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बापसामान सामान - Like Father - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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बापसामान सामान - Like Father
बापसामान सामान - Like Father
284 unique murli dates in this topic
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200 murlis in हिंदी
23/01/1969
“अस्थियां हैं स्थिति की स्मृति दिलाने वाली”
02/02/1969
“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
13/03/1969
“प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”
20/03/1969
“सात बातें छोड़ो और सात बातें धारण करो”
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
26/05/1969
“सम्पूर्ण स्नेही की परख”
18/06/1969
“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”
26/06/1969
“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
16/10/1969
“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”
20/10/1969
“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
13/11/1969
“बापदादा की उम्मीदें - क्वान्टिटी के बजाए क्वालिटी वाले बनो और बनाओ”
18/01/1970
“सम्पूर्ण विल करने से विल-पावर की प्राप्ति”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
19/06/1970
“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”
25/06/1970
“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”
26/06/1970
“कामधेनु का अर्थ”
29/06/1970
“समर्पण का विशाल रूप”
02/07/1970
“साइलेन्स बल का प्रयोग”
27/07/1970
“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”
30/07/1970
“महारथी अर्थात् महानता”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
29/10/1970
“दीपमाला का सच्चा रहस्य”
01/11/1970
“बाप समान बनने की युक्तियां”
03/12/1970
“सामना करने के लिए कामनाओं का त्याग”
05/12/1970
“प्रतिज्ञा करने वालों को माया की चैलेंज”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
26/01/1971
“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”
01/02/1971
“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”
25/03/1971
“न्यारे और विश्व के प्यारे बनने की विधि”
06/05/1971
“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
03/02/1972
“स्वयं को जानने से संयम और समय की पहचान”
05/02/1972
“नशा और निशाना”
27/02/1972
“होलीहंस बनने का यादगार - होली”
28/02/1972
“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”
12/03/1972
“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”
15/03/1972
“त्याग और भाग्य”
02/04/1972
“महिमा योग्य कैसे बनें?”
03/05/1972
“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
17/05/1972
“संगठन रूपी किले को मजबूत बनाने का साधन”
08/06/1972
“सम्पूर्ण स्टेज की परख”
14/06/1972
“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”
21/06/1972
“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”
11/07/1972
“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”
16/07/1972
“स्वच्छ और आत्मिक बल वाली आत्मा ही आकर्षणमूर्त है”
19/07/1972
“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”
24/12/1972
“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”
18/01/1973
“समानता और समीपता”
23/01/1973
“सम्पूर्ण मूर्त बनने के चार स्तम्भ”
09/04/1973
“उन्नति के पथ पर अग्रसर होने की युक्तियां”
08/05/1973
“सर्वोच्च स्वमान”
06/06/1973
“समानता और समीपता”
23/09/1973
“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”
03/02/1974
“उपराम-वृत्ति व ज्वाला रूप के दृढ़ संकल्प से विनाश का कार्य सम्पन्न करो”
02/05/1974
“अब बाप समान सर्व गुण सम्पन्न बनो”
23/05/1974
“हद की आकर्षणों या विभूतियों से परे रहने वाला ही सच्चा वैष्णव”
24/06/1974
“राजयोगी ही विश्व-राज्य के अधिकारी”
30/06/1974
“अव्यक्त स्थिति में स्थित होने से पुरुषार्थ की गति में तीव्रता”
04/07/1974
“स्व-स्थिति की श्रेष्ठता से व्यर्थ संकल्पों की हलचल समाप्त”
11/07/1974
“मुरली में दी गई डायरेक्शन से ही सर्व कमियों से छुटकारा”
14/07/1974
“बाप समान सफलता-मूर्त बनने का साधन - सर्व के प्रति शुभ भावना”
07/02/1975
“सन्तुष्टता ही सम्पूर्णता की निशानी है”
06/09/1975
“तीन कम्बाइन्ड स्वरूप”
09/09/1975
“ग्लानि को गायन समझकर रहमदिल बनो”
22/09/1975
“स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है”
07/10/1975
“सर्व अधिकार और बेहद के वैराग्य वाला ही राजऋषि”
19/10/1975
“वृक्षपति द्वारा कल्प-वृक्ष की दुर्दशा का आंखों देखा हाल”
23/01/1976
“संकल्प, वाणी और स्वरूप के हाईएस्ट और होलीएस्ट होने से बाप की प्रत्यक्षता”
02/02/1976
“भक्तों और पाण्डवों का पोतामेल”
05/01/1977
“त्यागी और तपस्वी बच्चे सदा पास हैं”
26/01/1977
“अन्तर्मुखता द्वारा सूक्ष्म शक्ति की लीलाओं का अनुभव”
06/02/1977
“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”
14/04/1977
“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”
16/04/1977
“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
14/05/1977
“स्वमान और फ़रमान”
28/05/1977
“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”
02/06/1977
“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”
05/06/1977
“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
25/06/1977
“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
24/01/1978
“निरन्तर सेवाधारी”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
06/01/1979
“सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी आत्माओं के प्रैक्टिकल जीवन की धारणाओं के चिन्ह”
