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अनुभवी मूर्त - Experienced
अनुभवी मूर्त - Experienced
84 unique murli dates in this topic
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82 murlis in हिंदी
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
09/04/1971
“अव्यक्त स्थिति में सर्व गुणों का अनुभव”
24/05/1971
“पोज़ीशन में ठहरने से अपोज़ीशन समाप्त”
10/06/1971
“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”
03/10/1971
“निर्मानता के गुण से विश्व निर्माता”
09/10/1971
“पॉवरफुल वृत्ति से सर्विस में वृद्धि”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
20/05/1972
“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”
02/08/1972
“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”
09/02/1975
“आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा विश्व-परिवर्तन कैसे?”
20/09/1975
“शक्ति होते हुए भी जीवन में सफलता और सन्तुष्टता क्यों नहीं?”
25/10/1975
“बेहद की शिक्षिका समझ वैराग्य वृत्ति को धारण करो”
07/02/1976
“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”
06/02/1977
“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”
14/04/1977
“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
10/06/1977
“मन्त्र और यन्त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
14/06/1977
“देश और विदेश का सैर-समाचार”
20/06/1977
“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”
28/06/1977
“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
16/01/1980
“ऑलमाइटी अथॉरिटी राजयोगी सभा व लोक पसन्द सभा”
01/02/1980
“सूक्ष्मवतन की कारोबार”
06/02/1980
“अशरीरी बनने की सहज विधि”
09/03/1981
“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”
11/03/1981
“सफलता के दो मुख्य आधार”
17/03/1981
“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”
07/04/1981
“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”
02/10/1981
“सदा मिलन के झूले में झूलने का आधार”
04/10/1981
“संकल्प शक्ति का महत्व”
04/01/1982
“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”
06/01/1982
“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”
08/01/1982
“लण्डन ग्रुप के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”
14/01/1982
“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”
30/04/1982
“विस्तार को बिन्दी में समाओ”
03/04/1983
“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”
12/12/1983
“एकाग्रता से सर्व शक्तियों की प्राप्ति”
12/01/1984
“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”
14/01/1984
“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”
26/04/1984
“रुहानी विचित्र मेले में सर्व खज़ानों की प्राप्ति”
03/12/1984
“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”
21/02/1985
“शीतलता की शक्ति”
31/03/1986
“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”
20/03/1987
“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”
14/10/1987
“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”
10/12/1987
“तन, मन, धन और सम्बन्ध का श्रेष्ठ सौदा”
23/12/1987
“मनन शक्ति और मगन स्थिति”
11/11/1989
“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
01/04/1992
“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
09/03/1994
“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
31/12/1996
“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”
06/03/1997
“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”
03/04/1997
“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”
13/11/1997
“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”
31/01/1998
“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”
18/01/1999
“वर्तमान समय के प्रमाण वैराग्य वृत्ति को इमर्ज कर साधना का वायुमण्डल बनाओ”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
18/01/2001
“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”
04/02/2001
“समय प्रमाण स्वराज्य अधिकारी बन सर्व रूहानी साधन तीव्रगति से कार्य में लगाओ”
02/02/2004
“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''
20/02/2005
“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''
03/02/2006
“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
31/10/2006
“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''
15/12/2006
“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''
02/02/2007
“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”
31/03/2007
“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”
31/12/2007
“नये वर्ष में अखण्ड महादानी, अखण्ड निर्विघ्न, अखण्ड योगी और सदा सफलतामूर्त बनना”
02/02/2008
“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”
02/04/2008
”इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”