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मात पिता - Mother-Father
मात पिता - Mother-Father
78 unique murli dates in this topic
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77 murlis in हिंदी
18/01/1969
“पिताश्री जी के अव्यक्त होने के बाद - अव्यक्त वतन से प्राप्त दिव्य सन्देश”
16/06/1969
“बड़े-से-बड़ा त्याग - अवगुणों का त्याग”
26/06/1969
“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”
06/07/1969
“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”
27/08/1969
“मदद लेने का साधन है - हिम्मत”
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
18/07/1971
“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”
03/02/1972
“स्वयं को जानने से संयम और समय की पहचान”
05/02/1972
“नशा और निशाना”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
12/03/1972
“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”
03/05/1972
“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”
09/05/1972
“अपने फीचर से फ्यूचर दिखाओ”
31/05/1972
“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”
11/07/1972
“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”
12/07/1972
“मरजीवापन की स्मृति से गृहस्थी वा प्रवृत्ति की विस्मृति”
22/07/1972
“नष्टोमोहा बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ”
21/07/1973
“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”
21/06/1974
“महान् पद की बुकिंग के लिये महीन रूप से चेकिंग आवश्यक”
30/06/1974
“अव्यक्त स्थिति में स्थित होने से पुरुषार्थ की गति में तीव्रता”
14/04/1977
“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”
16/04/1977
“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”
26/04/1977
“स्वतन्त्रता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
16/05/1977
“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
21/05/1977
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”
24/05/1977
“बाप के डायरेक्ट बच्चे ही डबल पूजा के अधिकारी बनते हैं”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
20/06/1977
“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”
25/06/1977
“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
18/01/1978
“बापदादा की सेवा का रिटर्न”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
25/01/1979
“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”
03/12/1979
“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”
21/01/1980
“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”
09/10/1981
“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”
28/12/1982
“सदा एक रस, सम्पूर्ण चमकता हुआ सितारा बनो”
05/04/1983
“सर्व वरदान आपका जन्म-सिद्ध अधिकार”
31/12/1983
“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”
22/04/1984
“विचित्र बाप द्वारा विचित्र पढ़ाई तथा विचित्र प्राप्ति”
16/02/1985
“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”
02/03/1985
“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
01/10/1987
“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”
07/03/1988
“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”
19/03/1988
“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”
07/11/1989
“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
18/01/1990
“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
13/03/1990
“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
16/03/1992
“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
30/03/1998
“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
18/01/2003
“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
15/12/2003
“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''
30/11/2004
“अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो''
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
31/12/2006
“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“
15/10/2007
“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”