दॄष्टि / दिव्य दॄष्टि - Divine Sight
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02/02/1969“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”06/02/1969“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”18/06/1969“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”06/07/1969“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”16/07/1969“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”19/07/1969“ज़ीरो और हीरो बनो”16/10/1969“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”09/12/1970“पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”29/04/1971“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”10/06/1971“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”11/06/1971“तीनों लोकों में बापदादा के पास रहने वाले रत्नों की निशानियाँ”28/07/1971“आकार में निराकार को देखने का अभ्यास”25/08/1971“मुख्य 7 कमजोरियां और उसको मिटाने के लिए 7 दिन का कोर्स”12/03/1972“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”15/05/1972“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”10/06/1972“सूक्ष्म अभिमान और अनजानपन”13/04/1973“भक्त और भावना का फल”11/07/1974“मुरली में दी गई डायरेक्शन से ही सर्व कमियों से छुटकारा”18/07/1974“सम्पूर्ण पवित्र वृत्ति और दृष्टि से श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”19/09/1975“शक्तियों एवं पाण्डवों की विशेषतायें”26/10/1975“विकारी देह रूपी साँप से सारी कमाई खत्म”21/05/1977“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”05/06/1977“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”01/02/1979“मनन-शक्ति ही माया जीत बनने का साधन”12/12/1979“रूहानी अलंकार और उनसे सजी हुई मूर्तियाँ”13/04/1981“रूहे-गुलाब की विशेषता”04/10/1981“संकल्प शक्ति का महत्व”08/10/1981“ब्रह्मा बाप की एक शुभ आशा”06/11/1981“विशेष युग का विशेष फल”29/03/1982“सच्चे वैष्णव अर्थात् सदा गुण ग्राहक”27/04/1983“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”21/01/1985“ईश्वरीय जन्म दिन की गोल्डन गिफ्ट - ‘दिव्य बुद्धि’”01/03/1986“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”31/12/1986“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”03/03/1988“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”11/11/1989“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”23/11/1989“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”27/11/1989“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”20/01/1990“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”07/03/1990“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”31/03/1990“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”02/03/1992“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”18/11/1993“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”04/11/2001“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''25/10/2002“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''02/02/2004“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''05/03/2004“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''15/10/2004“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''07/03/2005“सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत रखना और मैं पन को समर्पित करना ही शिवजयन्ती मनाना है''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”15/12/2005“नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो”14/03/2006“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''31/10/2007“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”
