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मधुबन निवासी - madhuban niwasi - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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मधुबन निवासी - madhuban niwasi
मधुबन निवासी - madhuban niwasi
93 unique murli dates in this topic
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93 murlis in हिंदी
16/07/1969
“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”
15/09/1969
“याद के आधार पर यादगार”
06/12/1969
“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
05/03/1970
“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”
14/05/1970
“समर्पण का गुह्य अर्थ”
11/07/1970
“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”
01/02/1971
“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”
22/11/1972
“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”
21/04/1973
“जैसा नाम वैसा काम”
23/04/1977
“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
02/06/1977
“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”
22/06/1977
“सितारों की दुनिया का रहस्य”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
24/01/1978
“निरन्तर सेवाधारी”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
05/02/1979
“मधुबन निवासियों के साथ बापदादा की रूहरिहान''
01/02/1980
“सूक्ष्मवतन की कारोबार”
09/02/1980
“मधुबन निवासियों की विशेषता”
25/03/1981
“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”
24/10/1981
“सच्चे आशिक की निशानी”
27/10/1981
“दीपावली के शुभ अवसर पर अव्यक्त बापदादा के उच्चारे हुए महावाक्य”
28/11/1981
“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”
16/04/1982
“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”
13/01/1983
“स्वदर्शन चक्रधारी ही चक्रवर्ती राज्य भाग्य के अधिकारी”
26/01/1983
“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”
07/05/1983
“ब्राह्मणों का संसार - बेगमपुर”
19/05/1983
“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”
25/05/1983
“ब्रह्मा बाप की बच्चों से एक आशा”
14/12/1983
“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”
01/03/1984
“एक का हिसाब”
07/03/1984
“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”
12/03/1984
“सन्तुष्टता”
02/04/1984
“बिन्दु का महत्व”
15/04/1984
“स्नेही, सहयोगी, शक्तिशाली बच्चों की तीन अवस्थाएं”
07/01/1985
“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
19/03/1986
“अमृतवेला - श्रेष्ठ प्राप्तियों की वेला”
31/03/1986
“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
21/01/1987
“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”
20/03/1987
“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”
05/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”
21/10/1987
“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”
19/03/1988
“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”
07/11/1989
“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
10/04/1991
“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”
26/10/1991
“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”
04/12/1991
“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
01/02/1994
“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”
03/04/1994
“सन्तुष्टता का आधार - सम्बन्ध, सम्पत्ति और सेहत (तन्दुरुस्ती)”
10/03/1996
“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”
28/11/1997
“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”
18/01/1998
“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”
31/01/1998
“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”
30/03/1998
“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
15/02/2000
“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”
16/12/2000
“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”
25/11/2001
“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''
15/12/2001
“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”
31/12/2001
“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''
18/01/2002
“स्नेह की शक्ति द्वारा समर्थ बनो, सर्व आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली दो''
11/03/2002
“विशेषतायें परमात्म देन हैं - इन्हें विश्व सेवा में अर्पण करो''
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
30/11/2003
“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''
18/01/2004
“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''
05/03/2004
“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''
31/12/2004
“इस वर्ष के आरम्भ से बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है''
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
03/02/2006
“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''
14/03/2006
“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
15/12/2006
“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''
31/12/2006
“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“
03/03/2007
“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”
02/04/2008
”इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”