अनुभवी मूर्त - Experienced

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06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”09/04/1971“अव्यक्त स्थिति में सर्व गुणों का अनुभव”24/05/1971“पोज़ीशन में ठहरने से अपोज़ीशन समाप्त”10/06/1971“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”03/10/1971“निर्मानता के गुण से विश्व निर्माता”09/10/1971“पॉवरफुल वृत्ति से सर्विस में वृद्धि”21/01/1972“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”20/05/1972“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”02/08/1972“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”09/02/1975“आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा विश्व-परिवर्तन कैसे?”20/09/1975“शक्ति होते हुए भी जीवन में सफलता और सन्तुष्टता क्यों नहीं?”25/10/1975“बेहद की शिक्षिका समझ वैराग्य वृत्ति को धारण करो”07/02/1976“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”06/02/1977“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”14/04/1977“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”19/05/1977“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”10/06/1977“मन्‍त्र और यन्‍त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”12/06/1977“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”14/06/1977“देश और विदेश का सैर-समाचार”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”28/06/1977“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”16/01/1980“ऑलमाइटी अथॉरिटी राजयोगी सभा व लोक पसन्द सभा”01/02/1980“सूक्ष्मवतन की कारोबार”06/02/1980“अशरीरी बनने की सहज विधि”09/03/1981“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”11/03/1981“सफलता के दो मुख्य आधार”17/03/1981“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”07/04/1981“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”02/10/1981“सदा मिलन के झूले में झूलने का आधार”04/10/1981“संकल्प शक्ति का महत्व”04/01/1982“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”06/01/1982“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”08/01/1982“लण्डन ग्रुप के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”14/01/1982“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”30/04/1982“विस्तार को बिन्दी में समाओ”03/04/1983“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”12/12/1983“एकाग्रता से सर्व शक्तियों की प्राप्ति”12/01/1984“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”14/01/1984“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”26/04/1984“रुहानी विचित्र मेले में सर्व खज़ानों की प्राप्ति”03/12/1984“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”21/02/1985“शीतलता की शक्ति”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”20/03/1987“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”14/10/1987“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”10/12/1987“तन, मन, धन और सम्बन्ध का श्रेष्ठ सौदा”23/12/1987“मनन शक्ति और मगन स्थिति”11/11/1989“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”01/04/1992“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”09/03/1994“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”17/11/1994“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”31/12/1996“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”06/03/1997“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”13/11/1997“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”18/01/1999“वर्तमान समय के प्रमाण वैराग्य वृत्ति को इमर्ज कर साधना का वायुमण्डल बनाओ”15/03/1999“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”18/01/2001“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”04/02/2001“समय प्रमाण स्वराज्य अधिकारी बन सर्व रूहानी साधन तीव्रगति से कार्य में लगाओ”02/02/2004“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''20/02/2005“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”31/10/2006“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''15/12/2006“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”31/03/2007“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”31/12/2007“नये वर्ष में अखण्ड महादानी, अखण्ड निर्विघ्न, अखण्ड योगी और सदा सफलतामूर्त बनना”02/02/2008“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”02/04/2008”इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”

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