बापसामान सामान - Like Father

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23/01/1969“अस्थियां हैं स्थिति की स्मृति दिलाने वाली”02/02/1969“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”06/02/1969“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”13/03/1969“प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”20/03/1969“सात बातें छोड़ो और सात बातें धारण करो”17/04/1969“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”26/05/1969“सम्पूर्ण स्नेही की परख”18/06/1969“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”26/06/1969“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”23/07/1969“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”16/10/1969“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”20/10/1969“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”25/10/1969“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”09/11/1969“भविष्य को जानने की युक्तियां”13/11/1969“बापदादा की उम्मीदें - क्वान्टिटी के बजाए क्वालिटी वाले बनो और बनाओ”18/01/1970“सम्पूर्ण विल करने से विल-पावर की प्राप्ति”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”23/01/1970“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”25/01/1970“यादगार कायम करने की विधि”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”26/03/1970“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”07/06/1970“दिव्य मूर्त बनने की विधि”18/06/1970“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”19/06/1970“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”25/06/1970“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”26/06/1970“कामधेनु का अर्थ”29/06/1970“समर्पण का विशाल रूप”02/07/1970“साइलेन्स बल का प्रयोग”27/07/1970“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”30/07/1970“महारथी अर्थात् महानता”06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”29/10/1970“दीपमाला का सच्चा रहस्य”01/11/1970“बाप समान बनने की युक्तियां”03/12/1970“सामना करने के लिए कामनाओं का त्याग”05/12/1970“प्रतिज्ञा करने वालों को माया की चैलेंज”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”26/01/1971“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”01/02/1971“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”25/03/1971“न्यारे और विश्व के प्यारे बनने की विधि”06/05/1971“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”21/01/1972“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”03/02/1972“स्वयं को जानने से संयम और समय की पहचान”05/02/1972“नशा और निशाना”27/02/1972“होलीहंस बनने का यादगार - होली”28/02/1972“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”12/03/1972“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”15/03/1972“त्याग और भाग्य”02/04/1972“महिमा योग्य कैसे बनें?”03/05/1972“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”15/05/1972“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”17/05/1972“संगठन रूपी किले को मजबूत बनाने का साधन”08/06/1972“सम्पूर्ण स्टेज की परख”14/06/1972“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”21/06/1972“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”11/07/1972“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”16/07/1972“स्वच्छ और आत्मिक बल वाली आत्मा ही आकर्षणमूर्त है”19/07/1972“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”24/12/1972“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”18/01/1973“समानता और समीपता”23/01/1973“सम्पूर्ण मूर्त बनने के चार स्तम्भ”09/04/1973“उन्नति के पथ पर अग्रसर होने की युक्तियां”08/05/1973“सर्वोच्च स्वमान”06/06/1973“समानता और समीपता”23/09/1973“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”03/02/1974“उपराम-वृत्ति व ज्वाला रूप के दृढ़ संकल्प से विनाश का कार्य सम्पन्न करो”02/05/1974“अब बाप समान सर्व गुण सम्पन्न बनो”23/05/1974“हद की आकर्षणों या विभूतियों से परे रहने वाला ही सच्चा वैष्णव”24/06/1974“राजयोगी ही विश्व-राज्य के अधिकारी”30/06/1974“अव्यक्त स्थिति में स्थित होने से पुरुषार्थ की गति में तीव्रता”04/07/1974“स्व-स्थिति की श्रेष्ठता से व्यर्थ संकल्पों की हलचल समाप्त”11/07/1974“मुरली में दी गई डायरेक्शन से ही सर्व कमियों से छुटकारा”14/07/1974“बाप समान सफलता-मूर्त बनने का साधन - सर्व के प्रति शुभ भावना”07/02/1975“सन्तुष्टता ही सम्पूर्णता की निशानी है”06/09/1975“तीन कम्बाइन्ड स्वरूप”09/09/1975“ग्लानि को गायन समझकर रहमदिल बनो”22/09/1975“स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है”07/10/1975“सर्व अधिकार और बेहद के वैराग्य वाला ही राजऋषि”19/10/1975“वृक्षपति द्वारा कल्प-वृक्ष की दुर्दशा का आंखों देखा हाल”23/01/1976“संकल्प, वाणी और स्वरूप के हाईएस्ट और होलीएस्ट होने से बाप की प्रत्यक्षता”02/02/1976“भक्तों और पाण्डवों का पोतामेल”05/01/1977“त्यागी और तपस्वी बच्चे सदा पास हैं”26/01/1977“अन्तर्मुखता द्वारा सूक्ष्म शक्ति की लीलाओं का अनुभव”06/02/1977“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”14/04/1977“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”16/04/1977“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”05/05/1977“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”11/05/1977“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”14/05/1977“स्वमान और फ़रमान”28/05/1977“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”05/06/1977“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”07/06/1977“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”25/06/1977“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”24/01/1978“निरन्तर