मात पिता - Mother-Father

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18/01/1969“पिताश्री जी के अव्यक्त होने के बाद - अव्यक्त वतन से प्राप्त दिव्य सन्देश”16/06/1969“बड़े-से-बड़ा त्याग - अवगुणों का त्याग”26/06/1969“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”06/07/1969“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”27/08/1969“मदद लेने का साधन है - हिम्मत”09/11/1969“भविष्य को जानने की युक्तियां”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”25/01/1970“यादगार कायम करने की विधि”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”07/06/1970“दिव्य मूर्त बनने की विधि”06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”22/10/1970“फुल की निशानी - फ्लोलेस”23/10/1970“महारथी बनने का पुरुषार्थ”18/07/1971“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”03/02/1972“स्वयं को जानने से संयम और समय की पहचान”05/02/1972“नशा और निशाना”04/03/1972“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”12/03/1972“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”03/05/1972“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”09/05/1972“अपने फीचर से फ्यूचर दिखाओ”31/05/1972“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”11/07/1972“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”12/07/1972“मरजीवापन की स्मृति से गृहस्थी वा प्रवृत्ति की विस्मृति”22/07/1972“नष्टोमोहा बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ”21/07/1973“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”21/06/1974“महान् पद की बुकिंग के लिये महीन रूप से चेकिंग आवश्यक”30/06/1974“अव्यक्त स्थिति में स्थित होने से पुरुषार्थ की गति में तीव्रता”14/04/1977“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”16/04/1977“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”26/04/1977“स्वतन्‍त्रता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है”28/04/1977“सदा सुहागिन की निशानियाँ”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”05/05/1977“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”16/05/1977“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”19/05/1977“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”21/05/1977“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”24/05/1977“बाप के डायरेक्ट बच्चे ही डबल पूजा के अधिकारी बनते हैं”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”07/06/1977“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”25/06/1977“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”18/01/1978“बापदादा की सेवा का रिटर्न”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”25/01/1979“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”03/12/1979“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”21/01/1980“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”09/10/1981“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”28/12/1982“सदा एक रस, सम्पूर्ण चमकता हुआ सितारा बनो”05/04/1983“सर्व वरदान आपका जन्म-सिद्ध अधिकार”31/12/1983“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”22/04/1984“विचित्र बाप द्वारा विचित्र पढ़ाई तथा विचित्र प्राप्ति”16/02/1985“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”02/03/1985“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”18/03/1987“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”01/10/1987“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”07/03/1988“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”07/11/1989“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”18/01/1990“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”13/03/1990“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”31/12/1990“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”18/01/2003“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''15/12/2003“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''30/11/2004“अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”31/12/2006“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“15/10/2007“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”

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