मधुबन निवासी - madhuban niwasi
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16/07/1969“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”15/09/1969“याद के आधार पर यादगार”06/12/1969“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”23/01/1970“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”25/01/1970“यादगार कायम करने की विधि”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”05/03/1970“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”14/05/1970“समर्पण का गुह्य अर्थ”11/07/1970“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”01/02/1971“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”22/11/1972“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”21/04/1973“जैसा नाम वैसा काम”23/04/1977“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”28/04/1977“सदा सुहागिन की निशानियाँ”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”22/06/1977“सितारों की दुनिया का रहस्य”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”24/01/1978“निरन्तर सेवाधारी”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”05/02/1979“मधुबन निवासियों के साथ बापदादा की रूहरिहान''01/02/1980“सूक्ष्मवतन की कारोबार”09/02/1980“मधुबन निवासियों की विशेषता”25/03/1981“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”24/10/1981“सच्चे आशिक की निशानी”27/10/1981“दीपावली के शुभ अवसर पर अव्यक्त बापदादा के उच्चारे हुए महावाक्य”28/11/1981“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”16/04/1982“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”13/01/1983“स्वदर्शन चक्रधारी ही चक्रवर्ती राज्य भाग्य के अधिकारी”26/01/1983“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”07/05/1983“ब्राह्मणों का संसार - बेगमपुर”19/05/1983“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”25/05/1983“ब्रह्मा बाप की बच्चों से एक आशा”14/12/1983“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”01/03/1984“एक का हिसाब”07/03/1984“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”12/03/1984“सन्तुष्टता”02/04/1984“बिन्दु का महत्व”15/04/1984“स्नेही, सहयोगी, शक्तिशाली बच्चों की तीन अवस्थाएं”07/01/1985“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”06/03/1985“होली का रूहानी रहस्य”19/03/1986“अमृतवेला - श्रेष्ठ प्राप्तियों की वेला”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”21/01/1987“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”20/03/1987“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”05/10/1987“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”21/10/1987“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”07/11/1989“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”15/11/1989“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”03/04/1991“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”10/04/1991“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”26/10/1991“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”04/12/1991“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”01/02/1994“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”03/04/1994“सन्तुष्टता का आधार - सम्बन्ध, सम्पत्ति और सेहत (तन्दुरुस्ती)”10/03/1996“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”28/11/1997“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”18/01/1998“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”15/03/1999“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”15/02/2000“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”16/12/2000“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”31/12/2001“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''18/01/2002“स्नेह की शक्ति द्वारा समर्थ बनो, सर्व आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली दो''11/03/2002“विशेषतायें परमात्म देन हैं - इन्हें विश्व सेवा में अर्पण करो''08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''25/10/2002“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''18/01/2004“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''05/03/2004“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''31/12/2004“इस वर्ष के आरम्भ से बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''14/03/2006“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”15/12/2006“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''31/12/2006“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“03/03/2007“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”02/04/2008”इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