सेवाधारी”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”06/01/1979“सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी आत्माओं के प्रैक्टिकल जीवन की धारणाओं के चिन्ह”08/01/1979“संगमयुग पर समानता में समीप और भविष्य के सम्बन्ध में समीप”12/01/1979“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”16/01/1979“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”18/01/1979“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”25/01/1979“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”14/11/1979“ब्राह्मण जीवन की निशानी है - सदा खुशी की झलक”07/01/1980“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”09/01/1980“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”25/01/1980“बिन्दु रूप परमात्मा का बिन्दु रूप आत्मा से मिलन”28/01/1980“सम्पूर्ण ब्रह्मा और ब्राह्मणों के सम्पूर्ण स्वरूप के अन्तर का कारण और निवारण”18/01/1981“‘स्मृति-स्वरूप' का आधार याद और सेवा”20/01/1981“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”13/03/1981“डबल रूप से सेवा द्वारा ही आध्यात्मिक जागृति”15/03/1981“स्वदर्शन चक्रधारी तथा चक्रवर्ती ही विश्व-कल्याणकारी”17/03/1981“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”19/03/1981“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”25/03/1981“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”29/03/1981“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”13/04/1981“रूहे-गुलाब की विशेषता”04/10/1981“संकल्प शक्ति का महत्व”09/10/1981“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”19/10/1981“हर ब्राह्मण चैतन्य तारा मण्डल का श्रृंगार”24/10/1981“सच्चे आशिक की निशानी”29/10/1981“बाप और बच्चों का रुहानी मिलन”06/11/1981“विशेष युग का विशेष फल”18/11/1981“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”21/11/1981“छोड़ो तो छूटो”26/11/1981“सहयोगी ही सहजयोगी”02/01/1982“विश्व-परिवर्तन की जिम्मेवारी - संगमयुगी ब्राह्मणों पर”10/01/1982“स्वराज्य अधिकारी आत्माओं का आसन - कर्मातीत स्टेज”07/03/1982“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”03/04/1982“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”06/04/1982“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”16/04/1982“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”26/04/1982“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”02/05/1982“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”25/12/1982“विधि, विधान और वरदान”03/01/1983“हर गुण, हर शक्ति को निजी स्वरूप बनाओ बाप समान बनो”21/01/1983“संगम पर बाप और ब्राह्मण सदा साथ साथ”24/02/1983“दिलाराम बाप का दिलरूबा बच्चों से मिलन”27/03/1983“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”03/04/1983“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”21/04/1983“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”23/05/1983“छोड़ो तो छूटो!”25/05/1983“ब्रह्मा बाप की बच्चों से एक आशा”01/06/1983“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”10/11/1983“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”20/02/1984“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”07/03/1984“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”12/03/1984“सन्तुष्टता”19/12/1984“सर्वश्रेष्ठ, सहज तथा स्पष्ट मार्ग”07/01/1985“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”09/01/1985“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”23/01/1985“दिव्य जन्म की गिफ्ट - दिव्य नेत्र”02/03/1985“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”12/03/1985“सत्यता की शक्ति”24/03/1985“अब नहीं तो कब नहीं”27/03/1985“कर्मातीत अवस्था”30/03/1985“तीन-तीन बातों का पाठ”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”20/01/1986“पुरुषार्थ और परिवर्तन के गोल्डन चांस का वर्ष”18/02/1986“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”20/02/1986“उड़ती कला से सर्व का भला”01/03/1986“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”07/03/1986“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”11/04/1986“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”20/03/1987“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”21/10/1987“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”25/10/1987“चार बातों से न्यारे बनो”18/11/1987“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”22/11/1987“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”27/11/1987“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”27/12/1987“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”31/12/1987“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”13/12/1989“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”29/12/1989“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”31/12/1989“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”06/01/1990“होलीहँस की परिभाषा”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”07/03/1990“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”10/04/1991“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”26/10/1991“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”04/12/1991“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”13/02/1992“अनेक जन्म का प्यार सम्पन्न जीवन बनाने का आधार - इस जन्म का परमात्म-प्यार”01/04/1992“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”08/04/1992“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”

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