वृत्ति - Attitude
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28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”26/03/1970“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”26/01/1971“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”05/03/1971“भट्ठी की अलौकिक छाप”29/04/1971“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”11/06/1971“तीनों लोकों में बापदादा के पास रहने वाले रत्नों की निशानियाँ”10/05/1972“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”15/05/1972“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”08/06/1972“सम्पूर्ण स्टेज की परख”10/06/1972“सूक्ष्म अभिमान और अनजानपन”12/07/1972“मरजीवापन की स्मृति से गृहस्थी वा प्रवृत्ति की विस्मृति”19/07/1972“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”06/08/1972“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”13/04/1973“भक्त और भावना का फल”06/02/1974“परखने की शक्ति से महारथी की परख”11/07/1974“मुरली में दी गई डायरेक्शन से ही सर्व कमियों से छुटकारा”18/07/1974“सम्पूर्ण पवित्र वृत्ति और दृष्टि से श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”24/01/1978“निरन्तर सेवाधारी”21/11/1979“विश्व परिवर्तन के लिए सर्व की एक ही वृत्ति का होना आवश्यक”12/12/1979“रूहानी अलंकार और उनसे सजी हुई मूर्तियाँ”19/03/1981“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”13/04/1981“रूहे-गुलाब की विशेषता”15/04/1981“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”27/03/1983“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”27/04/1983“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”05/03/1984“शान्ति की शक्ति का महत्व”19/11/1984“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”22/01/1986“बापदादा की आशा - सम्पूर्ण और सम्पन्न बनो”16/02/1986“गोल्डन जुबली वर्ष में गोल्डन दुनिया और गोल्डन लाइट के स्वीट होम का अनुभव कराना”01/03/1986“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”20/03/1987“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”09/10/1987“अलौकिक राज्य दरबार का समाचार”02/11/1987“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”03/03/1988“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”27/11/1989“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”19/03/1990“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”03/04/1991“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”11/12/1991“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”02/03/1992“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”18/11/1993“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”26/02/1995“संगमयुग उत्सव का युग है - उत्सव मनाना अर्थात् अविनाशी उमंग-उत्साह में रहना”07/03/1995“ब्राह्मण अर्थात् धर्म सत्ता और स्वराज्य सत्ता की अधिकारी आत्मा”03/04/1996“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”12/12/1998“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”15/02/2000“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”24/02/2002“बाप को प्रत्यक्ष करने के लिए अपनी वा दूसरों की वृत्ति को पॉजिटिव बनाओ''08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''25/10/2002“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”02/02/2004“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''15/10/2004“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''07/03/2005“सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत रखना और मैं पन को समर्पित करना ही शिवजयन्ती मनाना है''15/12/2005“नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''15/12/2006“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”17/03/2007“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”02/02/2008“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”
