चार बाते - Four thing
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17/04/1969“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”16/07/1969“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”23/07/1969“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”03/10/1969“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”09/11/1969“भविष्य को जानने की युक्तियां”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”25/12/1969“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”05/03/1970“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”26/03/1970“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”02/04/1970“सम्पूर्ण स्टेज की निशानियां”05/04/1970“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”14/05/1970“समर्पण का गुह्य अर्थ”29/06/1970“समर्पण का विशाल रूप”27/07/1970“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”22/10/1970“फुल की निशानी - फ्लोलेस”05/11/1970“डिले इज़ डेन्जर”18/01/1971“अव्यक्त स्थिति द्वारा सेवा”22/01/1971“दिलतख्त नशीन आत्मा की निशानी”26/01/1971“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”01/02/1971“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”11/02/1971“अंत:वाहक शरीर द्वारा सेवा”14/06/1972“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”02/08/1972“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”19/09/1972“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”12/11/1972“अलौकिक कर्म करने की कला”17/05/1973“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”08/07/1973“समय की पुकार”21/07/1973“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”18/06/1974“लाइट हाउस और माइट हाउस बन, नई दुनिया के मेकर बनो”26/06/1974“सर्व सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो”08/02/1975“निश्चय रूपी आसन पर अचल स्थिति”03/08/1975“शिव शक्ति व पाण्डव सेना को तैयार होने के लिए सावधानी”30/09/1975“सारे कल्प में विशेष पार्ट बजाने वाली श्रेष्ठ आत्माओं की विशेषतायें”04/10/1975“अब दृढ़ संकल्प की तीली से कमज़ोरियों के रावण को जलाओ”19/10/1975“वृक्षपति द्वारा कल्प-वृक्ष की दुर्दशा का आंखों देखा हाल”02/02/1976“भक्तों और पाण्डवों का पोतामेल”05/02/1977“महानता के आधार”23/04/1977“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”27/05/1977“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”28/05/1977“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”26/12/1978“इष्ट देव की विशेषतायें”25/01/1979“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”14/01/1980“रूहानी सेनानियों से रूहानी कमाण्डर की मुलाकात”06/02/1980“अशरीरी बनने की सहज विधि”21/03/1981“सच्ची होली कैसे मनायें?”06/11/1981“विशेष युग का विशेष फल”08/11/1981“अन्तर सम्पन्न करने का साधन ‘तुरन्त दान महापुण्य’”13/04/1982“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”15/01/1983“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”30/04/1983“परम पूज्य बनने का आधार”01/06/1983“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”14/01/1984“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”22/02/1984“संगम पर चार कम्बाइन्ड रूपों का अनुभव”08/04/1984“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”15/04/1984“स्नेही, सहयोगी, शक्तिशाली बच्चों की तीन अवस्थाएं”30/01/1985“मायाजीत और प्रकृतिजीत ही स्वराज्य-अधिकारी”18/02/1985“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”21/02/1985“शीतलता की शक्ति”24/02/1985“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”27/03/1985“कर्मातीत अवस्था”21/10/1987“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”25/10/1987“चार बातों से न्यारे बनो”29/10/1987“तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति”06/11/1987“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”10/01/1988“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”13/12/1989“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”06/01/1990“होलीहँस की परिभाषा”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”20/01/1990“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”09/01/1995“निश्चयबुद्धि की निशानियाँ - निश्चित विजयी और सदा निश्चिन्त स्थिति का अनुभव”31/12/1996“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”15/12/1999“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''31/12/2004“इस वर्ष के आरम्भ से बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”21/10/2005“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”30/11/2006“ज्वालामुखी तपस्या द्वारा मैं-पन की पूंछ को जलाकर बापदादा समान बनो तब समाप्ति समीप आयेगी''02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”18/01/2008“सच्चे स्नेही बन, सब बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो”