08/01/1979
“संगमयुग पर समानता में समीप और भविष्य के सम्बन्ध में समीप”
12/01/1979
“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”
16/01/1979
“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”
18/01/1979
“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”
25/01/1979
“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”
14/11/1979
“ब्राह्मण जीवन की निशानी है - सदा खुशी की झलक”
07/01/1980
“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”
09/01/1980
“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”
25/01/1980
“बिन्दु रूप परमात्मा का बिन्दु रूप आत्मा से मिलन”
28/01/1980
“सम्पूर्ण ब्रह्मा और ब्राह्मणों के सम्पूर्ण स्वरूप के अन्तर का कारण और निवारण”
18/01/1981
“‘स्मृति-स्वरूप' का आधार याद और सेवा”
20/01/1981
“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”
13/03/1981
“डबल रूप से सेवा द्वारा ही आध्यात्मिक जागृति”
15/03/1981
“स्वदर्शन चक्रधारी तथा चक्रवर्ती ही विश्व-कल्याणकारी”
17/03/1981
“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”
19/03/1981
“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”
25/03/1981
“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”
27/03/1981
“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”
29/03/1981
“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
13/04/1981
“रूहे-गुलाब की विशेषता”
04/10/1981
“संकल्प शक्ति का महत्व”
09/10/1981
“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”
19/10/1981
“हर ब्राह्मण चैतन्य तारा मण्डल का श्रृंगार”
24/10/1981
“सच्चे आशिक की निशानी”
29/10/1981
“बाप और बच्चों का रुहानी मिलन”
06/11/1981
“विशेष युग का विशेष फल”
18/11/1981
“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”
21/11/1981
“छोड़ो तो छूटो”
26/11/1981
“सहयोगी ही सहजयोगी”
02/01/1982
“विश्व-परिवर्तन की जिम्मेवारी - संगमयुगी ब्राह्मणों पर”
10/01/1982
“स्वराज्य अधिकारी आत्माओं का आसन - कर्मातीत स्टेज”
07/03/1982
“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”
03/04/1982
“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”
06/04/1982
“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”
16/04/1982
“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”
26/04/1982
“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”
02/05/1982
“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”
25/12/1982
“विधि, विधान और वरदान”
03/01/1983
“हर गुण, हर शक्ति को निजी स्वरूप बनाओ बाप समान बनो”
21/01/1983
“संगम पर बाप और ब्राह्मण सदा साथ साथ”
24/02/1983
“दिलाराम बाप का दिलरूबा बच्चों से मिलन”
27/03/1983
“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”
03/04/1983
“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”
21/04/1983
“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”
09/05/1983
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”
23/05/1983
“छोड़ो तो छूटो!”
25/05/1983
“ब्रह्मा बाप की बच्चों से एक आशा”
01/06/1983
“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
10/11/1983
“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”
20/02/1984
“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”
07/03/1984
“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”
12/03/1984
“सन्तुष्टता”
19/12/1984
“सर्वश्रेष्ठ, सहज तथा स्पष्ट मार्ग”
07/01/1985
“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”
09/01/1985
“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”
23/01/1985
“दिव्य जन्म की गिफ्ट - दिव्य नेत्र”
02/03/1985
“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”
12/03/1985
“सत्यता की शक्ति”
24/03/1985
“अब नहीं तो कब नहीं”
27/03/1985
“कर्मातीत अवस्था”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
20/01/1986
“पुरुषार्थ और परिवर्तन के गोल्डन चांस का वर्ष”
18/02/1986
“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
07/03/1986
“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”
31/03/1986
“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”
11/04/1986
“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
20/03/1987
“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”
21/10/1987
“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”
25/10/1987
“चार बातों से न्यारे बनो”
18/11/1987
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
22/11/1987
“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
06/12/1987
“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
29/12/1989
“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”
31/12/1989
“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
06/01/1990
“होलीहँस की परिभाषा”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
07/03/1990
“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
17/03/1991
“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”
10/04/1991
“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”
26/10/1991
“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”
04/12/1991
“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
13/02/1992
“अनेक जन्म का प्यार सम्पन्न जीवन बनाने का आधार - इस जन्म का परमात्म-प्यार”
01/04/1992
“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
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