“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
07/03/1988
“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”
19/03/1988
“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”
23/03/1988
“दिलाराम बाप के दिलतख्त-जीत दिलरूबा बच्चों की निशानियाँ”
27/03/1988
“सर्वश्रेष्ठ सितारा - ‘सफलता का सितारा’”
31/03/1988
‘वाचा’ और ‘कर्मणा’ - दोनों शक्तियों को जमा करने की ईश्वरीय स्कीम
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
23/11/1989
“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
29/12/1989
“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”
31/12/1989
“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
06/01/1990
“होलीहँस की परिभाषा”
20/01/1990
“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
19/03/1990
“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”