Command Palette
Search for a command to run...
Loading topic
Brahma Kumaris
Murli
Home
Murli Search
Murli Topics
Murli Chintan
AI Murli Chintan (ChatGPT)
Languages
E
English
ह
हिंदी
ગ
ગુજરાતી
త
తెలుగు
Library
Overview
Favorites
Notes & Highlights
Collections
Tracker
Settings
BKOne
Toggle Sidebar
Brahma Kumaris
Murli
Home
Library
Settings
BKOne
Search
K
Toggle theme
Home
Search
BKOne
Library
Settings
चार बाते - Four thing - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
Home
Topics
चार बाते - Four thing
चार बाते - Four thing
84 unique murli dates in this topic
English
हिंदी
ગુજરાતી
తెలుగు
83 murlis in हिंदी
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
16/07/1969
“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
03/10/1969
“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
25/12/1969
“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”
05/03/1970
“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
02/04/1970
“सम्पूर्ण स्टेज की निशानियां”
05/04/1970
“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”
14/05/1970
“समर्पण का गुह्य अर्थ”
29/06/1970
“समर्पण का विशाल रूप”
27/07/1970
“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
05/11/1970
“डिले इज़ डेन्जर”
18/01/1971
“अव्यक्त स्थिति द्वारा सेवा”
22/01/1971
“दिलतख्त नशीन आत्मा की निशानी”
26/01/1971
“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”
01/02/1971
“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”
11/02/1971
“अंत:वाहक शरीर द्वारा सेवा”
14/06/1972
“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”
02/08/1972
“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”
19/09/1972
“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”
12/11/1972
“अलौकिक कर्म करने की कला”
17/05/1973
“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”
08/07/1973
“समय की पुकार”
21/07/1973
“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”
18/06/1974
“लाइट हाउस और माइट हाउस बन, नई दुनिया के मेकर बनो”
26/06/1974
“सर्व सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो”
08/02/1975
“निश्चय रूपी आसन पर अचल स्थिति”
03/08/1975
“शिव शक्ति व पाण्डव सेना को तैयार होने के लिए सावधानी”
30/09/1975
“सारे कल्प में विशेष पार्ट बजाने वाली श्रेष्ठ आत्माओं की विशेषतायें”
04/10/1975
“अब दृढ़ संकल्प की तीली से कमज़ोरियों के रावण को जलाओ”
19/10/1975
“वृक्षपति द्वारा कल्प-वृक्ष की दुर्दशा का आंखों देखा हाल”
02/02/1976
“भक्तों और पाण्डवों का पोतामेल”
05/02/1977
“महानता के आधार”
23/04/1977
“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”
27/05/1977
“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”
28/05/1977
“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”
26/12/1978
“इष्ट देव की विशेषतायें”
25/01/1979
“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”
14/01/1980
“रूहानी सेनानियों से रूहानी कमाण्डर की मुलाकात”
06/02/1980
“अशरीरी बनने की सहज विधि”
21/03/1981
“सच्ची होली कैसे मनायें?”
06/11/1981
“विशेष युग का विशेष फल”
08/11/1981
“अन्तर सम्पन्न करने का साधन ‘तुरन्त दान महापुण्य’”
13/04/1982
“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”
15/01/1983
“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”
30/04/1983
“परम पूज्य बनने का आधार”
01/06/1983
“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
14/01/1984
“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”
22/02/1984
“संगम पर चार कम्बाइन्ड रूपों का अनुभव”
08/04/1984
“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”
15/04/1984
“स्नेही, सहयोगी, शक्तिशाली बच्चों की तीन अवस्थाएं”
30/01/1985
“मायाजीत और प्रकृतिजीत ही स्वराज्य-अधिकारी”
18/02/1985
“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”
21/02/1985
“शीतलता की शक्ति”
24/02/1985
“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”
27/03/1985
“कर्मातीत अवस्था”
21/10/1987
“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”
25/10/1987
“चार बातों से न्यारे बनो”
29/10/1987
“तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति”
06/11/1987
“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”
10/01/1988
“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
06/01/1990
“होलीहँस की परिभाषा”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
20/01/1990
“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
09/01/1995
“निश्चयबुद्धि की निशानियाँ - निश्चित विजयी और सदा निश्चिन्त स्थिति का अनुभव”
31/12/1996
“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”
15/12/1999
“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
31/12/2004
“इस वर्ष के आरम्भ से बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है''
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
21/10/2005
“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”
30/11/2006
“ज्वालामुखी तपस्या द्वारा मैं-पन की पूंछ को जलाकर बापदादा समान बनो तब समाप्ति समीप आयेगी''
02/02/2007
“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”
18/01/2008
“सच्चे स्नेही बन, सब बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो”