अधिकारी - Self sovereign
74 unique murli dates in this topic
73 murlis in हिंदी
17/05/1969“जादू मंत्र का दर्पण”18/06/1969“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”17/11/1969“फर्श से अर्श पर जाने की युक्तियाँ”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”20/05/1972“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”02/08/1972“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”24/04/1973“अलौकिक जन्म-पत्री”28/06/1973“योगयुक्त होने से स्वत: युक्तियुक्त संकल्प, बोल और कर्म होंगे”23/09/1973“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”02/05/1974“अब बाप समान सर्व गुण सम्पन्न बनो”10/02/1975“सर्व शक्तियों सहित सेवा में समर्पण”03/08/1975“शिव शक्ति व पाण्डव सेना को तैयार होने के लिए सावधानी”02/02/1977“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”01/12/1978“सर्व खजानों की चाबी - एकनामी बनना”08/01/1979“संगमयुग पर समानता में समीप और भविष्य के सम्बन्ध में समीप”07/01/1980“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”21/01/1980“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”06/02/1980“अशरीरी बनने की सहज विधि”18/03/1981“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”14/01/1982“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”22/03/1982“राज्य-सत्ता और धर्म-सत्ता के अधिकारी बच्चों से बापदादा की मुलाकात”06/04/1982“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”16/04/1982“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”21/03/1983“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”03/04/1983“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”27/04/1983“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”27/12/1983“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”16/01/1984“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”03/03/1984“स्व अधिकारियों के स्व के राज्य का हालचाल”08/04/1984“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”19/04/1984“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”24/04/1984“वर्तमान ब्राह्मण जन्म - हीरे तुल्य”26/11/1984“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”30/01/1985“मायाजीत और प्रकृतिजीत ही स्वराज्य-अधिकारी”06/01/1986“संगमयुग - जमा करने का युग”21/01/1987“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”09/10/1987“अलौकिक राज्य दरबार का समाचार”22/11/1987“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”27/12/1987“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”29/12/1989“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”06/01/1990“होलीहँस की परिभाषा”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”25/02/1991“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”18/11/1993“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”01/02/1994“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”18/02/1994“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”09/01/1996“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”24/02/1998“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”15/03/1999“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”23/10/1999“समय की पुकार - दाता बनो”11/11/2000“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”18/01/2001“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”04/02/2001“समय प्रमाण स्वराज्य अधिकारी बन सर्व रूहानी साधन तीव्रगति से कार्य में लगाओ”17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''18/01/2004“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''05/03/2004“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''02/11/2004“स्व-उपकारी बन अपकारी पर भी उपकार करो, सर्व शक्ति, सर्व गुण सम्पन्न सम्मान दाता बनो”18/01/2005“सेकेण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो”20/02/2005“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”18/01/2006“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”
