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अपने आपको देखो - To see/ask/think about one's ownself - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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अपने आपको देखो - To see/ask/think about one's ownself
अपने आपको देखो - To see/ask/think about one's ownself
62 unique murli dates in this topic
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62 murlis in हिंदी
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
18/09/1969
“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”
17/11/1969
“फर्श से अर्श पर जाने की युक्तियाँ”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
05/04/1970
“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
16/06/1972
“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”
11/07/1972
“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”
10/01/1977
“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”
12/01/1977
“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
28/01/1977
“ब्राह्मणों का धर्म और कर्म”
16/04/1977
“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
30/04/1977
“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
14/05/1977
“स्वमान और फ़रमान”
24/05/1977
“बाप के डायरेक्ट बच्चे ही डबल पूजा के अधिकारी बनते हैं”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
22/06/1977
“सितारों की दुनिया का रहस्य”
25/06/1977
“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
25/03/1981
“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”
21/11/1981
“छोड़ो तो छूटो”
26/11/1981
“सहयोगी ही सहजयोगी”
14/01/1982
“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”
12/03/1982
“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”
06/04/1982
“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”
13/01/1983
“स्वदर्शन चक्रधारी ही चक्रवर्ती राज्य भाग्य के अधिकारी”
27/03/1983
“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”
17/04/1983
“कर्मातीत स्थिति के लिए समेटने और समाने की शक्तियों की आवश्यकता”
27/04/1983
“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”
30/04/1983
“परम पूज्य बनने का आधार”
22/02/1984
“संगम पर चार कम्बाइन्ड रूपों का अनुभव”
19/04/1984
“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”
21/11/1984
“स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त”
01/01/1986
“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”
13/01/1986
“ब्राह्मण जीवन - सदा बेहद की खुशियों का जीवन”
09/04/1986
“सच्चे सेवाधारी की निशानी”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
05/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”
06/01/1988
“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”
27/03/1988
“सर्वश्रेष्ठ सितारा - ‘सफलता का सितारा’”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
18/01/1990
“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”
18/01/1992
“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
12/12/1998
“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”
23/10/1999
“समय की पुकार - दाता बनो”
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
15/12/2003
“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
21/10/2005
“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”
30/11/2005
“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”
15/12/2005
“नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो”
15/10/2007
“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”